banner

Pre-booking of books by the author started...

Books by Author Lovekush Kumar

Explore the books by author for excelling in your discipline.

Read Now

Physics

Explore for detailed physics solutions and tips.

Read Now

Society

Explore more about ideas and inspiring actions for a better society.

Read Now

Excellence

Explore more about ideas and inspiring actions for a better society.

Read Now

Human Values

Explore more about ideas and inspiring actions for a better society.

Read Now

Education

Explore more about ideas and inspiring actions for a better society.

Read Now

Appreciation and Promotion

Explore for "promotable images/quotes" at your social media for a better society.

Read Now

कुछ सवाल

सामाजिक स्थिति को लेकर कुछ जरुरी सवालों के लिए क्लिक करें।

अभी पढ़े

लघु कहानियां

लेखक द्वारा सामाजिक तानेबाने पर लिखित कुछ कहानियों के लिए क्लिक करें।

अभी पढ़े

भौतिकी (Physics in Hindi)

हिन्दी में भौतिकी की समझ को बेहतर करने के लिए क्लिक करें।

अभी पढ़े
Banner 2
Banner 3

Recent Articles

ख़ुशी - एक लघुकथा

कितनी सोंधी खुशबू आ रही है, लंबी सी सांस खींचकर, सोंधेपन को महसूस करते हुये साधना ने कहा,

हाँ सच्ची कुछ देर पहले ही बूंदा बांदी हुई है गर्म धरती की प्यास का इलाज, खिलखिलाते हुए अमृता ने जवाब दिया जो कि इसी गांव शांतिपुरी की रहने वाली है और अपनी कॉलेज फ्रेंड साधना को स्कूटी पर अपना गांव घुमा रही है|

लो आ गया हमारा शिव मंदिर और वो रही गौला नदी, अमृता ने मुस्कुराते हुए कहा, साधना की आंखों में भी चमक थी, मंद मंद ठंडी हवा, दूर तक दिखता क्षैतिज और फिर पेड़ों की कतार, जैसे कि सोच को विस्तार देने को कह रहे हों।

दोनों मंदिर के प्रांगण में बनी सीमेंट की बेंच पर बैठ जाती हैं। अमृता पहला सवाल दागती है: और साधना तुम फोन पर कुछ कह रही थी कि बहुत कुछ नया सीख रही हो, आओ अब आमने-सामने बात करते हैं, मुझे भी सिखाओ कुछ नया और इतना कहका अमृता अपनी अमर हंसी हंस देती है खिलखिलाकर, यूं की आस पास के मुरझाते फूल भी उसकी खिलखिलाहट से ऊर्जा समेट दुबारा खिल उठने को ललक उठें|

साधना भी अपने धीर और सौम्यता से भरे स्वभाव के अनुरूप मुस्कुराकर अपनी सहेली को उसके नाम से पुकारकार उसकी खिलखिलाहट की तारीफ करने से बिना चूके सधी हुयी आवाज मे कहती है कि देख अमृता मै तुझसे कुछ ऐसा साझा करना चाहती हूँ जो लोग कभी सालों-साल नहीं जान पाते,

अब ये तो संगति और पसंद की बात है कि मुझे सही समय पर ये बातें पता चल गईं|

अरे लेखिका महोदया क्या सीख लिया, अब बताओ भी, ज्यादा न तड़पाओ, अमृता ने बीच मे टोंकते हुये कहा और फिर वही खिलखिलाहट वाली हंसी|

अरे बताती हूँ मैडम, साधना ने मुस्कुराते हुये अपनी बात फिर शुरू की: मैंने पिछले कुछ महीनों से उपनिषद् गंगा सीरियल के कई एपिसोड देखे हैं,जो कुछ मिला वो अब कहे देती हूँ;

मैंने कई बार सुना है कि खुशी, आनंद ये सब अंदर से महसूस किया जा सकता है, और अब मुझे भी बहुत से बाहरी कारण नहीं ढूँढने पड़ते, बाहर बहुत सी गड़बड़ होने पर अंदर खुशी ही रहती है। एक अद्भुत चीज जो मैंने अनुभव की कि खुशियों की मांग जब हम बाहरी चीजों से करते हैं तो खुशियाँ नहीं मिलती लेकिन अंदर से आनंदित हो तो बाहर भी सबसे प्यार, स्नेह मिलता है।

उपनिषद् गंगा स्वयं को जानने का एक बहुत अच्छा साधन है। एक एपिसोड डेली, अंदर के इतने सारे प्रश्नों के उत्तर दे सकता है, ये अकथनीय अनुभव है। मेरे बचपन के जो प्रश्न थे, वो बहुत सारे सुलझ गए।

खिलखिलाने वाली अमृता अब शांत थी और पूछती है कि कुछ खुलकर बताओगी इंटेलिजेंट लेडी, मेरा मतलब है कि बाहरी चीजों से स्थायी ख़ुशी क्यों नहीं मिलती?

