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शिक्षक/संत/महात्मा बनाम उनके द्वारा दिया हुआ ज्ञान? एक समीक्षा

आजकल एक बात बहुतायत मे देखने को आ रही है कि समाज के ज़्यादातर वर्ग अपनी पसंद के किसी उपदेशक को इतना मान दे रहे हैं कि उसकी बे सिर पैर की अंधविश्वास फैलाने वाली बातों को भी आँख मूंदकर मान ले रहे हैं, ऐसा अमूमन किसी इंसान को उसकी बात से ज्यादा उसके होने को महत्व दे देने से है, इसमे व्यक्तिगत और सतही  स्वार्थ हो सकता है लेकिन लंबे समय अंतराल मे यह आदत इंसान की विवेचन क्षमता पर नकारात्मक असर डालने वाली साबित हो सकती है|, यह देखना हास्यपाद है कि कुछ लोग तो सत्संग मे भी जीवन की गहराई जानने और उसकी सच्चाई जानने के बजाय हँसाने वाली और मन को अच्छी लागने वाली या अहंकार पुष्ट करने वाली बात सुनने जाते हैं  


आज किसी उपदेशक की बात सही हो सकती है, कल उसकी बात अतार्किक और सतही भी हो सकती है इसीलिए किसी भी उपदेशक की बात तब ही तक सुननी और माननी है जब तक उसकी बातों मे सत्य, तर्क और व्यावहारिकता है जोकि प्राणियों की गरिमा और उन्नयन की संवाहक/सरंक्षक होती  है | 


ऐसा देखा जा रहा है कि कुछ उपदेशक सेलेब्रिटी बन जा रहे हैं, यहाँ तक तो तब भी ठीक है लेकिन वो पल चिंता पैदा करने वाला है जब ऐसा देखा जाता है कि लोगों को लगता है कि अमुक उपदेशक को अगर सामने से देख लिया तो जीवन बन जाएगा और वो उसके भक्त बन जा रहे हैं, मुझे व्यक्तिगत रूप से यही लगता है कि अगर कोई तार्किक उपदेशक मिल गया है तो उसके प्रवचन सुनकर खुद को और तार्किक व समझदार बनाओ उनकी बातों को जीवन मे प्रयुक्त करो लेकिन अच्छे से टटोलकर क्योंकि अच्छा लगना और वास्तव मे अच्छा होना, दोनों मे अंतर है और तो ये तो कभी न सोंचो कि अमुक उपदेशक के सामने बैठ जाने से सब दुख दूर हो जाएंगे या कोई चमत्कार हो जाएगा|


संयोग होते हैं सुखद भी और दुखद भी, आपके जीवन मे भी हो सकते हैं, मानसिक रूप से तैयार रहिए सामना करने को, इस दुनिया मे बहुत कम चीज़ें हैं जिनका आप श्रेय ले सकते हैं या जिन्हे आप नियंत्रित कर सकते हैं |


सच्चाई का जीवन जीना है और सच्चाई की कमाई पर ही निर्वाह करना है, शरीर स्वस्थ रहे इसके प्रयास करने हैं और चेतना उठती रहे इसके लिए नियमित अध्ययन करना है, खुद की काबिलियत बढ़ाते हुये खुद को रचनात्मक कार्यों मे लगते हुये बिना डर औए बिना लालच वाला जीवन जीना है, फिर जो होगा देखा जाएगा ऐसा संकल्प करके चलना है"अशुभ कल्पनाएं उन्हे ही परेशान करती हैं जो यह सोंचते हैं कि सब कुछ अच्छा ही हो उनके साथ" लेकिन मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है हमारे बस मे आज को अच्छे से जीना है और ये संकल्प रखना कि कैसी भी परिस्थिति आ जाए सच और आत्मनिर्भरता का जीवन जीने के सारे प्रयास करने हैं हर हालत मे, "सही प्रयास अपने आपमे में ही जीत है |"  


