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समझ - 23.11.2025

 इतिहास शायद ही ऐसी संस्थाओं को पुरस्कृत करता है, जो बदलाव इनकार करती हों।
- सत्ताधारी दल चाहे जितना ताकतवर या योग्य हो, संतुलन बनाए रखने के लिए उसके सामने एक मजबूत विपक्ष होना ही चाहिए। लोकतंत्र सिर्फ चुनावी गणित नहीं। इसका अर्थ विकल्पों का लगातार बने रहना भी है। अगर एक धुरी जरूरत से अधिक ताकतवर हो जाए तो दूसरी ढह जाती है और लोकतंत्र की जीवंतता बनाए रखने वाला संतुलन खत्म हो जाता है। मजबूत विपक्ष की मौजूदगी ही सरकार को आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है। उसकी जवाबदेही सुनिश्चित करती है। 
- स्वच्छ हवा का अधिकार और प्रदूषण रहित वातावरण हमारा मूल अधिकार है और न्यायालय स्वयं बार-बार इस बात की पुष्टि कर चुका है
- पर्यावरण संरक्षण को सुविधा के लिए छोड़ा नहीं जा सकता। सतत या टिकाऊ विकास कोई बाधा नहीं है। यह एकमात्र वैध मार्ग है जो नागरिकों के अधिकारों और भारत के पर्यावरणीय भविष्य दोनों का सम्मान करता है।
- जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता से दूर जाने के खाने पर कोई भी चर्चा बारीकी से होनी चाहिए, न कि कठोर आदेशों जैसी ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला दा सिल्या ने इसकी आवश्यकता पर बात करते हुए 'निर्भरता का उल्लेख किया जो यह दर्शाता है कि यह केवल 'गंदी' बनाम 'स्वच्छ ऊर्जा' का साधारण द्वैत नहीं है निर्भरता में नौकरियां, सार्वजनिक वित्त और पूरे क्षेत्रीय अर्थ तंत्र शामिल हैं।
- अचानक बदलाव सामाजिक अस्थिरता का जोखिम पैदा करता है
- एक मजबूत संघीय ढांचे में भी हर हाल में लोकतंत्र के जीवन के लिए शक्तियों और उसकी सीमा को लेकर स्पष्टता बनी रहनी चाहिए। साथ ही संवैधानिक पदों पर बैठे लोग अगर संविधान की मर्यादा का खयाल रखें, तो इससे लोकतंत्र को भी मजबूती मिलेगी।


विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।

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मीरा जैन - साहित्यकार परिचय

अपनी रचनाओं से संवेदना और स्पष्टता जगाने वाली विख्यात लेखिका श्रीमती मीरा जैन का जन्म 2 नवबंर 1960 को जगदलपुर  (बस्तर) छ.ग. में हुआ, परिचय:
शिक्षा      - स्नातक 
जीवन साथी- इंजि. वीरचंद जैन
माता - श्रीमती केशर देवी मोदी
पिता - श्री विनयचंद जी मोदी 

