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हम एक हैं - सौम्या गुप्ता

अलग-अलग रंगरूप हमारे, दिल की धड़कन एक है।

जाति अलग है, धर्म अलग है, छत पर आकाश एक है।

अलग-अगल है धन की माया,

अलग-अगल है सबकी काया,

पर सबके पैरों के नीचे, देखो धरती एक है।

अलग-अलग है भाषा सबकी,

अलग-अलग हैं व्यंजन सबके,

'थोड़ा सा और लीजिए न' ये भाव तो एक है।

अलग-अलग है ईष्ट हमारे,

अलग-अलग है मंदिर - मस्जिद,

पर सभी ईष्टों का संदेश 'सेवा भाव' भी एक है।

-सौम्या गुप्ता 

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश 


सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |


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फीडबैक / प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, के लिए यहाँ क्लिक करें |

शुभकामनाएं

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उड़ान - संजय सिंह 'अवध'

तुम स्वप्न से भरी उड़ान भरो, मैं उसका कारण बन जाऊँ,

नीले अम्बर में प्राण भरो, उसका संसाधन बन जाऊँ

नयनों में समेटे ये धरती, आकाश से भी रिश्ता जोड़ो.

निर्भीक सी सभी उड़ान भरो, भय का निष्कासन बन जाऊँ।

निष्पादित हो नियमों से कर्म, नियमों की मूरत बन जाऊँ,

हर सूरत कर्म का पालन हो, मैं ऐसी सूरत बन जाऊँ,

जो हो संरक्षा की बातें, तो नाम शीर्ष पर आ जाए,

पर्याय रहूं संरक्षण का, मैं वहीं ज़रुरत बन जाऊं।

तुम नभ से भी ऊंचा उड़ना, बेफिक्र बादलों से लड़ना,

हो तूफानों से मिलन कभी, तुम चीर उन्हें आगे बढ़ना,

ये हाथ, ये साथ, ये परवाज़े, सब जुड़े अटूट डोर से हैं,

इक छोर डोर की तुम बनना, दूजी वो छोर मैं बन जाऊं।

- संजय सिंह 'अवध'

ईमेल- green2main@yahoo.co.in

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उक्त मन को छूने वाली कविता के रचयिता भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में ATC अधिकारी हैं और अपने कालेज के दिनों से ही, जैसा कि इनकी रचनाओं से घोतक है, जन जन में संवेदना, करूणा और साहस भरने के साथ अंतर्विषयक समझ द्वारा उत्कृष्टता के पथ पर युवाओं को अग्रसर करने को प्रयासरत हैं।

कवि के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।

उक्त कविता अपने पूरे अर्थ में सुधी पाठकों को स्पष्टता दे सके आइए इसके लिए एक छोटी सी प्रश्नोत्तरी से गुजर लिया जाए।

*कविता में 'उड़ान' का क्या अर्थ है?*

कविता में 'उड़ान' का अर्थ है सपने देखना, ऊंचाइयों को छूना, और जीवन में आगे बढ़ना। यह बाधाओं का सामना करने और निडर होकर आगे बढ़ने का प्रतीक है।

*कविता में कवि खुद को किस रूप में प्रस्तुत करता है?*

कविता में कवि खुद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है जो उड़ान भरने वाले का समर्थन करता है, उसके सपनों को साकार करने में मदद करता है, और हमेशा उसके साथ रहता है। वह प्रेरणा, सुरक्षा और मार्गदर्शन का प्रतीक है।

*कविता में 'भय का निष्कासन' का क्या मतलब है?*

कविता में 'भय का निष्कासन' का मतलब है डर को दूर करना, निडर बनना, और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीना। यह उन बाधाओं और चुनौतियों का सामना करने का प्रतीक है जो हमें हमारे सपनों को पूरा करने से रोकती हैं।

*कविता में 'नियमों की मूरत बनना' का क्या तात्पर्य है?*

कविता में 'नियमों की मूरत बनना' का अर्थ है नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों का पालन करना, सही राह पर चलना, और दूसरों के लिए प्रेरणा बनना।

*कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?*

कविता का केंद्रीय संदेश है सपनों का पीछा करना, बाधाओं का सामना करना, और हमेशा समर्थन और सुरक्षा की भावना के साथ जीवन जीना। यह प्रेरणा, साहस और आशा का संदेश देती है।


इस कविता पर अपनी राय या प्रतिक्रिया आप संपर्क फॉर्म से भेज सकते हैं या lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं।