जितने भी महान उपदेशक/शिक्षक/संत/महात्मा हुये हैं सबके उपदेश मे एक बात साझी रही है कि अपने कार्यों के केंद्र मे आत्मवलोकन, जगभलाई, आत्मनिर्भरता और सच्चाई रखिए | लेकिन होता क्या है कि हम इन महान लोगों के बताए रास्ते पर चलने के प्रयत्न करने के बजाय इनकी पूजा करने लगते हैं इस उम्मीद मे कि इनकी पूजा कर लेने भर से हमारी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी और जिंदगी बिना किसी कष्ट के कटती रहेगी|

प्रतीकों का सम्मान जरूरी है लेकिन इसके साथ उनकी बातों को अमल मे लाने के सच्चे प्रयास भी किए जाएँ तब ही आराधना / साधना सार्थक मानी जाएगी 

 

-लवकुश कुमार 

 


इसी विषय पर इतिहास मे परास्नातक सौम्या गुप्ता जी अपनी बात और समझ कुछ इस तरह व्यक्त करती हैं:-

आज हम कई रूपों मे भगवान को पूजते हैं, जैसे- राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, पैगम्बर मोहम्मद साहब, ईसामसीह, गुरुनानक जी, साई बाबा।

ये जितने भी गुरु या महान लोग धरती पर आए, वो ये बताने आए थे कि कैसे हम अपनी आत्मा के मूल गुणों, वित्रता , प्रेम, करुणा और आनंद आदि , इन सब को खुद में पा सकते है। लेकिन हमने क्या किया हमने मान लिया कि उनकी पूजा करनी है बस और बाकी वो ही सब करेंगे और अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट गए।

उन्होंने हमें जो सिखाया अगर हम उस सिखाए हुए पर चलते तो आज लोग/देश सीमाओं में बंटे होते पर. धर्म, पंथ और जाति के नाम पर नहीं। पूरे विश्व में शांति होती, प्रेम, भाईचारा होता और इसी एकता का संदेश उन महान आत्माओं ने दिया था।

वो जीवन जीकर ईश्वर को पाने की कला सिखाने आए थे। हमने उन्हें भगवान माना और हमने अपने हर अच्छे-बुरे के लिए उनको ही जिम्मेदार ठहराया और अपने कर्मों/निर्णयों/प्राथमिकताओं/वृत्तियों  पर ध्यान ही नहीं दिया/अवलोकन नहीं किया |

जैसे हम भगवान की पूजा करते हैं वैसे ही अगर ज्ञान को, प्रकृति को, इंसानों की अच्छाइयों को पूजें, महान लोगों के जीवन के पदचिहनों पर चलें और वैसे ही नेक  काम करें जैसे उन महान आत्माओं ने किया तो दुनिया बेहतर, सुंदर होकर  डर, लालच और घृणा से मुक्त हो जाए |


-सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |

इस लेख के माध्यम से लेखिका क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :

इस लेख का मुख्य संदेश क्या है?

इस लेख का मुख्य संदेश यह है कि हमें उन महान गुरुओं की शिक्षाओं को याद रखना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए। हमें ज्ञान, प्रकृति और मानवता की अच्छाइयों को महत्व देना चाहिए। हमें महान लोगों के जीवन के उदाहरणों से प्रेरित होकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए।

हमें इन गुरुओं की शिक्षाओं का पालन क्यों करना चाहिए?

हमें इन गुरुओं की शिक्षाओं का पालन इसलिए करना चाहिए क्योंकि उन्होंने हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाया। उनकी शिक्षाएं हमें अपनी आत्मा के मूल गुणों को विकसित करने, दूसरों के प्रति अधिक दयालु होने और दुनिया में शांति और सद्भाव लाने में मदद करती हैं। वे हमें सिखाते हैं कि हमें अपने कर्मों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।


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अभिकेन्द्रीय और अपकेंद्रीय बल से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1.अभिकेन्द्रीय बल
अभिकेन्द्रीय बल किसी पिंड को एक वृत्त में एकसमान रूप से गतिमान करने के लिए आवश्यक बल है। यह बल वृत्त की त्रिज्या के अनुदिश और केंद्र .............................कार्य करता है।
2.. अपकेन्द्रीय बल
अपकेन्द्रीय बल वह बल है जो किसी पिंड के वृत्ताकार पथ पर गति करते समय, पिंड की अपनी स्वाभाविक सीधी रेखा में पुनः गति
करने की "प्रवृत्ति"
के कारण उत्पन्न होता है।
अपकेन्द्रीय बल का परिमाण अभिकेन्द्रीय बल के परिमाण के ..........................होता है।
या छद्म बल अभिकेन्द्रीय बल के ................................होता है।