लेखन विधा- लघुकथा , आलेख व्यंग्य , कहानी, कविताएं , क्षणिकाएं आदि ।

पत्र-प्रत्रिकायें जिनमें रचनायें प्रकाशित हुई है 2000 से अधिक रचनाएं निम्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं- 
 कादम्बिनी , सरिता , गृहशोभा, हंस , नया ज्ञानोदय , सरस सलिल , अहा !जिदंगी , मेरी सहेली , गृहलक्ष्मी,  वनिता , बिंदिया. नवनीत , जागरण सखी , मेरी सजनी , वीणा , नई गुदगुदी , साहित्य अमृत, कथादेश, माधुरी , मनस्वी , वेद अमृत , मनोरमा, विश्व हिंदी साहित्य मारीशस, देवपुत्र , नंदन , बाल भरती, मंगलयात्रा , साक्षात्कार . स्वदेश , पंजाब सौरभ, बाल भास्कर, बाल हंस, बच्चो का देश, शबनम ज्योति,अणुव्रत, द्वीप लहरी, अमृत कलश, प्रभात खबर, समाज्ञा ,नई दुनिया, दैनिक जागरण, अमर उजाला,  समान्तर ,दैनिक भास्कर, नव भारत टाइम्स , राजस्थान पत्रिका ,हरिभूमि, प्रभात खबर, भारतदर्शन न्यूजीलैडं,  ,हिंदी चेतना(कनाडा) नवनीत , बाल किलकारी(बिहार सरकार), उजाला, पंजाब केसरी, जनवाणी, नवभारत , सेतू-.यू.एस.  कथा देश , अक्षरा, लोकमत , अक्षरा , चम्बा न्यूज , द राइजिंग स्टेप, साहित्य समीर दस्तक, विश्व गाथा, अक्षर खबर , संगिनी , साहित्य गुंजन, राज एक्सप्रेस , समावर्तन , दिव्यालोक , दैनिक अग्नि पथ ,अवन्तिका , अक्षर विश्व , शब्द प्रवाह, साहित्य समीर दस्तक , प्रभाश्री ज्ञान सागर आदि अनेक।
वे संग्रह जिनमे मेरी लघुकथाएॅ हैं-  तीसरी ऑख , द्वीप लहरी , समान्तर ,क्षितिज ,चर्चित ,मिन्नी (पंजाबी), सेतु , कालीमाटी ,दोहरे चेहरे , महा मानव , सागर के मोती, बुजुर्ग जीवन की, लघुकथाएं , कलश, दृष्टि, मन के मोती, गुलाबी गलियां आदि अनेक।
 नेपाली, गुजराती , पंजाबी , सिंधी , ओड़िया, बंगाली, असमिया, भोजपुरी,  अंग्रेजी,मलयालम , मराठी ,भाषा मेें भी अनुवाद एंव प्रकाशन।
आकाशवाणी जगदलपुर एवम् इंदौर से व्यंग्य,लघुकथाओं व अन्य रचनाओं का प्रसारण. म.प्र.दूरदर्शन से कविताओं का प्रसारण , बोल हरियाणा बोल तथा रेडियो दस्तक से प्रसारण।
 प्रकाशीत किताबें-
1- पुस्तक का नाम - मीरा जैन की सौ लघुकथाएं 
   प्रकाशन का वर्ष - सन् 2003 , 
   प्रकाशक       - मानव प्रकाशन
   द्वितीय संस्करण - प्रकाशन का वर्ष - सन् 2011 
   प्रकाश  - अध्ययन प्रकाशन ,दिल्ली
   तृतीय संस्करण - प्रकाशन का वर्ष - सन् 2013     
   चतुर्थ संस्करण - प्रकाशन का वर्ष - सन् 2016
2- पुस्तक का नाम - 101 लघुकथाएं
   प्रकाशन का वर्ष - सन् 2010दिसम्ब
 द्वितीय संस्करण जून2012 
 तृतीय संस्करण अगस्त 2014
   प्रकाशकश- पत्रिका प्रकाशन जयपुर , राज.
3- पुस्तक का नाम - दीन बनाता है दिखावा ,लेख,
 प्रकाशन का वर्ष - सितंबर 2013 
 द्वितीय संस्करण - प्रकाशन का वर्ष -2016
 प्रकाशक - बोधि प्रकाशन  जयपुर राज.
4- पुस्तक का नाम - मीरा जैन की कवितायें , कविता संग्रह ,      
    प्रकाशन का वर्ष - 2014
   प्रकाशक - अयन प्रकाशन दिल्ली
5- पुस्तक का नाम - सम्यक लघुकथाएं
   प्रकाशन का वर्ष - सन् 2016 फरवरी
   प्रकाशक  - बोधि प्रकाशन जयपुर , राज.
6- पुस्तक का नाम - श्रेष्ठ जीवन की संजीवनी 
प्रकाशन का वर्ष - फरवरी 2018  
 प्रकाशक   - बोधि प्रकाशन जयपुर , राज
7- पुस्तक का नाम - हेल्थ हादसा, व्यंग्य संग्रह,  
   प्रकाशन का वर्ष - मार्च 2019  
   प्रकाशक  - सूर्य मंदिर प्रकाशन
      8- पुस्तक का नाम - मानव मीत लघुकथाएं  
  प्रकाशन का वर्ष - मार्च 2019  
  प्रकाशक - सूर्य मंदिर प्रकाशन बीकानेर
पुस्तक का नाम-
 9-जीवन बन जाए आनंद का पर्याय,
लेख संग्रह 
 प्रकाशन वर्ष - 2020 
प्रकाशक -इंडिया नेट बुक, दिल्ली 
 पुस्तक का नाम -
10-भोर में भास्कर , लघुकथा संग्रह
प्रकाशन वर्ष    -  2022
 प्रकाशक इंडिया नेटवर्क नेट बुक दिल्ली 
11-मीरा जैन के सदाबहार लघुकथाएं 
प्रकाशक- जिज्ञासा प्रकाशन प्रकाशन- वर्ष 2023
 विशेष-                 
 2011में ‘‘ मीरा जैन की सौ लघुकथाएं‘‘विक्रम विश्व विद्यालय उज्जैन द्वारा शोध कार्य करावाया जा चुका है ।     

2022 - महाराष्ट्र, सावित्रीबाई फूले यूनिवर्सिटी पुणे द्वारा लघुकथाओं पर शोध कार्य जारी।

2024 - विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा मेरी लघुकथाओं पर शोधकर जारी है