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संजय सिंह 'अवध' - साहित्यकार परिचय

श्री संजय सिंह, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में सन् २०१२ से वायु यातायात नियंत्रण अधिकारी (ATCO) के रूप में कार्यरत हैं। 

“अवध” ये उपनाम इन्हें विद्यालय के दिनों में अपने भूगोल के अध्यापक से उपाधि के रूप में प्राप्त हुआ जिन्होंने इनको इस उपनाम से लिखने को प्रेरित किया। 

केंद्रीय विद्यालय बैरागढ़ भोपाल से विद्यालयीन शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात, संजय सिंह “अवध” ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल से इंजीनियरिंग में स्नातक प्राप्त किया।

बचपन से ही लेखन के शौकीन संजय सिंह “अवध” अभी तक कई सारे मंचों पर भी अपनी कविताओं की प्रस्तुति दे चुके हैं और अपने कालेज के दिनों से ही, जैसा कि इनकी रचनाओं से घोतक है, जन जन में संवेदना, करूणा और साहस भरने के साथ अंतर्विषयक समझ द्वारा उत्कृष्टता के पथ पर युवाओं को अग्रसर करने को प्रयासरत हैं।

आपने युवाओं से जुड़ने और उन्हें अनुनादित कर उनका श्रेष्ठ बाहर लाने के लिए अपना यूट्यूब चैनल ( यहां क्लिक करें ) भी बनाया है।

जैसा कि आपकी एक कविता उड़ान में उद्धृत है आप इस बात के हिमायती हैं कि व्यक्ति को खुलकर, अपने काम में उत्कृष्टता के दम पर ऊंची से ऊंची उड़ान को ध्येय बनाकर नैतिकता का साथ लिए हुए प्रयासरत रहना चाहिए।

क्योंकि आप शतरंज और बैडमिंटन भी खेलते हैं शौकिया तौर पर इस तरह खेल भावना भी झलकती है आपकी रचनाओं में, इसके साथ ही देश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अपनी सेवाएं देने का जो अवसर मिला और उससे प्राप्त अनुभव का पुट भी रहता है आपकी रचनाओं में और ये तत्व इन्हें एक अलग ही कलेवर देते हैं जो पाठकों में रुचि जगाने और स्पष्टता देने में सफल साबित होता है।

लेखक, कवि और चिंतक, श्री संजय सिंह 'अवध' की रचनाओं को उनके ब्लॉग ( यहां क्लिक करें ) से भी पढ़ा जा सकता है और उनकी ईमेल से उनसे संपर्क साधा जा सकता है - green2main@yahoo.co.in

युवाओं से संपर्क में नियमितता बनी रहे इसके लिए आपका वाट्सऐप चैनल ( यहां क्लिक करें ) भी है।

ज्यादा से ज्यादा लोग लाभान्वित हों आपकी रचनाओं से, इसी विश्वास के साथ।

लवकुश कुमार 

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उम्मीद 14.11.2025

जलवायु परिवर्तन पर शुरू हुई 'संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन' की 30वीं वार्षिक बैठक में दोनों देशों, भारत और चीन की परिवर्तनकारी भूमिका की सराहना की गई। 

- साथ ही कहा गया कि इन देशों ने जलवायु कार्रवाई को स्पष्ट तरीके से अपनाया है और वे दुनियाभर में स्वच्छ प्रौद्योगिकियों की लागत कम करने में मदद कर रहे हैं ।

- महाराष्ट्र के सांगली जनपद के मोहित्यांचे वडगांव (जिसे संक्षेप में वडगांव कहा जाता है) में हर शाम सात बजे भैरवनाथ मंदिर से 45 सेकंड के लिए एक सायरन ध्वनि गूंजती है, जो किसी चीनी मिल या अन्य औद्योगिक इकाई के कर्मचारियों के लिए बजने वाले सायरन से भिन्न है। यह ध्वनि दरअसल एक सूचना है कि अगले 90 मिनट (7 से 8:30 बजे तक) सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण- मोबाइल, टीवी इत्यादि बंद रहेंगे। दूसरा बजने वाला सायरन इस अवधि की समाप्ति की सूचना देता है।