3.ऊर्ध्वाधर वृत्त में गति
क्षैतिज वृत्त में, गति गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g) से प्रभावित नहीं होती है, जबकि ऊर्ध्वाधर वृत्त की गति में, गति गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g) से प्रभावित  होती है अतः ऊर्ध्वाधर वृत्त की गति में 'g' का मान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस स्थिति में गति एकसमान नहीं रहती है। जब कण अपनी निम्नतम स्थिति से ऊपर की ओर गति करता है, तो उसकी गति तब तक
निरंतर जाती है जब तक वह अपने वृत्तीय पथ के उच्चतम बिंदु पर नहीं पहुँच जाता। यह गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध किए गए
कार्य के कारण होता है। जब कण वृत्त में नीचे की ओर गति करता है, तो उसकी गति ..........................रहती है।


उत्तर : 

1.की ओर 2.समान, बराबर और विपरीत 3.घटती, बढ़ती

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गति के नियम से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

गतिकी भौतिकी की वह शाखा है जिसमें हम किसी पिंड की गति का अध्ययन उसके कारण, अर्थात् गति उत्पन्न करने वाले बल को
ध्यान में रखकर करते हैं।

1. वह अंतर्निहित गुण, जिसके द्वारा कोई पिंड अपनी गति की अवस्था में किसी भी ........................................का विरोध करता है, जड़त्व कहलाता है।
पिंड जितना भारी होगा, जड़त्व उतना ही ...............................होगा और पिंड जितना हल्का होगा, जड़त्व उतना ही कम होगा।
2. जड़त्व का नियम बताता है कि कोई पिंड अपनी विरामावस्था या एकसमान गति (अर्थात, स्थिर वेग से गति) या गति की दिशा को
स्वयं बदलने में ....................................होता है।
3. न्यूटन के गति के नियम-
नियम 1. कोई पिंड तब तक विरामावस्था में रहेगा या एकसमान वेग से गति करता रहेगा जब तक उस पर कोई ...........................न लगाया
जाए।
गति के प्रथम नियम को '............................. नियम' भी कहा जाता है।
नियम 2. जब किसी स्थिर द्रव्यमान वाले पिंड पर बाह्य बल लगाया जाता है, तो बल एक त्वरण उत्पन्न करता है, जो बल के
........................................और पिंड के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
नियम 3. "प्रत्येक क्रिया की समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है"। जब एक पिंड A, दूसरे पिंड B पर बल लगाता है, तो B, A पर
..............................................और विपरीत बल लगाता है।
4. रैखिक संवेग- किसी पिंड के रैखिक संवेग को पिंड के द्रव्यमान और उसके वेग के ....................................के रूप में परिभाषित किया जाता है।
5. आवेग- अल्प अवधि के लिए कार्यरत बलों को आवेगी बल कहते हैं। आवेग को बल और उस छोटे समय अंतराल के गुणनफल के रूप में
परिभाषित किया जाता है जिसके लिए यह कार्य करता है। किसी बल का आवेग एक ...............................राशि है और इसका SI मात्रक Nm है।
— यदि किसी आवेग का बल समय के साथ बदल रहा है, तो उस बल के लिए बल-समय ग्राफ़ द्वारा परिबद्ध क्षेत्रफल ज्ञात करके आवेग को मापा जाता है।
— किसी दिए गए समय के लिए किसी बल का आवेग, दिए गए समय के दौरान पिंड के संवेग में कुल परिवर्तन के ....................................होता है।
6. संवेग संरक्षण नियम
कणों के एक पृथक निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है।
दूसरे शब्दों में, जब निकाय पर कोई बाह्य बल नहीं लगाया जाता है, तो उसका कुल संवेग ..................................रहता है। बंदूक का प्रतिक्षेपण, रॉकेट
और जेट विमानों की उड़ान, रेखीय संवेग संरक्षण नियम के कुछ सरल अनुप्रयोग हैं।
7. किसी पिंड का भार- यह वह बल है जिससे पृथ्वी किसी पिंड को अपने केंद्र की ओर आकर्षित करती है। यदि M पिंड का द्रव्यमान
है और g गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है, तो पिंड का भार ऊर्ध्वाधर ..................................की ओर Mg है।
(ii) अभिलंब बल- यदि दो पिंड संपर्क में हैं, तो संपर्क बल उत्पन्न होता है। यदि सतह चिकनी है, तो बल की दिशा संपर्क तल के अभिलंब होती है। इस बल को हम अभिलंब बल कहते हैं।