अनेक लघुकथाओं पर लघु फिल्मों का निर्माण

       सम्यक लघुकथाएं पूर्णतया बालकों से संबंधित श्रेष्ठ आचरण पर आधारित है .
       सन् 2007-8 में निर्धन वर्ग आयोग म.प्र.शासन राज्य स्तर पर मेरे द्वारा भेजे गये सुझावों को
       प्रथम प्रथमिकता में चयनित किया .  
       केंद्रिय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मेरी किताबें क्रय  की  गई है ।
  अनेक भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद एवं प्रकाशन
       पुरस्कार - अंतर्राष्ट्रीय , राष्ट्र एंव राज्य स्तरीय अनेक पुरस्कार- 
 नईदुनिया तथा टाटा शक्ति द्वारा लेखन के लिये  प्राइड स्टोरी अवार्ड 2014. 
 युग र्निमाण शिक्षण समिति तथा हिंदी साहित्य परिषद द्वारा हिंदी सेवा सम्मान 2015 से सम्मानित .
 पुस्तक 101 लघुकथाएं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरूस्कार 2011 .
लघुकथा के लिये हस्ताक्षर संस्था द्वारा विशिष्ट पुरस्कार , 
दैनिक अग्नि पथ द्वारा वरिष्ठ लघुकथाकार साहित्य सम्मान 2013 ,
 शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान 2013 , 
सामाजिक कार्यो में विशिष्ट योगदान एवम् साहित्यक उपलब्धियों हेतू नवकार सेवा संस्थान द्वारा विषिष्ट सम्मान .
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लेख को प्रथम पुरस्कार
महिला एवं बाल विकास उज्जैन संभाग म.प्र. द्वारा अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस 2016 में सम्मान , 
कथादेश द्वारा 2016 में लघुकथा पुरस्कृत . 
जे.एस.जी.आई.एफ. म.प्र.रीजन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियॉ तथा समाज सेवा के क्षेत्र में  अद्वितीय कार्यो के लिये अवार्ड 2016-17 से नवाजा गया. 
अभिव्यक्ति मंच द्वारा कविता को राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार 
जे.एस.जी.आई.एफ. द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट लेखन व समाज सेवा के क्षेत्र में आउट स्टेंडिंग परफारमेंस हेतू अवार्ड 2017 .
महिला सशक्तिकरण उज्जैन ने बेहतर समाज सेवा , समाजिक एकता व उत्कृष्ट लेखन के लिये अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2017 पर सम्मानित किया .  
       अभिव्यक्ति विचार मंच द्वारा राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान 2017-18 से सम्मानित   आदि अनेक।
अखिल भारतीय साहित्य साधक मंच बंगलौर द्वारा राजभाषा साहित्य सम्मान
राष्ट्रीय संगठन सखी संगिनी द्वारा 2018 नारी सेवा सम्मान 
लघुकथाएं व लेख को विभिन्न संस्थाओं द्वारा 2018 में पुरस्कृत,

भोपाल से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'साहित्य समीर दस्तक' एंव श्री विभगूंज वेलफेयर सोसायटी' द्वारा 'सम्यक लघुकथाएं' को 'शब्द गुंजन लघुकथा सम्मान-2018' से सम्मानित किया गया।

विचार प्रवाह मंच इंदौर द्वारा सम्मानित 2020
 डॉक्टर एस एन तिवारी  सम्मान 2021
अमृत महोत्सव के तहत माधव महाविद्यालय उज्जैन द्वारा श्रेष्ठ साहित्य साधिका सम्मान 2021

मातृ भाषा उन्नयन संस्थान भारत के द्वारा हिंदी दिवस 2022 सम्मानित
हिंदी साहित्य सम्मेलन बदनावर द्वारा साहित्य सम्मान 2022

मथुरा देवी स्मृति वट स्मृति षोडश सम्मान 20 22

हिंदी साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा व्यंग्य संग्रह 'हेल्थ हादसा ' को शरद जोशी व्यंग्य सम्मान 2019

भारतीय साहित्य परिषद इंदौर द्वारा प्रादेशिक साहित्य गौरव सम्मान 2023

विचार प्रवाह साहित्यिक मंच  इंदौर द्वारा विशिष्ट लघुकथा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान सम्मान 2023

इंटिग्रेटेड सोसायटी ऑफ मीडिया प्रोफेशनल लखनऊ द्वारा 
समग्र सहित्य पर मैथिली शरण गुप्त सम्मान 2022

अथाई समूह द्वारा सर्वश्रेष्ठ कथाकार सम्मान 2023

संस्था विद्यांजलि भारत मंच इंदौर द्वारा समग्र साहित्य पर धरोहर सम्मान 2023

 साहित्य संगीति जयपुर द्वारा लघुकथा संग्रह भोर में भास्कर को  सर्वोत्कृष्ट कृति जयपुर सम्मान 2024