- वर्तमान दौर में स्मार्टफोन और टीवी हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं, पर वडगांव ने इसको चुनौती दी है। इस गांव में लगभग 3,000 से 3,500 लोग रहते हैं। अधिकतर किसान या चीनी मिल श्रमिक हैं, जो प्रत्येक शाम डेढ़ घंटे के लिए 'डिजिटल डिटॉक्स' का पालन करते हैं । 15 अगस्त, 2022 को देश के स्वतंत्रता दिवस पर प्रारंभ हुई यह पहल अब न केवल ग्रामीण संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है, बल्कि आस-पास के गांवों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन गई है।

- जब लक्ष्य सकारात्मक बदलाव का हो, तब समाज भी साथ आ खड़ा होता है। डिजिटल डिटॉक्स मुहिम का परिणाम यह हुआ कि एक माह में ही अंतर साफ दिखने लगा। छात्रों के अध्ययन में सुधार हुआ, रचनात्मकता में वृद्धि हुई और स्कूल में उनके व्यवहार में और स्पष्ट बदलाव नोटिस किया गया। 

- जैसे-जैसे डिजिटल दुनिया विस्तृत हो रही है, वडगांव मॉडल जैसे प्रयोगों की अहमियत बढ़ती जा रही है। समाज को फिर से जोड़ने और संबंधों को पुनर्जीवित करने में ये रामबाण बन सकते हैं। इस पहल ने एक बार फिर हमें स्मरण कराया है कि तकनीक मनुष्य की सहजता के लिए है, न कि स्वामी बनने के लिए।


विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।

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जानकारी 13.11.2025

जलवायु परिवर्तन से उपजे संकट से निपटने के लिए वर्ष 2015 में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इसका मुख्य लक्ष्य वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना था

- विकासशील देश इस दिशा में आगे बढ़ने का इरादा रखते हैं, लेकिन वित्तीय और तकनीकी चुनौतियां उनकी राह में रोड़े अटका रही हैं। इसके बावजूद भारत और चीन जैसे देश पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश कर रहे हैं।

- जलवायु परिवर्तन पर शुरू हुई 'संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन' की 30वीं वार्षिक बैठक में इन दोनों देशों की परिवर्तनकारी भूमिका की सराहना की गई। 

- पेरिस समझौते में तय हुआ था कि विकसित देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकासशील देशों की वित्तीय और तकनीकी रूप से मदद करेंगे। मगर संयुक्त राष्ट्र की हाल की एक रपट बताती है कि यह वित्तीय मदद लगातार घट रही है । विकासशील देशों को वर्ष 2035 तक अपने लक्ष्यों को पाने के लिए हर साल 365 अरब डालर की जरूरत है, लेकिन वर्ष 2023 में इन देशों को केवल 26 अरब डालर की अंतरराष्ट्रीय सहायता मिल पाई, जो वर्ष 2022 के 28 अरब डालर से भी कम है। 

- महाराष्ट्र के सांगली जनपद के मोहित्यांचे वडगांव (जिसे संक्षेप में वडगांव कहा जाता है) में हर शाम सात बजे भैरवनाथ मंदिर से 45 सेकंड के लिए एक सायरन ध्वनि गूंजती है, जो किसी चीनी मिल या अन्य औद्योगिक इकाई के कर्मचारियों के लिए बजने वाले सायरन से भिन्न है। यह ध्वनि दरअसल एक सूचना है कि अगले 90 मिनट (7 से 8:30 बजे तक) सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण- मोबाइल, टीवी इत्यादि बंद रहेंगे। दूसरा बजने वाला सायरन इस अवधि की समाप्ति की सूचना देता है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए क्षेत्रवार समूहों का गठन किया गया है, जो हर घर जाकर इस पहल का महत्व समझाते हैं। इस 'डिजिटल कर्फ्यू' का उल्लंघन करने वालों को शुरू में चेतावनी दी जाती थी, लेकिन अब पूरा समाज इसका पालन करने का प्रयास करता है। माता-पिता भी नियम का अनुपालन करते हैं, ताकि बच्चे अकेला न अनुभव करें | इस 90 मिनट में बच्चे अध्ययन करते हैं, युवा पुस्तकें पढ़ते हैं या घर से बाहर निकलकर सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं।

- दरअसल, कोविड-19 के संक्रमण काल में मानव व्यवहार में अप्रत्याशित परिवर्तन देखा गया। इसने 2020 से 2022 तक शिक्षा के ऑनलाइन माध्यम को अनिवार्य बना दिया, जिससे कम आयु के बच्चों और युवाओं में मोबाइल फोन के प्रयोग को लेकर एक बुरे व्यवहार ने जन्म लिया। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 18 वर्ष से कम के आयु के 65 प्रतिशत बच्चों में फोन चलाते रहने की मानो लत पड़ गई, जो 30 मिनट से अधिक समय तक फोन से दूर रहने में असमर्थ थे।