8. डोरी में तनाव- मान लीजिए एक गुटका डोरी से लटका हुआ है। गुटके का भार ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कार्य कर रहा है, लेकिन
वह गति नहीं कर रहा है, इसलिए इसका भार डोरी द्वारा लगाए गए बल द्वारा संतुलित है। इस बल को 'डोरी में तनाव' कहते हैं।
तनाव एक खिंची हुई डोरी में लगने वाला बल है। इसकी दिशा डोरी के अनुदिश और विचाराधीन वस्तु से .....................ली जाती है।


9. सरल घिरनी - एक non- stretchable डोरी के सिरों पर बंधे m1 और m2 द्रव्यमान के दो पिंडों पर विचार करें, जो एक हल्की और घर्षण रहित घिरनी के
ऊपर से गुजरते हैं। मान लीजिए m1 > m2 है। भारी पिंड (m1) ............................की ओर गति करेगा और हल्का पिंड(m2) ऊपर की ओर गति करेगा।
10. आभासी भार और वास्तविक भार
— यदि कोई पिंड विरामावस्था में है या एकसमान गति की अवस्था में है, तो उसका 'आभासी भार' उसके 'वास्तविक भार' के .................होता है।
— ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर त्वरित गति के लिए किसी पिंड का आभासी भार इस प्रकार दिया जाता है:
आभासी भार = वास्तविक भार + Ma = M (g + a), आप झूले की अवस्था याद कीजिये जब आप ऊपर को और गति कर रहे होते हैं तो लगता है की नीचे की तरफ कोई दबा रहा क्योंकि आभासी भार आपके वास्तविक भार से ज्यादा होता है |


— ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर त्वरित गति के लिए किसी पिंड का आभासी भार इस प्रकार दिया जाता है:
आभासी भार = वास्तविक भार -  Ma = M (g - a) आप झूले की अवस्था याद कीजिये जब आप नीचे को और गति कर रहे होते हैं तो लगता है की ऊपर की तरफ कोई उठा रहा माने आप हल्का महसूस कर रहे होते हैं क्योंकि आभासी भार आपके वास्तविक भार से कम होता है |


उत्तर : 

1.परिवर्तन, 2.अधिक, असमर्थ, 3.बाह्य बल,जड़त्व का, समानुपाती, समान 4.गुणनफल, 5.सदिश, बराबर 6.स्थिर(constant) 7.नीचे 8.दूर 9.नीचे, 10.बराबर 

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घर्षण से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1.घर्षण - संपर्क में दो सतहों के बीच किसी भी ...............के विरोध को घर्षण कहा जाता है। यह संपर्क में दो सतहों की सतही अनियमितताओं के 'अंतर-जाल' के कारण उत्पन्न होता है।
2. स्थैतिक और गतिज (गतिज) घर्षण - संपर्क में दो सतहों के बीच (i) सापेक्ष गति शुरू होने से ...........और (ii) उनके बीच सापेक्ष गति शुरू होने के ..................... लगने वाले घर्षण बलों को क्रमशः स्थैतिक और गतिज घर्षण कहा जाता है।