अभिनव कला परिषद भोपाल द्वारा अभिनव शब्द शिल्पी अलंकरण से सम्मानित 2023

 अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय महिला लेखन प्रेरणा पुरस्कार 2023

म. प्र लेखिका संघ भोपाल द्वारा लघुकथा संग्रह भोर में भास्कर के लिए राष्ट्रीय स्तर पर श्रीराजकुमार केसवानी सम्मान 2024

माता कौशल्या साहित्य संस्कृति शोध संस्थान वी डॉ.माया ठाकुर फाउंडेशन रायपुर द्वारा 
लघुकथा भूषण सम्मान 2024

रक्त मित्र फाउंडेशन मथुरा उत्तर प्रदेश द्वारा नारी शक्ति पद्मश्री सम्मान 2024

 पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ द्वारा साहित्य सम्मान 2024

मां राजपति देवी स्मृति साहित्य सम्मान 2024-प्रयागराज

किस्सा कोतहा सम्मान आगरा 2024

राजराजेश्वरी म्यूजिकल ग्रुप इंदौर साहित्य सम्मान 2024

प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट भोपाल द्वारा साहित्य सम्मान 2024
प्रांति इंडिया साहित्य सम्मान 2024
अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय श्लाका
सम्मान 2024
अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती साहित्य सम्मान 2025
श्रीमती आशा सुपेकर स्मृति सम्मान 2025

सम्प्रति-पूर्व सदस्य बाल कल्यााण समिति
 पद-प्रथम श्रेणी न्यायायिक मजिस्ट्रेट बोर्ड , बा.क.स 
 चेयर पर्सन-गर्ल सेव चाइल्ड कमेटी जे.एस.जी.आई.एफ. 2016-17-18 
2019 गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा  देश के विद्ववानों की सूची में शामिल
             
अनेक मंचो से बाल साहित्य , बालिका महिला सुरक्षा उनका विकास , कन्या भ्रूण हत्या , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , बालकों के लैगिंग यौन शोषण , निराश्रित बालक बालिकाओं  को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना स्कूल , कॉलेजों के विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा आदि के अनेक विषयो पर उद्बोधन एवं कार्यशाला ।

पता 
मीरा जैन 
516 साईं नाथ कॉलोनी,सेठीनगर
 उज्जैन ,मध्य प्रदेश 
पिन-456010
मो. बा-9425918116
https://www.meerajain.in
jainmeera02@gmail.com

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प्रेम (लघुकथा)- सौम्या गुप्ता

मुझे तो यह जानकर आश्चर्य हो रहा है, प्रेम वो भी रचित से? तुम यह क्या कह रही हो संयोगिता?, साधना ने संयोगिता से पूछा, मुझे बड़ा अजीब लग रहा कि यह जानते हुए भी कि वो कैसा इंसान है, न तुम्हारा और न तुम्हारे खुले विचारों का वो सम्मान करता है, क्या तुमको वो स्वतंत्रता देगा? तुम स्वतंत्र नहीं रहोगी, जो तुम्हारा स्वभाव है, उसके प्रेम में पड़कर तुम, तुम नहीं रह जाओगी, तुम्हारी मुस्कुराहट भी खो जाएगी।

संयोगिता गहरी सांस लेकर, है कुछ बात, साधना, तुम मेरी दोस्त हो, मैं चाहे जिससे प्रेम करूँ, तुम अपनी सलाह मुझपर थोप नहीं सकती।

साधना निराश भाव से कहती है कि संयोगिता जिसे तुम बार बार प्रेम कर रही वह कुछ और है, आगे तुम्हारी मर्जी! पर याद रखना जो आकाश से प्रेम करते है, वो पंखों के बारे में सोचते है और जो कीचड़ से वे केंचुए बनकर ही रह जाते है, चुनाव तुम्हें करना है।