- हमारी राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा आतंकियों के रडार पर है। वैसे, यह खतरा तो हमेशा से रहा है। हां, उसकी निरंतरता व तीव्रता ऊपर-नीचे होती रही है। कभी खतरा बढ़ गया, तो कभी कम होता प्रतीत हुआ। पिछले एक-डेढ़ साल की तेजी से बदली भू- राजनीति भी हमारे सुरक्षा बलों की परीक्षा लेती रही है। बांग्लादेश के घरेलू हालात, नेपाल के उपद्रव और पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठनों की नई रणनीति (विशेषकर सीमा रेखा के पास बड़े आतंकी शिविरों के बजाय सुदूर इलाकों में छोटे-छोटे ठिकाने बनाना, ताकि भारतीय एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके) ने क्षेत्र में ऐसी अस्थिरता को जन्म दिया है, जिसमें भारत के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं। नतीजतन, हमने अपनी सुरक्षात्मक रणनीति भी तेजी से बदली है।


विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।

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Pilot & ATC और कुछ ? हां CNS-ANS इनके बिना नहीं चलेगा - ATSEP दिवस के अवसर पर

12 नवंबर - अंतरराष्ट्रीय एटीएसईपी दिवस

 आपने एयरपोर्ट के नाम के साथ एटीसी का नाम सुना होगा, माने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, अमूमन लोग जानते हैं कि यह वो ऑफिसर होते हैं जो रेडियो तरंगों के द्वारा पायलट के टच में रहते हैं उन्हें नेविगेट करते हैं कि किस ऊंचाई पर उड़ना है कब लैंडिंग की परमिशन है, कब टेक ऑफ की परमिशन है, एयरपोर्ट पर मौसम कैसा है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन इंस्ट्रूमेंट के थ्रू एटीसी पायलट से कनेक्ट करते हैं रेडियो फ्रीक्वेंसी पर, उन इंस्ट्रूमेंट को अप टू डेट और मेनटेन कौन करता है अगर उनमें से कोई इंस्ट्रूमेंट डाउन हो जाए तो उसे रिस्टोर कौन करेगा और इन सबके अलावा आपने एक शब्द सुना होगा रडार जिससे हम स्कैन करते हैं कि किसी एक पार्टिकुलर एरिया में कितने एयरक्राफ्ट फ्लाई कर रहे हैं, किधर को फ्लाई कर रहे वगैरह वगैरह, अपने सुना होगा कि कुछ एयरपोर्ट्स ऐसे हैं जहां पर कुहरे और बरसात की कंडीशन में भी लैंडिंग और टेक ऑफ होता है तो वह कौन से इंस्ट्रूमेंट होते हैं जो पायलट को हेल्प करते हैं इतनी लो विजिबिलिटी में भी लैंड करने में और कौन इन इंस्ट्रूमेंट को मेनटेन करता है, कौन इन्हें कैलीब्रेट करता है और चेक करता है कि इंस्ट्रूमेंट प्रॉपर कम कर रहे हैं, इन सबका जवाब है

" एयर ट्रैफिक सेफ्टी इलेक्ट्रॉनिक्स पर्सनल"

आइये विस्तार में समझते हैं इनकी जिम्मेदारियों, चुनौतियों और योगदान को, और शुरुआत करते हैं एक स्पष्टता देने वाली और मन को बांधने वाली कविता से जो लिखी है भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के ही एक अधिकारी श्री देवेश द्विवेदी, वरिष्ठ प्रबंधक एटीएसईपी ने :

ए ए आई का वादा , सुरक्षा सहित सेवा 

हमनें बखूबी निभाकर, जीता है भरोसा

धरती हो या गगन हो , सब जद में है मेरे

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।। 

मेरी निगाहों से कोई ओझल न होगा (RADAR)

बात होती रहेगी, तू कितना भी दूर होगा. (HF/VHF)

अंगुली पकड़ के तेरी, तुझे राह हम दिखाते (NAVAID)

घने कुहरे में भी, तुझको हम रनवे दिखाते (ILS)

तेरे पहुँचने से पहले, पहुंचाएंगे तेरा संदेशा (AFTN)