3. स्थैतिक घर्षण हमेशा गतिज घर्षण से थोड़ा .......................होता है।
4. गतिज घर्षण बल का परिमाण .................................के समानुपाती होता है।
5. सीमांत घर्षण बल - यह घर्षण बल तब कार्य करता है जब पिंड गति करने वाला होता है। यह संपर्क सतह पर लगने वाला ............................घर्षण बल है। हम
6. घर्षण के नियम:
(i) सीमांत घर्षण बल का परिमाण संपर्क सतह पर अभिलंब बल के ...................................होता है।
(ii) सीमांत घर्षण बल का परिमाण सतहों के बीच संपर्क क्षेत्र पर ..............................करता।

7. घर्षण गुणांक
दो सतहों के बीच घर्षण गुणांक (μ) उनके सीमांत घर्षण बल और उनके बीच अभिलंब बल का .....................होता है |
8. घर्षण कोण
यह वह कोण है जो सीमांत घर्षण बल F और अभिलंब अभिक्रिया R का परिणामी .......................की दिशा के साथ बनाता है।
09. विश्राम कोण
विश्राम कोण (α) एक झुके हुए तल का ...............................के साथ वह कोण है जिस पर उस पर रखा कोई पिंड बिना किसी त्वरण के नीचे की ओर खिसकना शुरू कर देता है।

10. घर्षण का महत्व बिना फिसलन के चलना और जहां दो प्रष्ठों को एक साथ चलाना हो वहाँ है जैसे की पट्टा और इंजिन (आटा चक्की, अन्य यंत्र जहां यंत्र को घुमाने के लिए उसे इंजिन से पट्टे द्वारा बल आघूर्ण देते हैं |)


उत्तर : 

1.सापेक्ष गति, 2.पहले, बाद, 3.अधिक, 4. अभिलंब बल (normal reaction), 5. अधिकतम, 6.समानुपाती, निर्भर नहीं 7.अनुपात, 8.अभिलंब अभिक्रिया, 9.क्षैतिज
 

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सीधी रेखा में गति से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1. "किसी वस्तु को गतिशील कहा जाता है यदि उसकी स्थिति समय के साथ ...........................है"।

2. बिंदु वस्तु- यदि वस्तु द्वारा तय की गई लंबाई वस्तु के आकार की तुलना में ...............................................है, तो वस्तु को बिंदु वस्तु माना जाता है।

3. एक आयामी गति-  एक .........................................में गतिमान कण को ​​एक आयामी गति से गुजरना कहा जाता है। उदाहरण के लिए, एक सीधी रेखा में एक ट्रेन की गति, गुरुत्वाकर्षण के तहत स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तु आदि।

4. द्वि-आयामी गति- एक ........................में गतिमान कण को ​​द्वि-आयामी गति से गुजरना कहा जाता है। उदाहरण के लिए, बंदूक से दागे गए गोले की गति, कैरम बोर्ड के सिक्के आदि।

5. त्रिविमीय गति- अंतरिक्ष में गतिमान किसी कण को ​​त्रिविमीय गति कहते हैं। उदाहरण के लिए, आकाश में पतंग की गति, हवाई जहाज की गति आदि।

6. दूरी- गति में किसी कण के लिए, कण की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों के बीच तय किए गए .....................की कुल लंबाई को उसके द्वारा तय की गई दूरी के रूप में जाना जाता है जबकि किसी निश्चित समय में किसी कण का विस्थापन, उस समय के दौरान किसी विशेष दिशा में कण की स्थिति के.............. रूप में परिभाषित होता है। यह उसकी प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति तक खींचे गए सदिश द्वारा दिया जाता है।

7. विस्थापन और दूरी में अंतर करने वाले कारक

—> विस्थापन की एक दिशा होती है। दूरी की कोई................. होती।

विस्थापन का परिमाण धनात्मक और ऋणात्मक दोनों हो सकता है।

—> दूरी सदैव धनात्मक होती है। यह समय के साथ कभी कम नहीं होती।

—> दूरी ≥ | विस्थापन |

8. एकसमान चाल: यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में ...................दूरी तय करती है, तो उसे एकसमान चाल से गतिमान कहा जाता है।

एकसमान वेग: यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में समान विस्थापन तय करती है, तो उसे एकसमान वेग से गतिमान कहा जाता है।

9. परिवर्तनशील चाल: यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में ..........................दूरी तय करती है, तो उसे परिवर्तनशील चाल से गतिमान कहा जाता है।