इफ यू लव द स्काई यू विल ग्रो विंग्स

- सौम्या गुप्ता 


सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे | 


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उभरते सवाल 18.11.2025

पिछले कुछ वर्षों के दौरान जघन्य अपराधों में नाबालिगों की संलिप्तता बढ़ी है। दिल्ली के विजय विहार इलाके में लूटपाट का विरोध करने पर एक आटो चालक की हत्या के आरोप में पांच नाबालिगों की गिरफ्तारी से देश में पलती- बढ़ती एक चिंताजनक प्रवृत्ति और उसकी दिशा को समझा जा सकता है। अभी किसी भी स्तर पर इस बात की चिंता नहीं दिखती है कि बेरोजगार युवाओं या विद्यालय न जाने वाले किशोरों के भविष्य को संवारने लिए क्या किया जाए। उनके बीच से जो किशोर आपराधिक प्रवृत्ति की ओर कदम बढ़ा दे रहे हैं, उन्हें लेकर हमारी नीति क्या हो। यहां तक कि हम बच्चों को नैतिक और सामाजिक मूल्यों से लैस नहीं कर रहे। दूसरी ओर, समाज में अनेक तरह की बनती विपरीत स्थितियां किशोरों को अपराध के गर्त में धकेल रही हैं। राजधानी में वह आटो चालक महज अपनी रोजी-रोटी कमाने निकला था । मगर कुछ शातिर लड़के योजनाबद्ध तरीके से उसे सुनसान जगह ले गए और उससे लूटपाट की कोशिश करने लगे । जब आटो चालक ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पकड़े जाने पर इन आरोपियों ने यह बात कबूली है कि वे नशे के आदी हैं और इसके लिए पैसे जुटाने के इरादे से उन्होंने वारदात को अंजाम दिया।

समझा जा सकता है कि अपराध के दलदल में धंसते कुछ किशोर किस तरह खतरनाक हो रहे हैं। दिल्ली में हुई यह ताजा घटना एक उदाहरण भर है। यह दुखद ही है कि पढ़ने-लिखने की उम्र में कई किशोर हथियार लेकर सड़कों पर चल रहे हैं और आए दिन लूटपाट से लेकर हत्या तक के जघन्य अपराध में लिप्त पाए जा रहे हैं। गंभीर अपराधों में संलिप्त नाबालिगों को लेकर कानून अस्पष्ट और लचर होने का ही परिणाम है कि उनका दुस्साहस लगातार बढ़ता चला गया है। यह देखा गया है कि जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाले कई नाबालिगों पर बाल सुधार गृह में भेजने का भी कोई असर नहीं होता। खासतौर पर सुनियोजित तरीके से हत्या और बलात्कार जैसे अपराधों के नाबालिग आरोपियों के प्रति क्या नीति अपनाई जानी चाहिए, अब इस मसले पर सरकार और समाज को एक बार विचार करना होगा ।
- अपराध के पांव - संपादकीय जनसत्ता १७.११.२०२५


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मिशन ओवर मार्स - फिल्म समीक्षा सह परिचय, सौम्या गुप्ता

मैंने एक बार कहीं पढ़ा था, श्रंगार करती हुई स्त्रियों से ज्यादा सुंदर लगती है संघर्ष करती हुई स्त्रियाँ। ये लाइन मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि मैं भी हार नहीं मानती, संघर्ष करती हूं और हर महिला करती है, किसी का संघर्ष जारी रहकर उसे ऊँचाइयों पर ले जाता है और कुछ का संघर्ष बस चार दीवारी में ही खत्म हो जाता है।

आज एक मूवी देखी Mission Over Mars, मुझे लगता है ये उन लोगों को जरूर देखनी चाहिए, जो हार नहीं मानना चाहते और लड़ना चाहते हैं अपनी आखिरी उम्मीद तक।

आप इसमें, कैसे हर मुश्किल का रास्ता निकाला जाता है देख सकते हैं। कैसे डर को भी हथियार बनाया जाता है। मंगल पर जाने वाले मिशन में एक टीम मेंबर को बुरे सपने आते है, और उनकी टीम लीडर उन सपनों को आधार पर जो गलत हो सकता था, उसका तोड़ निकाल लेती है।

जब वो महिलाएँ मिशन के सिवा कुछ नहीं सोचती हो तो किसी को कैसे कम बजट में काम कर सकते है, कैसे अपने पहले के रिसोर्स का उपयोग कर सकते हैं, कैसे मुश्किल में अनजाने ही भगवान हमारे मददगार बन जाते है या प्रकृति का संयोग हमारे पक्ष में होकर हितकारी हो जाता है? आखिरी क्षण जब हमें लगता है कि कुछ नहीं हो सकता तब कुछ ऐसा अचानक से दिख जाता है और लगता है कि ये किया जा सकता है। कैसे यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए कि कैसे एक मिशन फेल भी हो सकता है, जब आपको सटीक  गणना से पता चलता है, तभी आप सब सही कर पाते हैं, माने हमारे पास जानकारी और आंकड़े होने चाहिए बेहतर निर्णय निर्माण के लिए, कैसे हम सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं, जब हमारे पास काम के लिए सही जुनूनी लोग हो। इससे सीखा जा सकता है, आशा कभी मत खोए, हमेशा नजर समाधान की ओर हो। आपकी काम के प्रति सच्ची भावना आपको सफल बनाती ही है।

देर किस बात की आप भी देख डालिए इस फिल्म को और दे दीजिए एक समावेशी विस्तार अपनी समझ और दृष्टिकोण को।

Happy Movie Watching!