वो आसमाँ के पंक्षी रखना तू भरोसा ।।

तकनीकियों की दुनियां में है अपना डेरा

हर उच्च मानक पर खरे उतरे हमेशा 

ये हुनर है हमारा और हर atsep का वादा

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।। 

तू कहीं भी उड़े और उड़ता चले

हर कोने कोने तक मेरा सिग्नल मिले

ना डरना कभी ये सोचकर,

दुर्गम जगहों पर किसके भरोसे उड़े

ATSEP के सिपाही तुझे मिलेंगे सदा 

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।। 

कभी मशीनों के साथ हम ठंडे हुए 

कभी तेज धूप में जलते रहे 

सब सहते पर न पीछे हटे

काम पूरे किए मुझे जो भी मिले

हर लक्ष्य को हमने समय से समेटा

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।। 

तू ऊंचा उड़े और उड़ता रहे 

अपनी मंजिल पर सुरक्षित पहुँचता रहे

समय सबका बचे, कोई मुश्किल न पड़े

ATSEP की निगाह में तुम हो हमेशा

वो आसमां के पंछी रखना तू भरोसा ।।

- देवेश द्विवेदी, वरिष्ठ प्रबंधक एटीएसईपी 

 

आइए और समझते हैं:

  • एटीएसईपी, या वायु यातायात सुरक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कार्मिक, विमानन सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 
  •  परिभाषा: एटीएसईपी तकनीकी विशेषज्ञ होते हैं जो संचार, नेविगेशन और निगरानी (सीएनएस) प्रणालियों के साथ-साथ वायु यातायात प्रबंधन (एटीएम) प्रणालियों के संचालन, रखरखाव, निरीक्षण और प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। 
  •  मुख्य कर्तव्य: - वीओआर, डीएमई, आईएलएस जैसे नेविगेशन सहायक उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव। - रडार, एडीएस-बी, एमएलएटी, डब्ल्यूएएम सहित निगरानी प्रणालियों का रखरखाव। - ज़मीन से हवा और ज़मीन से ज़मीन संचार प्रणालियों (वीएचएफ, एचएफ, सैटकॉम, डेटा लिंक) का प्रबंधन और रखरखाव।
  •   वायु यातायात नियंत्रण स्वचालन प्रणालियों (एटीसी प्रणालियों) के लिए सहायता। - सभी उपकरणों और प्रणालियों के लिए ICAO और राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना। एटीएसईपी का समर्पण विमानन प्रणालियों के सुचारू संचालन और सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।

जहाँ पायलट और नियंत्रक विमानन सुरक्षा के प्रत्यक्ष चेहरे हैं, वहीं एटीएसईपी (एयर ट्रैफिक सेफ्टी इलेक्ट्रॉनिक्स पर्सनल) प आकाश के ये अदृश्य रक्षक ही यह सुनिश्चित करते हैं कि हर संचार सुविधा, नेविगेशन सहायता और निगरानी सुविधा चालू रहे, हर पैरामीटर इष्टतम सीमा के भीतर हो और जब भी कोई असामान्यता महसूस हो, तुरंत सामान्य स्थिति बहाल कर दें।

वे डीवीओआर, डीएमई, आईएलएस जैसे नेविगेशनल एड्स और रडार, एडीएस-बी जैसी निगरानी प्रणालियों की सटीकता बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विमान सुरक्षित मार्गों और ग्लाइड पथों पर बने रहें। उनकी तकनीकी सटीकता सभी मौसमों में विमान की सटीक स्थिति और सुचारू लैंडिंग सुनिश्चित करती है। आधुनिक एटीसी उड़ान डेटा प्रोसेसिंग, समन्वय और सुरक्षा जाल के लिए सॉफ्टवेयर-संचालित प्रणालियों पर निर्भर करता है। इस संबंध में, एटीएसईपी स्वचालन और डेटाबेस सिस्टम के प्रबंधन में मदद करते हैं, सिस्टम एकीकरण, अपडेट, साइबर सुरक्षा और अतिरेक को संभालते हैं ताकि संचालन को लचीला और सुरक्षित रखा जा सके। एटीएसईपी त्वरित प्रतिक्रिया और त्वरित दोष सुधार द्वारा अधिकतम सिस्टम उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। वे आईसीएओ मानकों और अनुशंसित प्रथाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं, जिससे वैश्विक विमानन सुरक्षा में योगदान मिलता है। अपनी अटूट प्रतिबद्धता, तकनीकी उत्कृष्टता और वैश्विक मानकों के पालन के माध्यम से, एटीएसईपी हमारे देश की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को बनाए रखते हैं और विमानन सुरक्षा में परिचालन विश्वसनीयता के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित करते हैं।

