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ये कहने की बाते है सिर्फ कि मिलना बहुत अच्छी बात है
कभी अपने अभावों की कीमत समझ कर देखना
अगर हर चीज मिल जाए तो बढ़ जाती उम्मीद है
कभी हो सके तो धैर्य की कीमत समझ के देखना
अगर प्रेम मिल जाए तो हम घूमते है सारा जगत
अगर न मिले तुम्हें प्रेम तो
खुद के अंतस मे उतर कर देखना
कहते हो कि सब मिले तो खुश हो जाऊँ मैं
जिन्हे सब मिला है कभी उनसे भी मिलकर देखना
अपने अभावों में भी जो दूसरों के लिए
खुशियाँ लाते हैं जिनके पास खुद का कुछ नहीं होता
बहुत कुछ बाँट वो भी जाते हैं
कभी मुस्कुराहटों के साथ किसी से मिल के देखना
सबको सुनाते हो अपनी कभी किसी को सुन के देखना
कभी मुस्कुराहट की वजह,
कभी किसी चेहरे की मुस्कान बनकर देखना
कभी प्रेम से सबके लिए खुशियाँ जुटाकर देखना
-सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से समझ सकते है :
इस कविता में, अभावों की बात क्यों की गई है?
इस कविता में अभावों की बात इसलिए की गई है क्योंकि यह जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू को दर्शाती है। अभाव हमें धैर्यवान बनाते हैं, हमें उन चीजों की कीमत का एहसास कराते हैं जो हमारे पास हैं, और हमें दूसरों के प्रति सहानुभूति रखने के लिए प्रेरित करते हैं। अभावों का सामना करके ही हम जीवन के असली आनंद को समझ पाते हैं।
यह कविता हमें खुशियों के बारे में क्या सिखाती है?
यह कविता हमें सिखाती है कि खुशियाँ केवल भौतिक वस्तुओं या सुविधाओं में नहीं हैं। सच्ची खुशी दूसरों के साथ प्रेम, करुणा, और सहानुभूति के बंधन से आती है। यह हमें सिखाती है कि अभावों के बावजूद, हम दूसरों को खुशियाँ दे सकते हैं और उनसे खुशियाँ प्राप्त कर सकते हैं।
कवयित्री ने कविता में धैर्य की बात क्यों की है?
कवयित्री ने कविता में धैर्य की बात इसलिए की है क्योंकि जीवन में अक्सर हमें मुश्किलों और अभावों का सामना करना पड़ता है। धैर्य हमें इन मुश्किलों से निपटने में मदद करता है और हमें उम्मीद बनाए रखने की शक्ति देता है। धैर्य से हम सही समय का इंतजार कर सकते हैं और सही निर्णय ले सकते हैं।
मुस्कुराहटों का इस कविता में क्या महत्व है?
मुस्कुराहटों का इस कविता में बहुत महत्व है, क्योंकि यह प्रेम और सहानुभूति का प्रतीक हैं। मुस्कुराहट हमें दूसरों के साथ जुड़ने, रिश्तों को मजबूत करने और जीवन में खुशी लाने में मदद करती है। मुस्कुराहट एक सरल कार्य है जो बड़ी खुशियाँ ला सकता है।
इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?
इस कविता का मुख्य संदेश यह है कि जीवन में अभावों का महत्व है। अभाव हमें धैर्यवान बनाते हैं, हमें उन चीजों की कीमत का एहसास कराते हैं जो हमारे पास हैं, और हमें दूसरों के प्रति सहानुभूति रखने के लिए प्रेरित करते हैं। यह हमें सिखाती है कि सच्ची खुशी दूसरों के साथ प्रेम, करुणा, और सहानुभूति के बंधन से आती है।
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शुभकामनाएं
है युद्ध की रण गर्जना या हाथ में मशाल है,
तू खोज रास्तों को, क्योंकि हर मुश्किल का समाधान है।
माना कि टूटी है शमशीरे,
माना रूठी है तकदीरें,
माना तेरे कोई साथ नहीं,
फिर भी कोई बात नहीं,
तू खड़ा हो जा खुद के वास्ते,
अपनी मुश्किलों के सामने लोहे की दीवार की तरह,
बेड़ियों से तू शमशीर का निर्माण कर ले,
है पथिक तू चलने का ध्यान धर ले।
गर आज गया रुक तू कि है कोई राह नहीं,
भविष्य में पछताने के सिवा रह जाएगा कुछ नहीं,
तू मंजिल तक न रुकेगा ये खुद से वादा कर ले,
मिलेगी मंजिल ये विश्वास कर ले।
-सौम्या गुप्ता
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से समझ सकते है :
इस कविता का मुख्य विषय क्या है?