सौम्या गुप्ता 

बाराबंकी उत्तर प्रदेश 


सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे | 


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लेह और मौसमवीर - मनीष कुमार गुप्ता

पल भर में है धूप खिली, अगले पल छाया अंधकार।
कुछ पल में ही तेज हवा, लगता है जैसे चमत्कार।।
गर्मी में यहाँ फूल खिलें, स्वर्ग सा मौसम बन जाता है।
देश विदेश के सैलानियों को ये लद्दाख बहुत भाता है।।

सर्दी में तापमापी का पारा, ऋणात्मक बीस भी जाता है।
ऊपर से तेज हवा का झोंका, कभी कभी सताता है।।
पश्चिमी विक्षोभों से अधिकतर, वर्षा और बर्फबारी है।
समुद्रतल से 3500 मीटर ऊपर कर्मभूमि हमारी है ।।

सर्दी में जम जाता आर्द्र बल्ब, गर्म पानी से उसे उठाना है।
गर्म कपड़ों में सीलबंद होकर, वेधशाला में जाना है।।
समुद्र तल से ऊँचाई पर, ताप और दाब घट जाता है।
कम ऑक्सीजन के चलते यहाँ रक्त दाब बढ़ जाता है।।

अधिक ठंड और कम आर्द्रता के संयोग का विज्ञान।
ट्रॉस हिमालय की गोद में बसा लेह लद्दाख महान।।
पर्यावरण और प्रकृति का यहाँ संगम होता निराला है।
पहाड़ों की बर्फ के परावर्तन से, होता तेज उजाला है।।

जब सूरज तेजी से चमके, ठंड का नहीं होता अहसास।
बार बार ही गला सूखता, बुझती नहीं है प्यास ।।
कम आर्द्रता के कारण, स्थिर आवेश प्रभाव दिखाता है।
किसी चीज को छूने से, यदाकदा झटका लग जाता है।।

बढ़ने लगती आर बी सी और घटने लग जाती है भूख।
कितना भी करो आप जतन, त्वचा जाती है बिल्कुल सूख ।।
जब जब सर्दी में तापमान, माइनस में चला जाता है।
बंद होता नलकूप और सीवरेज, पानी भी जम जाता है।।

बर्फ तोड़कर, आग सेक कर फिर पानी मिल पाता है।
मुश्किल है यहाँ सर्दी का जीवन, कैसे कोई सह पाता है।।
बड़े दयालु 'सोनम' सर जी, यहाँ कहलाते "मौसमपीर"।
इन्हीं के मार्गदर्शन में, रहते हैं हम सब मौसमवीर।।

​​​मनीष कुमार गुप्ता जयपुर, राजस्थान 


मनीष जी भारत सरकार के भारत मौसम विज्ञान विभाग में सेवारत हैं और लेह में अपनी सेवाएं दे चुके हैं वह अपनी कई कविताओं से मौसम विज्ञान विभाग के सफर, उसके योगदान और महत्व पर प्रकाश डाल चुके हैं।


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चुनाव - ईर्ष्या बनाम तरीका ( पुनर्विचार ) - सौम्या गुप्ता

अमूमन ऐसा देखा गया है कि जब भी हम किसी को अपने से आगे बढ़ते हुए देखते हैं, पढ़ाई में खुद से आगे देखते हैं, या अच्छी स्थिति पर देखते हैं तो हमारे अंदर एक ईर्ष्या की भावना पैदा होती है।

क्या हमने कभी सोचा है कि ईर्ष्या के कारण हमारा क्या नुकसान होता है? सबसे पहला नुकसान ये होता है कि हम उस व्यक्ति से जिससे हम ईर्ष्या कर रहे है उससे सीखना बंद कर देते हैं, अब आप सोचेंगे कि हम सीखना कैसे बंद कर सकते हैं? आप सोचिए अगर आप से कोई पढ़ाई में आगे निकल गया है और आप उसके प्रति जलन की भावना रख रहे हैं तो आप कभी भी उससे बराबरी नहीं कर पाएंगे, लेकिन अगर आप उनसे पूछे कि आपने इतने अच्छे से सारी चीजें कैसे मैनेज कीं, आपने किस तरह से पढ़ाई की तो अगली बार आप भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हो। इस तरह से बहुत सारी चीजें हैं जो हम अपने से आगे बढ़ते हुए लोगों से सीख सकते हैं। लेकिन जलन की भावना जो होती है वह हमें सीखने से कहीं ना कहीं बहुत पीछे ले जाती है और जो हम अपना भी थोड़ा बहुत कर सकते थे, वह भी अच्छे से  नहीं कर पाते इस तरह जो हमें होना चाहिए था हम वह भी नहीं हो पाते हैं और दूसरे से बेहतर वह भी कहीं न कहीं असंभव हो जाता है इसलिए ऐसे लोगों को अपनी आदत पर एक बार विचार करने की जरूरत हैं।