ओके बताती हूँ, साधना फिर अपनी बात शुरू करती है: बाहरी चीजों से स्थायी खुशी इसलिए नहीं मिलती क्योंकि यह सतही होती है और बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। जब हम अंदर से खुश होते हैं, तो हम अपने काम को अच्छे से अंजाम देते हैं और उत्कृष्टता पाते हैं जो अपने आप मे ही एक टिकाऊ आनंद देने वाली बात है और जब हम अंदर से आनंदित रहते हैं तो आस पास मुस्कुराकर अच्छे से पेश आते हैं नतीजा हमारे आस पास के लोगों के व्यवहार पर भी इसका प्रभाव पड़ता है और आस पास के लोगों का व्यवहार भी खुशनुमा हो जाए इसकी संभावना बढ़ जाती है और नतीजा हमें प्यार और स्नेह मिलता है।

आंतरिक खुशी आत्म-जागरूकता, संतोष और आत्म-प्रेम से आती है, जो बाहरी दुनिया से मिलने वाली क्षणिक खुशियों से कहीं अधिक स्थायी होती है।

वाह मोहतरमा वाह, क्या बात कही है तुम्हारी बात सुन बादल भी बरसकर तुम्हारा आलिंगन करना चाहते हैं, यह कहकर अमृता फिर खिलखिला उठती है|

अरे बादलों से तो मेरा वैसे ही नजदीकी रिश्ता है, मेरा एक दोस्त मौसम विज्ञान विभाग मे जो है, साधना भी अमृता की तरह ही खिलखिला रही थी बारिश की फुहार को अपने चेहरे पर महसूस करते हुये |

 

- लवकुश कुमार


अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ  साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें  नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो  Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें

फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

शुभकामनाएं

Read More
अभिव्यक्ति - एक लघुकथा

अरे रंगोली, कैसी हो?, प्रेम ने अचानक बस स्टॉप पर अपनी ग्रेजुएशन की बैचमेट को देखते हुये खुश होकर आवाज देते हुये कहा|

ओ हाय... प्रेम, मै बढ़िया तुम कैसे हो ? यहाँ कैसे ? अच्छा तुम तो केंद्र सरकार के किसी विभाग मे कार्यरत हो न ? रंगोली ने भी खुशी और आश्चर्य से भरे हुये चेहरे के साथ सवालों की झड़ी लगा दी|

मै भी एकदम अच्छा हूँ, रंगोली, महत्व दर्शाने के लिए नाम ओर ज़ोर देते हुये प्रेम ने जवाब दिया, हाँ यहीं पंतनगर मे पोस्टेड हूँ, तुम यहाँ कैसे? तुम भी तो किसी प्रशासनिक कार्यालय मे हो? इधर ? कहाँ जा रही हो ?

वाउ ग्रेट, सो क्लोज़ टू ब्यूटीफुल नैनीताल !, रंगोली मुस्कुराकर जवाब देते हुये, हाँ मै भी बरेली पोस्टेड हूँ नैनीताल जा रही हूँ घूमने और तुम कहाँ जा रहे हो ?

बहुत बढ़िया, मै हल्द्वानी आया था किसी काम से, काम तो हुआ नहीं वापस जा रहा हूँ, अच्छा हुआ तुम मिल गयी हल्द्वानी आना सफल हो गया, दोनों एक साथ हंसने लगते हैं | चाय पियोगी, नैनीताल की बस अभी रुकेगी कुछ देर, प्रेम आग्रह करता है |

क्यों नहीं ! ऐसे मौके कम ही आते हैं, रंगोली ने मुस्कुराते हुये जवाब दिया| दोनों पास की एक चाय की गुमटी से चाय लेते हैं |

हल्द्वानी की ठंड के बीच कडक चाय की चुस्की के साथ रंगोली पूछती है और सुनाओ प्रेम क्या चल रहा है आजकल ?