परिवर्तनशील वेग: किसी वस्तु को परिवर्तनशील वेग से गतिमान कहा जाता है यदि वह समान समय अंतराल में असमान विस्थापन तय करती है।

10. औसत चाल- यह तय की गई ..............पथ लंबाई और संगत समय अंतराल का अनुपात है।

11. किसी वस्तु की औसत चाल किसी निश्चित समय अंतराल में उसके औसत वेग के परिमाण से .................होती है।

12. तात्क्षणिक चाल। किसी क्षण किसी वस्तु की चाल को तात्क्षणिक चाल कहते हैं।

13. तात्क्षणिक वेग - किसी कण का तात्क्षणिक वेग, समय के किसी भी क्षण या उसके पथ के किसी भी बिंदु पर उसका वेग होता है।

नोट- एक पूर्ण यात्रा के लिए दूरी और औसत चाल शून्य नहीं होती, जबकि विस्थापन और औसत वेग ....................होते हैं।

14. त्वरण- जिस दर से वेग में ........................................होता है उसे त्वरण कहते हैं।

15. गतिज रेखाचित्र- किसी कण के 'विस्थापन-समय' और 'वेग-समय' रेखाचित्रों का उपयोग अक्सर हमें कण की गति का दृश्य निरूपण प्रदान करने के लिए किया जाता है। ग्राफ का ‘आकार’ कण के प्रारंभिक ‘निर्देशांकों’ और त्वरण की ..........................पर निर्भर करता है।

उत्तर : 

1.बदलती 2. बहुत बड़ी 3. सीधी रेखा 4.समतल 6. वास्तविक पथ, में परिवर्तन 7.दिशा नहीं, 8.समान, 9. असमान, 10. कुल, 11. अधिक या उसके बराबर, 13.शून्य,14. परिवर्तन, 15.‘प्रकृति’

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थ्रिल - एक लघुकथा

निसीथ, धीमे चला भाई सड़क पर और लोग भी हैं, और देख सामने मार्केट भी है, अनुभव ने डरते हुये निसीथ से बाइक की स्पीड कम करने को कहा |

देख भाई मुझे चाहिए थ्रिल लाइफ में और फिर ये तो हाइवे है मैं क्यों धीमी करूँ बाइक, निसीथ ने लापरवाही से जवाब दिया |

धड़ाम!!!  निसीथ ने इतने मे ही एक अधेड़ को टक्कर मार दी थी  जिसके हांथ से सीरप की शीशी गिरकर फूट गयी थी, अधेड़ के घुटनों से निकला खून और सीरप सड़क पर अपना रंग छोड़ चुके थे 

कुछ लोगों ने दोनों लड़कों को उठाया और कुछ ने उस अधेड़ आदमी को, चोट पीछे बैठे अनुभव को भी आई थी इसीलिए वो अपने साथी को गाली बकते हुये कह रहा था, "अबे गधे मना किया था न कि धीमे चल ये मार्केट एरिया है, तुझे थ्रिल ही महसूस करना है तो कोई बड़ी चुनौती वाला काम क्यों नहीं पकड़ता जीवन मे  ये बाइक को ओवरस्पीड चलाकर खुद की और दूसरों की जान क्यों लेने पर तुला है!, देख इस आदमी के हांथ मे दवाई थी, तेरे थ्रिल के चक्कर मे इसकी तो ......................."

-लवकुश कुमार



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C-24.09.25

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  • आसान शब्दों में स्पष्ट रूप से समझाने की कोशिश
  • निपटाने के लिहाज से न सुने, ध्यान से सुने।
  • माफीनामे के साथ होमवर्क 
  • शायद ये होम वर्क कोई न करे लेकिन मैं दूँगा क्योंकि जरुरी है।
  • इसके बिना बात बनेगी नहीं।
  • एक पक्ष और भी है।
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उजाला और मुस्कुराहट- सौम्या गुप्ता

चलो उन उजालों की कहानी लिखें 

चलो उन गवाहों की कहानी लिखें

चलो कहीं दूर चलकर अपनी कहानी लिखें

मुस्कान बहुत अनमोल है हम सबकी

उससे भी अनमोल है किसी के होठों पे लाना 

चलो उन मुस्कुराहटों की तो कहानी लिखें

चलो दूर कहीं चलकर अपनी कहानी लिखें

ज़िंदगी में सीखा है मैंने जो दोगे वही मिलेगा

बाँटोगे फूल तो अपना हाथ भी महकेगा।

चलो इस लेन-देन की कहानी लिखे

कहीं दूर चलकर अपनी कहानी लिखें।

-सौम्या गुप्ता 

सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |


इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :

कवयित्री ने मुस्कुराहट को अनमोल क्यों बताया है?