- सौम्या गुप्ता 


सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे | 


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जानकारी 18.11.2025

 

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा ने दो असमान शक्तियों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों के एक मॉडल को प्रतिबिंबित किया
-- नेपाल के विपरीत, वर्ष 2008 में भूटान के चुनावी लोकतंत्र में परिवर्तन ने भारत के साथ संबंधों को अस्थिर नहीं किया है।
- वर्ष  2007 में भूटान में राष्ट्रीय परिषद के लिए पहली बार प्रत्यक्ष चुनाव हुए थे। उस समय भारत- भूटान संधि में एक महत्त्वपूर्ण संशोधन किया गया और उस उपबंध को बदल दिया गया जिसमें कहा गया था कि भारत विदेशी मामलों में भूटान का 'मार्गदर्शन करेगा। उसकी जगह लिखा गया कि दोनों देश 'एक दूसरे की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान' करेंगे। दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ अपने क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने देने पर भी सहमत हुए। इस उपबंध का परीक्षण साल 2017 में भूटान के डोकलाम क्षेत्र पर चीन के कब्जे के दौरान हुआ था।
- मोदी ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड द्वारा निर्मित और भारत की वित्तीय मदद से तैयार 1,020 मेगावॉट की पुनात्सांग - 2 जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया और देश में नई ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 4,000 करोड़ रुपये के ऋण देने की घोषणा की। 


विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।

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समझ 18.11.2025

 

- भूटान ने वर्ष 2023 से सीमा यातां पर सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर कर, दलाई लामा से दूरी बनाए रखते हुए, तथा तिब्बत के संदर्भ में औपनिवेशिक अर्थ को बदलते हुए चीन की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया है। इस वर्ष, चीनी नववर्ष का जश्न भूटान की राजधानी थिम्पू में मनाया गया ये कदम भले ही भूटान की व्यवहारिकता से प्रेरित हों, लेकिन ये भारत के लिए सतर्कता बरतने का एक संकेत हैं। इस लिहाज से मोदी की यात्रा को एक आवश्यक उपाय के रूप में देखा जा सकता है।

-- न्याय और नीति यही कहती है कि आरक्षण की व्यवस्था को इस तरह लागू किया जाए कि पात्र लोगों को ही उसका लाभ मिलना सुनिश्चित हो सके।

- एससी -एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था बनाए जाने के पक्ष में न्यायाधीश गवई ने यह बिल्कुल सही कहा कि आइएएस और गरीब मजदूर के बेटों को एक जैसा नहीं माना जा सकता।

- ध्यान रखा जाना चाहिए कि आरक्षण का उद्देश्य वंचित एवं पिछड़े तबकों के उन लोगों के उत्थान के विशेष प्रयत्न किए जाना है, जो वास्तव में सामाजिक रूप से पिछड़े हुए हैं। आम तौर पर सामाजिक रूप से ऐसे पिछड़े लोग आर्थिक रूप से भी कमजोर होते हैं। आरक्षण में क्रीमी लेयर के सिद्धांत को लागू करने के विरोध में यह तर्क दिया जाता है कि आरक्षित वर्ग के किसी व्यक्ति के उच्च पद पर पहुंच जाने के बाद भी कई बार उसे उपेक्षा या भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

-- भारत में भ्रष्टाचार कोई नई घटना नहीं है और न ही यह केवल भारत तक सीमित है बल्कि वास्तव में, भ्रष्टाचार दुनिया भर में पाया जाता है। हालांकि, जैसे-जैसे देश विकास की सीढ़ी पर चढ़ते हैं, भ्रष्टाचार आमतौर पर कम होता जाता है। भारत आजादी की अपनी 100वीं वर्षगांठ मनाने के वक्त तक एक विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा भी रखता है इसलिए उसे इस स्थानिक समस्या से निपटना ही होगा। यह देश की विकास की आकांक्षाओं को जो नुकसान पहुंचा रहा है, उसे अनदेखा करना बहुत बड़ी भूल होगी।

- 1990 के दशक से, कई शोधकर्ताओं ने भ्रष्टाचार के देश की आर्थिक वृद्धि पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया है। अध्ययनों से यह बात साबित हुई है कि भ्रष्टाचार वास्तव में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने, निजी निवेश, रोजगार सृजन और आय समानता के लिए कितना हानिकारक है। कुछ शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि कैसे भ्रष्टाचार खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं, नागरिकों के लिए जीवन की निम्न गुणवत्ता और कुछ कंपनियों के ताकतवर समूह के दबदबे को बढ़ावा देता है।

- यह सर्वविदित है कि अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बहुत कम भ्रष्टाचार है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि क्या विकास स्वचालित रूप से कम भ्रष्टाचार की स्थिति पैदा करता है या कम भ्रष्टाचार किसी देश को विकास की सीढि़यों की ओर ले जाता है। सहज ज्ञान कहता है कि बाद वाला अधिक संभावित है