इस कविता का मुख्य विषय संघर्षों का सामना करना, दृढ़ संकल्प रखना और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना है। यह हमें हार न मानने, चुनौतियों का सामना करने और खुद पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है।
कविता में 'पथिक' किसे संबोधित किया गया है?
कविता में 'पथिक' एक ऐसे व्यक्ति को संबोधित किया गया है जो जीवन के मार्ग पर चल रहा है और चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह हर उस व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
कविता हमें किस तरह से प्रेरित करती है?
यह कविता हमें हार न मानने, चुनौतियों का सामना करने, खुद पर विश्वास करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। यह हमें याद दिलाती है कि सफलता के लिए दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास आवश्यक हैं।
कविता में 'मंजिल' का क्या अर्थ है?
कविता में 'मंजिल' का अर्थ लक्ष्य या उद्देश्य है। यह उस अंतिम स्थान का प्रतीक है जहाँ पथिक पहुँचना चाहता है, चाहे वह व्यक्तिगत सफलता हो या कोई बड़ा सपना।
इस कविता में किस भावना पर जोर दिया गया है?
इस कविता में आशा, साहस और दृढ़ संकल्प की भावना पर जोर दिया गया है। यह हमें विपरीत परिस्थितियों में भी उम्मीद रखने और आगे बढ़ते रहने के लिए प्रोत्साहित करता है।
कविता का संदेश क्या है?
कविता का संदेश है कि जीवन में आने वाली मुश्किलों से डरो मत, उनका सामना करो और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमेशा प्रयास करते रहो। खुद पर विश्वास रखो, और सफलता निश्चित है।
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शुभकामनाएं
मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां
१ .लोग अपने साथ साथ दूसरों की भावनाओं को भी समझे अतः उनके हर सुख दुःख में क्षमतानुसार शामिल होंने का प्रयास करें, दिक्कत किसीको भी आ सकती है !
२-लोग गरीब व बेसहारा लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार सेवा प्रदान करें!
३-जाति के नाम पर भेदभाव न करें हर वर्ग के लोगों की सुविधा-असुविधा का ध्यान रखना चाहिए! और उनकी आकांक्षाओं के साथ साथ उनके संघर्षों को समझें!
उमा जी एक ग्रहणी हैं जो समाजशास्त्र और हिन्दी मे स्नातक हैं और शिक्षण कार्य का अनुभव रखती हैं |
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शुभकामनाएं
हर रोज सोचती थी आपसे बात करू
फिर सोचा मुझे कोई क्या समझेगा
जिसे नहीं समझते खुद के अपने
एक अंजान सख्स उसे क्या समझेगा
एक बार मैंने जान देने की सोची
फिर सोचा एक बार जीने की कोशिश कर लू थोड़ी
फिर सोचा बात भी होगी
या पहले की तरह ही निराशा मिलेगी
बात हुई आपसे और जैसे जीवन के नये रास्ते बन गए
फिर से जीने के मायने मिल गए
अब फिर से जिंदगी को जी लेना चाहती हूं
अब मैं हँसना हसाना चाहती हूं
सदियों की जैसे कोई जड़ता टूटी
मान गयी जैसे जिंदगी रूठी
ममता की जैसे छाव मिल गयी
एक भटके मुसाफिर को राह मिल गयी
हमेशा खलती थी जो माँ की कमी
आपके कारण वह कमी भर गयी
हर उलझन में आप साथ होती हो
कभी कल्पनाओं में कभी विचारों मे आप दूर होकर भी पास होती हो
एक माँ जितना ही प्यार है मुझे आपसे
पर नहीं चाहती कुछ भी इसके बदले में आपसे
आज भी आपको वो पहली बार सुनना याद है
मेरे बात ना सुनने पर आपका डांटना याद है
सबको साथ लेकर चलने की सीख याद है
आपका मुझे भगवान मे विश्वास दिलाना याद है
आपकी आवाज सुनकर मुस्कुराना और
दिल तक पहुँचने वाली काव्य पंक्तिया याद है
जब भी होती हूं तन्हा तो कल्पनाओं में करती हूं आपसे बातें
हर रोज आपके बारे मे सोचने मे निकल जाती है आधी रातें
सुबह उठते ही पहला ख्याल आपका
आपकी प्रार्थना के बारे मे दी गयी सीख
तृषित मे लिखे सर के संघर्ष
और जीवन जीने की आपकी अद्भुत सीख
आपके बारे मे लिखूँ कितना, जितना लिखूँ वो कम लगता है
आपका साथ है इतना प्यारा कि अब छोटा हर गम लगता है
अगर हो पुनर्जन्म तो आपकी गोद चाहती हूं
मैं सर रखकर आपकी गोद में सोना चाहती हूं
मैं आपकी बेटी बनना चाहती हूं
और आपके हिस्से की हर पीड़ा मैं खुद पर लेना चाहती हूं