------ तो क्या विचार हैं आपके बनना चाहेंगे, सीएनएस कार्मिक, यह भी एक तरीका है देश सेवा का।


स्रोत - समय समय पर CNS ( Communication Navigation & Surveillance ) कार्मिकों से बातचीत के अंश और कुछ तकनीकी लेख

 साभार :

श्री देवेश द्विवेदी , वरिष्ठ प्रबंधक, एटीएसईपी 

श्रीमती देबाश्री सरकर , प्रबंधक, एटीएसईपी

श्री राजेश भट्ट , प्रबंधक एटीएसईपी


संपादन - लवकुश कुमार 

संपादक भौतिकी में परास्नातक हैं और पिछले 6 साल से इंडिया मेट डिपार्टमेंट में सेवाएं देते हुए एविएशन क्षेत्र से जुड़े हैं।

यह लेख समान्य जानकारी के साथ एक जागरूकता लाने के उद्देश्य से व्यक्तिगत क्षमता में संपादक द्वारा संकलित और संपादित किया गया है।

इस लेख पर अपनी राय या प्रतिक्रिया आप संपर्क फॉर्म से भेज सकते हैं या lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं।


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ATSEP Day Special: Where Precision meets Safety (The Silent Sentinels of the Sky) - Debashree Sarkar

As mentioned in the objective of this website, to spread awareness about things that make our life easier and convenient, this article you are reading will bring to you knowledge and understanding of something great and crucial for safe aviation ensuring uninterrupted communication between pilots and ground officers of Airport Operators and ensuring safe landing, take offs and navigation through sky even in tough situations.

So ready to address the curiosity and ready to salute the staff working round the clock for safe Aviation!

Let's start :

(Picture courtesy:- Airports Authority of India)

While pilots and Air Traffic controllers are the visible faces of aviation safety, ATSEP- the Air Traffic Safety Electronics Personnel silently work behind the scenes.

 These unsung invisible guardians of the sky are the ones who ensure that each and every communication facility, navigational aid and surveillance facility is operational, with each and every parameter within the optimum range and immediately restore normalcy whenever any abnormality is sensed. 

  • ATSEPs ensure safety, accuracy and reliability of equipment that controllers depend on to guide an aircraft.
  • Even a minor technical fault can compromise safety — ATSEP prevent that through constant vigilance and skillful engineering. 
  • ATSEPs ensure seamless communication by managing VHF/UHF transmission and reception, data links and voice switching systems that connect pilots and controllers. Without ATSEPs, communication breakdowns could halt air traffic operation.
  • They help maintain accuracy of navigational aids like DVOR, DME, ILS and surveillance system like Radar, ADS-B ensuring that aircrafts stay on safe routes and glide paths. Their technical precision ensures accurate aircraft positioning and smooth landings even in tough weather conditions.

Modern ATC depends on software-driven systems for flight data processing, coordination, and safety nets,

In this regard,

  • ATSEPs help manage Automation and Database System, handling system integration, updates, cybersecurity, and redundancy to keep operations resilient and secure.
  • ATSEPs ensure maximum system availability by prompt response and quick fault rectification. They ensure compliance of ICAO Standards and Recommended Practices and national safety regulations, contributing to global aviation safety. 

Through their unwavering commitment, technical excellence, and adherence to global standards, ATSEPs uphold our nation’s international reputation and ensure the highest level of operational credibility in aviation safety.

 

I hope this helps in building a good understanding of our work.

"Happy International ATSEP Day."

Debashree Sarkar 


The writer is an officer in CNS ( Communication Navigation & Surveillance ) wing of Airports Authority of India. 

The article has been written in personal capacity for general information to the public and emphasizing the crucial importance of ATSEP for safe aviation.


Feedback and queries on the articles may be submitted through contact form or the same can be emailed to lovekushchetna@gmail.com

If you wish to share something necessary to be known by public just drop an email to id above, I will be Happy to publish it.