- भ्रष्टाचार को कैसे कम किया जाए? कुछ विद्वान और प्रभावशाली व्यक्ति कहते हैं कि शिक्षा में, खासकर प्राथमिक स्तर से ही नैतिकता और सदाचार की एक मजबूत नींव, इस दिशा में मददगार साबित हो सकती है। हालांकि यह भी एक परिकल्पना ही है।

- आपके इस स्तंभकार का मानना है कि तीन चीजें भ्रष्टाचार को कम करने में मदद कर सकती हैं। पहला, नियामकीय जटिलता को हर क्षेत्र में सरल बनाना, चाहे वह भूमि अधिग्रहण हो या सीमा शुल्क से जुड़ा वर्गीकरण हो। इससे अफसरशाही की मदद लेने के अवसर कम होंगे।

- मजबूत सुरक्षा कवच कम करना होगा जिसका लाभ अफसरशाह, खासकर वरिष्ठ अधिकारी, जांच और मुकदमे के खिलाफ उठाते हैं। आज, जब तक सरकार मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देती है तब तक कोई भ्रष्ट अधिकारी भी काफी हद तक सुरक्षित रहता है और सतर्कता विभागों को अक्सर ऐसी मंजूरी हासिल करना बहुत कठिन लगता है।
- हालांकि  ये सुरक्षा अच्छे इरादों से तय की गई थी ताकि अफसरशाहों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के दौरान लिए गए निर्णयों के लिए गलत तरीके से दोषी ठहराए जाने से बचाया जा सके। लेकिन समय के साथ इनका विपरीत प्रभाव पड़ा है। शायद अब एक आय और संपत्ति ऑडिट की आवश्यकता है जो हर 10 साल में किया जाना चाहिए और यह उन अधिकारियों के खिलाफ स्वचालित जांच और मुकदमे को मंजूरी दे जिनकी संपत्ति का स्रोत आय, निवेश रिटर्न या विरासत के आधार पर साबित न किया जा सके
- अंत में  में, कानूनी प्रणाली में बड़े बदलाव की आवश्यकता है ताकि भ्रष्टाचार के मामले तीन दशक या उससे अधिक समय तक न खिंचें। भारत यदि एक विकसित देश बनना चाहता है तो इसे भ्रष्टाचार से निपटना होगा, लेकिन इसके लिए केंद्र और राज्य स्तर पर सरकारों को कठिन फैसले लेने होंगे भले ही वे राजनीतिक रूप से जोखिम भरे हों


विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।

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सर्टिफिकेट ( पुनर्विचार ) - सौम्या गुप्ता

हमारी जिंदगी के बहुत से पल और कभी-कभी ज्ञान न होने पर पूरी जिंदगी ही चार लोगों को खुश करने में, चार लोगों की बातें मानने में ही निकल जाती हैं। हम अक्सर इन चार लोगों के करण पछताते भी रहते हैं। अगर लड़का हो तो रो मत अगर लड़की हो तो ऐसे मत करो, वैसे मत बैठो, ये मत करो, ऐसे हंसो, धीरे हंसो, बहुत सी बातें हम लोगों को समाज के नाम पर सिखाई जाती है। इन चार लोगों के कारण हम दौलत, shauhrat और पता नहीं क्या-क्या चाहते हैं? लोगों की सराहना पाने के लिए हम बहुत कुछ करने को तैयार रहते हैं। और फिर भी लोग जब हमसे खुश नहीं होते हैं तो हम सोचते हैं कि लोग क्या कहेंगे? और ऐसे ही हमारी जिंदगी निकलती जाती है। लेकिन ये सोचने की बात है क्या सच में हमारी जिंदगी सिर्फ इन्हीं चार लोगों के लिए है हम अपनी मर्जी से अपनी जिंदगी क्यों नहीं जीते हमेशा ये चार लोग ही क्यों? 

हमारी वास्तविकता यही है कि हम कभी भी लोगों के हिसाब से खुद को या खुद के हिसाब से लोगों को नहीं बदल सकते। अगर हम खुश रहना चाहते हैं तो सबसे ज्यादा जरूरी है कि हम इन चार लोगों के सर्टिफिकेट पाने की कोशिश ना करें। हम जो बहुत से अच्छे लोग जो बातें कह गए हैं उनके बारे में सोचे, उन्हें पढ़े, अच्छे लोगों का साथ करें या अच्छी किताबों का साथ करे। ये चार लोग कभी बदलने वाले नहीं हैं। जो निष्कर्ष अच्छी किताबों और अच्छे लोगों से निकले उसके आधार पर निर्णय ले।

- सौम्या गुप्ता 


सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे | 


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