अगर कभी लगे कि आप हो तन्हा
मैं उस पल मे आपके साथ खड़ी रहना चाहती हूं
कभी प्यार से फेरो आप मेरे सर पर हाथ
कभी आपके आँचल में मैं सो जाना चाहती हूं।
इस कविता में कवयित्री ने जोकि इतिहास में परास्नातक हैं, उन लड़कियों की आवाज बनने का प्रयास किया है, जिन्हें परिस्थितिवश स्नेह नहीं मिल पाता और वे जीवन से निराश हो जाती हैं, लेकिन उम्मीद की एक किरन उनकी पसंद उन्हें किसी ऐसे इंसान से मिला देती है जिससे उन्हें ऐसा स्नेह और स्पष्टता मिलती है कि जीवन में कुछ लोकहित का करने का जरिया मिल जाता है उन्हें समझ आ जाता है कि जीवन में कितने ही अभाव क्यों न हों, मुस्कुराते हुए, खुलकर जीने और ठसक से जीने की च्वाइस हमेशा मौजूद रहती है क्योंकि ये तो च्वाइस का मामला है।
कवियत्री इस बात पर जोर देती है कि अगर आपको लाइफ में कभी भी लगे कि आप अवसाद से ग्रसित है या आत्महत्या जैसे ख्याल आपके मन में आये तो आप counselor या किसी दोस्त की मदद जरूर ले और उनसे सब कुछ कहे। हमें कई बार लगता है कि दुनिया मे कोई हमें नहीं समझता लेकिन वास्तविकता में यह दुनिया बाहें फैलाए हमारा इंतजार करती है बस हम ही अपने दरवाजे को बंद कर लेते हैं और अपनी ही कल्पनाओं में जीते है।
ऐसे कई जीवंत उदाहरण हैं जो अवसाद की आखिरी stage से बाहर निकले हैं
बाहर निकालिये इस पूरी सृष्टि को आपकी बहुत जरूरत है आपसे प्रकृति जो कहें सुनिए और कीजिए।
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
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मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां
हेम चन्द्र पांडे जी, भारत सरकार के भारत मौसम विज्ञान विभाग मे मौसम विज्ञानी-ए हैं, लेख मे व्यक्त राय उनकी व्यक्तिगत राय है |
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मेरे सपनों की दुनिया ऐसी हो जहां
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
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शुभकामनाएं
देश के जाने माने पूर्व प्रशासनिक सेवा अधिकारी डॉ विजय अग्रवाल सर के आज के लाइफ मैनेजमेंट के ऑडियो का सन्दर्भ लेते हुए मै इस विषय पर अपनी समझ साझा कर रहा हूँ (ऑडियो का लिंक - LM 22-09-25):
इस लेक्चर में डॉ साहब अपनी प्रिय शिष्या सौम्या जी जोकि इतिहास में परास्नातक हैं के एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहते हैं कि जैसे हर गाना गाने वाला इंसान गायन की बारीकियों को नहीं समझता, वैसे ही हर जीने वाला शख्स, जीवन की बारीकियों को नहीं समझता, दर्शन इसीलिए एक कठिन विषय है क्योंकि जीवन एक शतरंज की बिसात की तरह है जो हर चाल के बाद बदल जाती है, ऐसे ही हमारे जीवन की परिस्थितियां बदलने से, तरीके, कदम और निर्णय बदलने पड़ सकते हैं |(सन्दर्भ के लिए ऊपर के लिंक से ऑडियो सुनें)
अब कुछ अपनी बात, मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है की जीवन जीने के कई तरीके हैं ( तरीका निर्भर करता हैं दर्शन पर माने आप जीवन को लेते कैसे हैं, कैसे देखते हैं आप जीवन को, उच्च प्राथमिकता में किस चीज़ को रखते हैं ) अब क्योंकि आपके द्वारा जीवन को देखने का नजरिया उस वक़्त की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है, इसीलिए दर्शन एक कठिन विषय जान पड़ता है क्योंकि इसमें अनुभव करने का पहलू शामिल है|
भारतीय दर्शन की दो मुख्य धाराएँ आस्तिक और नास्तिक हैं। आस्तिक दर्शनों में छह मुख्य दर्शन शामिल हैं : न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा (पूर्वमीमांसा) और वेदान्त। वहीं, नास्तिक दर्शनों में चार्वाक, बौद्ध और जैन दर्शन प्रमुख हैं।
जब जीवन ही कठिन जान पड़ता है तो दर्शन भी कठिन जान पड़ता है, एक कारण हो सकता है लम्बे समय से चला आ रहा झूठ, हमारे जीवन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए डर, लालच और मोह से मुक्ति जोकि स्पष्टता (स्वयं को लेकर और इस दुनिया को लेकर ) और आत्मनिर्भरता से मिलनी है और आनंद के लिए कार्य में उत्कृष्टता, लेकिन आजकल क्या हो रहा है लोग मन बहलाने वाले सतही सुख को पाना चाहते हैं', अहंकार को पुष्ट करने को दिखावा करके लोगों से तारीफ पाना चाहते हैं और डर और असुरक्षा की भावना के चलते एक दूसरे से भेदभाव करते हैं अनैतिक तरीके से दूसरों की असुविधा और गरिमा की परवाह किये बिना बस असीमित धन और शक्ति हांसिल करना चाहते हैं, ऐसा ही होने के चलते जीवन जटिल होता जा रहा है लोगों का |