कवयित्री  ने मुस्कुराहट को अनमोल इसलिए बताया है क्योंकि यह खुशी और आनंद का प्रतीक है, जो जीवन में महत्वपूर्ण है। मुस्कुराहट से लोगों के बीच संबंध मजबूत होते हैं और यह कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मकता बनाए रखने में मदद करती है। यह लेख मुस्कुराहट को अनमोल मानता है क्योंकि यह दूसरों के साथ साझा की जाने वाली खुशी और सहानुभूति की भावना को व्यक्त करता है।

कवयित्री  ने जीवन में क्या सीखा है?

कवयित्री  ने जीवन में यह सीखा है कि जो दोगे वही मिलेगा। इसका मतलब है कि यदि आप दूसरों से अच्छा व्यवहार चाहते हो तो पहले दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करके एक उदाहरण पेश करो । कवयित्री जीवन में दयालुता, सहानुभूति और प्रेम का महत्व समझती है।

कवयित्री दूसरों के साथ क्या साझा करना चाहती  है?

कवयित्री दूसरों के साथ अपनी खुशियाँ और अनुभव साझा करना चाहती है। वह चाहती है कि लोग जीवन में सकारात्मकता और आनंद की भावना को अपनाएँ। कवयित्री दूसरों के साथ प्रतीकात्मक रूप से फूल बांटकर और अपनी कहानी लिखकर खुशी फैलाना चाहती है।


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मधुरिमा, चेतन और करप्सन - एक लघुकथा 

आओ इधर बैठते हैं, चेतन ने अपनी मंगेतर मधुरिमा को सिटी व्यू साइड की  टेबल की तरफ इशारा करते हुए कहा और दोनों बैठ गए अपनी-अपनी कुर्सी पर, यह रेस्तरां अपने विंडो साइड व्यू के लिए मशहूर था शहर में, खिड़की से बाहर नीचे हरे भरे पेड़ और सामने रेजिडेंशियल काम्प्लेक्स के ऊँचे ऊँचे टावर|

आये थे दोनों साथ में शुकून के पल बिताकर मेमोरी बनाने लेकिन इसी बीच चेतन जोकि एक सिविल इंजीनियर था राज्य सरकार में, चेतन बैठे ही थे कि उनके फोन में एक न्यूज़ पॉप होती है कि आसाम की एक महिला प्रशासनिक अधिकारी के घर से करोड़ों नकद कैश और करोड़ों की ज्वेलरी बरामद हुयी, वह महिला अधिकारी पिछले कुछ महीनो से विजिलेंस की निगरानी में थी |

चेतन ये खबर पढ़कर व्यथित सा हो गया , उसका उतरा सा चेहरा देखकर उसकी मंगेतर मधुरिमा जोकि पेशे से एक शिक्षिका है, सौम्यता से पूछती है, "क्या हुआ आपको, कोई दिक्कत ? ", "इज एवरीथिंग फाइन ?"

चेतन ने उसी व्यथित मन से कहा कुछ ख़ास नहीं, ये तो अक्सर का हो गया है, जब-तब खबर आ ही जाती है कि फलां अधिकारी के घर करोड़ों का कैश और ज्वेलरी बरामद हुयी!