 

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जानकारी 12.11.2025

 देश में प्रति 1000 आबादी पर सरकारी कर्मियों (दोनों केंद्र और राज्यों के) का अनुपात मात्र 16 है, जबकि जापान में 39, यूके और कनाडा में 39 से 46, फ्रांस में 55, चीन में 57, इंडोनेशिया में 60, यूएस में 77, ब्राजील में 111 और नॉर्वे में 150 है

- भूटान को चीनी चंगुल से बचाने की चुनौती

- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिन के लिए भूटान के दौरे पर हैं। भूटान क्षेत्रफल में भारत का सबसे छोटा पड़ोसी है, परंतु इसका सामरिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह चीनी कब्जे वाले तिब्बत और भारत के बीच ऊंचे हिमालयों में स्थित महत्वपूर्ण मध्यवर्ती देश है। गत 11 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी का वहां चार बार जाना और इसी तरह भूटान के प्रधानमंत्रियों और राजाओं का लगातार भारत में आगमन का क्रम दर्शाता है कि इस संवेदनशील रिश्ते को उचित ही सर्वोच्च राजनीतिक महत्व दिया जा रहा है। भूटान अगर कमजोर और बेसहारा बन जाए तो विस्तारवादी चीन न केवल उसे निगल जाएगा, बल्कि भारत की सीमा पर एक और मोर्चा खोल देगा।

- सीलाइट’ नामक अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान के अनुसार हाल के वर्षों में चीन ने भूटान की पारंपरिक सीमाओं के भीतर कम से कम 22 कृत्रिम गांव बसाए हैं, जो इस छोटे से देश के लगभग दो प्रतिशत भूभाग पर कब्जा हैं। इन चीनी बस्तियों में सड़कें, सैन्य चौकियां और प्रशासनिक केंद्र भी शामिल हैं, जिससे जमीनी स्तर पर ऐसे नए तथ्य अंकित कर दिए गए हैं, जिन्हें नकारना मुश्किल है।

- 2007 में संशोधित भारत-भूटान स्थायी मैत्री संधि के अनुसार दोनों देश “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों” का मुकाबला करेंगे। चीन द्वारा भूटान में घुसपैठ करने और उसे अपने अधीन लाने के मंसूबों के कारण प्रतिरक्षा भारत-भूटान संबंधों का प्रमुख स्तंभ बना रहेगा। चूंकि भूटान को भारतीय सैन्य सहायता संवेदनशील मामला है, इसलिए उसके बारे में सार्वजनिक रूप से घोषणाएं नहीं होती हैं

- दक्षिण एशिया में भारत के पड़ोसियों में भूटान एकमात्र देश है, जो चीन की ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल में शामिल नहीं हुआ है

- भूटान की अपनी चौथी यात्रा में मोदी जी ने भारत की मदद से बने पुनतसंगचु जलविद्युत परियोजना का अनावरण किया 

- भारत अपने उत्तर-पूर्वी राज्य असम के कोकराझार से भूटान के प्रतिष्ठित ‘न्यू गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ तक 58 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का भी निर्माण कर रहा है, जिससे आपसी कारोबार और पर्यटन का विकास होगा।

- भूटान की आठ लाख से भी कम आबादी अत्यंत धर्मपरायण है और अपनी अद्वितीय बौद्ध विरासत के संरक्षण के प्रति सचेत है।

- मोदी जी अपनी इस भूटान यात्रा में एक विशेष ‘वैश्विक शांति प्रार्थना’ समारोह में भी भाग ले रहे हैं, जो दोनों देशों की सरकारें साझा तौर पर आयोजित कर रही हैं।

- नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव की तरह भूटान में भी चीन घुसपैठ करके भारत-विरोधी भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा है।


विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।

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समझ 12.11.2025

 आजादी के दो दशकों तक सरकारी कर्मी की पगार प्रति व्यक्ति आय से कम थी, लेकिन वेतन आयोगों के जरिए बेतहाशा बढ़ने लगी। कई गुना सरकारी वेतन के कारण युवा इनोवेशन से हटकर सरकारी नौकरियों को ही अंतिम सत्य समझते हैं और समाज में भी आर्थिक खाई बढ़ती है।

- समृद्धि की अपनी समस्याएं हैं। विकास के अपने संकट हैं। विकासशील देश का गमछा उतार कर भारत विकसित देशों की कतार में खड़ा होना चाहता है। संकट से जूझते समृद्ध देश आंखें तरेर रहे हैं।

- जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस ने तीन डाक्टरों समेत सात ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने फरीदाबाद में करीब तीन हजार किलो विस्फोटक जमा कर रखा था। इनमें एक महिला डाक्टर भी है। शेष में मौलवी और छात्र हैं। इनके पास से राइफल, पिस्टल, टाइमर आदि भी मिले हैं। साफ है कि अब यह धारणा सही नहीं रही कि अशिक्षित और गरीब मुस्लिम युवा ही आतंक की ओर उन्मुख होते हैं।