आपके स्तर पर आवश्यक चिंतन हेतु प्रस्तुत, आपकी राय आमंत्रित है नीचे दिए गए लिंक से टाइप कर भेज दीजिये | या फिर lovekush@lovekushchetna.in पर ईमेल कर दीजिये
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शुभकामनायें
यह श्रेणी, मैंने डॉ विजय अग्रवाल सर से प्रेरित होकर बनायीं है, उनका कहना है की जैसे हर गाना गाने वाला इंसान गायन की बारीकियों को नहीं समझता, वैसे ही हर जीने वाला शख्स, जीवन की बारीकियों को नहीं समझता, प्रयास रहेगा की डॉक्टर साहब द्वारा जीवन प्रबंधन पर ऑडियो लेक्चर के लिंक को टॉपिक के अनुसार यहाँ उपलब्ध कराया जाये |
उदाहरण के लिए जीवन दर्शन विषय पर डॉक्टर साहब के एक कमेंट वाले ऑडियो का लिंक यहाँ दिया जा रहा है जिसमे वह अपनी एक स्टूडेंट सौम्य गुप्ता जी के सवाल का जवाब दे रहे हैं : LM 22-09-25
शुभकामनाएं
1. लोग संवेदनशील हों, दूसरों की तकलीफ, सुविधा-असुविधा का ध्यान रखें, आकांक्षाओं को समझे और संघर्षों को भी, फिर इस समझ के लिए वो चाहे तो साहित्य का सहारा लें या फिर अच्छी फिल्मों का
2. लोग जीवन मे आनंद, अपने कार्य की उत्कृष्टता मे ढूँढे या फिर रचनात्म्क कार्यों मे न की सतही मज़े और नशे मे
3. लोग अपने पराये की भावना से ग्रसित न हों, सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस और सच के पक्ष मे खड़े होने का सामर्थ्य रखते हों |
आपकी राय आमंत्रित है नीचे दिए गए लिंक से टाइप कर भेज दीजिये | या फिर lovekush@lovekushchetna.in पर ईमेल कर दीजिये
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धन्यवाद
बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |
अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |

स्वयं भी पढ़ें और बच्चों के साथ प्रेरणादायक प्रसंग साझा करें |
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वीर दुर्गा दास - दुर्गादास एक ऐसे नायक थे, जिनका सारा कर्तृत्व, कर्तव्य और संपूर्ण जीवन परस्वार्थ, परसेवा और परोपकार की पवित्र वेदी पर बलिदान होता रहा । वे न राजा थे और न राजकुमार । न उनका कोई पैतृक राज्य था और न बाद में ही उन्होंने कोई भू-खंड अपने अधिकार में करके उस पर अपना राजतिलक कराया । जबकि उन्होंने अपने बाहुबल और बुद्धिबल से मारवाड़ को स्वतंत्र कराया, मुगलों से तमाम जागीरें छीन ली, दिल्ली के बादशाह औरंगजेब को नीचा दिखाकर आर्य धर्म की पताका ऊँची कर दी । |
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2 |
सुभाष चंद्र बोस - स्वाधीनता के पुजारी |
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3 |
दादाभाई नौरोजी -स्वाधीनता के मंत्र- द्रष्टा |
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4 |
जानकी मैया- समाज - सुधार और जनसेवा मे संलग्न |
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5 |
जमशेद जी टाटा - आर्थिक पुनर्निर्माण के अग्रदूत |
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6 |
द्वारकानाथ घोष - धन, मन और चरित्र के धनी |
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7 |
पंजाब- केसरी लाला लाजपत राय - भारतीय स्वाधीनता को करने में जिन शिल्पियों का आदरणीय योगदान रहा है, पंजाब- केसरी लाला लाजपत राय का अन्यतम स्थान है |
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8 |
स्वामी विवेकानन्द - धर्म और संस्कृति के महान उन्नायक |
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9 |
स्वामी रामकृष्ण परमहंस- युग चेतना के सूत्रधार |
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10 |
कार्ल मार्क्स - समानता के पक्षकार |
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