ऐसी कौन सी मजबूरी, लालच या डर है कि लोग रिश्वत लेने से नहीं रोकते खुद को, मुझे तो कोई कारण नज़र नहीं आता, चेतन चिंता कि अवस्था मे बोला क्योंकि उसे ये बात पता थी कि रिश्वत के सिस्टम से लोगों को अवसर मिलने मे असमानता पैदा होती है और मेरिट किनारे हो जाती है साथ ही समाज मे ओवर-आल गुणवत्ता घटती है|
मधुरिमा मुस्कुराते हुये अपने दार्शनिक अंदाज में कहती है कि इनके अंदर का खालीपन इनसे भौतिक चीजों को इकट्ठा करके इन्हे भ्रम मे डलवाता है कि इससे इनके अंदर का खालीपन भर जाएगा या फिर उन्हे लगता है कि जल्दी और ज्यादा पैसे बनाकर वो समाज के लोगों से ज्यादा इज्ज़त पा लेंगे और अंदर कि बेचैनी मिट जाएगी हालांकि मिटती नहीं क्योंकि दुनिया के लोग भी तो चालाक है जब तक स्वार्थ रहता है तब ही तक मान देते हैं, किसी को लगता है कि कोई बड़ी बीमारी न हो जाए उसके लिए अनैतिक तरीके से पैसे इकट्ठे करते हैं, मौत और अकेलेपन से इतना डरते हैं एक से के घृणित कार्य करते हैं और जीना ही भूल जाते हैं, कोई वास्तविक रोमांच नहीं रह जाता, कोई पैसा इकट्ठा करने मे लगा है तो कोई प्रेस्टीज़, और तो और दबाव और डर मे जी रहे  दूसरों को भी तकलीफ देते हैं, गलत उदाहरण बनते हैं, ऐसे लोगों के लिए  तरस और घृणा की  भावना के साथ मधुरिमा  व्यंगात्मक मुस्कान देती है, चेतन कुछ रिलैक्स महसूस करता है जवाब पाकर, देर से ही सही बैरा आता और कहता है कि सर स्टार्टर मे क्या लेंगे ?

-लवकुश कुमार



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जीवन में कुछ अच्छा करना चाहते हैं, वाकई? लेकिन कैसे ? एक नजरिया

कई लोग मिलते हैं जो कहते हैं कि जीवन में कुछ अच्छा, कुछ बड़ा करना चाहते हैं, लेकिन जब ध्यान से देखो तो पता चलता है कि जो काम उन्होंने अपने हाँथ में ले रखा है फिल-हाल वो उसे ही अच्छे से नहीं करते क्योंकि उस काम में उनका मन नहीं लगता(क्योंकि उसे वो छोटा समझते हैं, जिम्मेदारी का भाव नदारद है ) |

मेरा मानना है कि जो भी काम हाँथ में लिया है उसे आप बेहतर से बेहतर तरीके से करके ही अपने आज को सार्थक बना सकते हो, आगे के जीवन का तो पता नहीं कि कब आपको अपने सपनो का बड़ा  और अच्छा काम करने का मौका मिले लेकिन जो काम आपने आज हाँथ में लिया है उसे तो अच्छा करिए ताकि आज का दिन सार्थक हो सके और मुझे पूरा अनुभव है की इससे आपको संतुष्टि भी मिलेगी और आगे के रास्ते खुलेंगे, उत्कृष्टता आएगी और साथ में आनंद, "जीवन आज को बेहतर से जीने में है नाकि सपने देखते रहने में", बेहतर का सपना भी देखें और प्रयास भी करें लेकिन आज के काम जिसको आपने हाँथ में ले रखा है उसे बेहतरीन तरीके और जिम्मेदारी से करें निपटाऊ नहीं, तब ही देश महानता की तरफ बढेगा जब हर कोई अपने काम को करीने से करे तब ही वो दूसरों से भी एक्स्पेक्ट कर सकता है की वो उसे अच्छी और उत्कृष्ट सेवा दे |

कुछ बड़ा कर पायें, कोई बड़ी जिम्मेदारी मिले संभालने को उससे पहले जरुरी है कि जो आपकी नज़रों में छोटे छोटे काम या जिम्मेदारियां हैं उन्हें अच्छे से निभाओ यही हैं  नीव की ईटें जिनसे भवन निर्माण का आगे का मार्ग प्रशस्त होगा, हर काम में उत्कृष्टता की चाह और प्रयास बहुत जरुरी तकनीकी और अन्य एडवांसमेंट के लिए |

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