- यह सही है कि आतंक का कोई मजहब नहीं होता, लेकिन इसमें भी कोई संदेह नहीं कि मजहब की आड़ लेकर भी आतंक के रास्ते पर चला जा रहा है।

- एक के बाद एक कई आतंकी गुटों के भंडाफोड़ के बीच दिल्ली की घटना केवल यही नहीं बताती कि सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्क रहना होगा, बल्कि इसकी भी मांग करती है कि मुस्लिम समाज का राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर नेतृत्व करने वाले यह देखें कि किन कारणों से उनके युवा आतंक की राह पर चल रहे हैं?

- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिन के लिए भूटान के दौरे पर हैं। भूटान क्षेत्रफल में भारत का सबसे छोटा पड़ोसी है, परंतु इसका सामरिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह चीनी कब्जे वाले तिब्बत और भारत के बीच ऊंचे हिमालयों में स्थित महत्वपूर्ण मध्यवर्ती देश है। गत 11 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी का वहां चार बार जाना और इसी तरह भूटान के प्रधानमंत्रियों और राजाओं का लगातार भारत में आगमन का क्रम दर्शाता है कि इस संवेदनशील रिश्ते को उचित ही सर्वोच्च राजनीतिक महत्व दिया जा रहा है। भूटान अगर कमजोर और बेसहारा बन जाए तो विस्तारवादी चीन न केवल उसे निगल जाएगा, बल्कि भारत की सीमा पर एक और मोर्चा खोल देगा।

- 1950 के दशक में तिब्बत में चीन के अतिक्रमण और वर्तमान में नेपाल में चीन के विस्तार को देखते हुए भारत के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि भूटान को चीनी महत्वाकांक्षाओं से बचाकर रखे

- अंतरिक्ष उपग्रहों से लेकर वित्तीय प्रौद्योगिकी तक भारत उभरते क्षेत्रों में भूटान की मदद कर रहा है, ताकि उसके विभिन्न राजनीतिक समूह और सामाजिक वर्ग भारत के साथ मित्रता के ठोस लाभ को महसूस कर सकें

- मोदी जी की भूटान यात्रा दुनिया को याद दिलाएगी कि भारत दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के लिए प्रमुख साझीदार बनने के लिए तत्पर है और इस मामले में चीन से प्रतिस्पर्धा करने से नहीं कतराएगा।

- विकास और प्रतिरक्षा के अलावा भारत ने संस्कृति और आध्यात्मिकता को अपनी भूटान नीति का तीसरा स्तंभ बनाया है।भूटान की इस यात्रा के दौरान मोदी एक मठ में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की पूजा करेंगे, जिन्हें उत्तर प्रदेश के पिपरहवा से वहां भेजा गया है। इसके अलावा भारत की ओर से बौद्ध आध्यात्मिक नेता और भूटानी राष्ट्र के संस्थापक झाबद्रुंग नामग्याल की प्रतिमा भी भूटान को प्रदर्शन के लिए दी गई है।

- भारत-विरोधी भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा है। भविष्य में चीनी कारस्तानियों से निपटने के लिए भारत को भूटानी विशिष्ट वर्ग के साथ-साथ आम लोगों से भी घनिष्ठ संबंध बनाने होंगे


विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स एवं दस्तावेजों पर आधारित तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित, संकलन कर्ता भौतिकी में परास्नातक हैं ।

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उभरते सवाल 12.11.2025

 विकास की विपन्नता और समृद्धि के संकट क्या हैं ?
- पिछले कुछ दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों से आतंकियों के कई गुटों का जो भंडाफोड़ हुआ, वह चिंतित करने वाला ही है। यह गंभीर चिंता की बात है कि पढ़े-लिखे और यहां तक कि डाक्टर डिग्री धारक भी आतंक के रास्ते पर चल रहे हैं। 
- एक के बाद एक कई आतंकी गुटों के भंडाफोड़ के बीच दिल्ली की घटना केवल यही नहीं बताती कि सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्क रहना होगा, बल्कि इसकी भी मांग करती है कि मुस्लिम समाज का राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर नेतृत्व करने वाले यह देखें कि किन कारणों से उनके युवा आतंक की राह पर चल रहे हैं?


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