दो ही काम, नौकरी और लेखन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा और भ्रष्टाचार पर, रिएक्शन की अपेक्षा करते हुये प्रेम रंगोली को देख जवाब देता है|

बढ़िया, लेकिन सरकारी सेवा मे होकर भी भ्रष्टाचार पर लिखते हो ! डर नहीं लगता है ? रंगोली आश्चर्य के साथ पूछती है|

नहीं डर किस बात का, जैसे हम अपने आस पास की हवा/मिट्टी को शुद्ध करने के लिए लिखते बोलते हैं क्योंकि वो एक जरूरी काम है वैसे ही भ्रष्टाचार पर लिखना और बात करना भी जरूरी है क्योंकि हम सब उससे प्रभावित हैं, ये किसी एक सरकार या एक देश की समस्या नहीं, ये तो समाज की समस्या है, सरकार में लोग समाज से ही आते हैं, न तो हमारे बात न करने से भ्रष्टाचार खत्म होगा और न केवल कड़ी सजा से, इसके लिए लोगों की समझ पर काम करना होगा, जो लोग बीमार होकर मर जाने या अथाह पैसे के बिना सामाजिक प्रतिष्ठा ने मिलने के डर या दबाव मे रहते हैं या जो जीवन की अनिश्चितता के सत्य को स्वीकार नहीं करना चाहते वही डर और लालच मे भ्रष्ट आचरण करते हैं, मै फिर दोहराता हूँ ये केवल सरकार की नहीं समाज की और मानव मन की समस्या है |  जो इंसान मन से उत्पीड़क है, अज्ञानी है वो हिंसक भी होगा और भ्रष्टाचारी भी, फिर वो न धरती की परवाह करेगा न पानी, पेड़ और इंसान की |

रही बात सरकारी सेवा मे होने की तो इससे मेरी अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं जाती, समाज के हित मे जरूरी मुद्दों पर विचार और राय व्यक्त करना हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है, बशर्ते इससे आपके कार्यालयी कार्य/दायित्व प्रभावित न हो, और फिर मेरी शिक्षा और चेतना मुझे इस बदलते हुये समाज के सामने मूक दर्शक बने रहने या लोगों की प्रतिक्रिया से डरकर अपनी बात न रखने की सीख नहीं देती |

प्रेम की गहरी बातें सुन, रंगोली अपनी समझ पर पुनर्विचार करने को विवश हो जाती है|

हॉर्न बजता है, बस चलने को तैयार हो चुकी थी, दोनों दोस्त बेहतर स्पष्टता की खातिर आगे की चर्चा और संपर्क के लिए अपने मोबाइल नंबर साझा करते हैं..............

 

Read More
जीवन एक यात्रा - सौम्या गुप्ता

जिंद‌गी एक कारवाँ है,

इसमें लोग जुड़ते हैं,

इससे लोग कटते है।

 

माता-पिता, शिक्षक, दोस्त,

हमसफर इसका हिस्सा हैं 

पर वक्त का तकाजा

कभी इन्हें दूर

तो कभी पास लाता है।

 

पर हमें चलना होता है

और लोग जुड़ें  या ना जुड़ें 

हमें आगे बढ़ना होता है

 

कभी किसी साथी के संग

कभी अकेले खुद के हमराही बन

अपनी मंजिल तक पहुंचना होता है।

 

-सौम्या गुप्ता 

सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |


इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :

इस कविता का मुख्य विषय क्या है?

इस कविता का मुख्य विषय जीवन है, जिसे एक कारवाँ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह जीवन के सफर में लोगों के साथ आने, बिछड़ने और आगे बढ़ने के बारे में है।

कविता में 'कारवाँ' शब्द का क्या अर्थ है?

यहाँ 'कारवाँ' शब्द जीवन के सफर का प्रतीक है, जिसमें लोग एक साथ चलते हैं, कुछ जुड़ते हैं और कुछ बिछड़ते हैं। यह जीवन की निरंतरता और परिवर्तनशीलता को दर्शाता है।

वक्त का तकाजा' से क्या तात्पर्य है?

वक्त का तकाजा' समय के प्रभाव और परिवर्तनों को दर्शाता है। यह दिखाता है कि कैसे समय के साथ लोग दूर हो जाते हैं या फिर से मिल जाते हैं, और जीवन में बदलाव आते रहते हैं।

हमें आगे क्यों निकलना होता है, चाहे कारवाँ चले या न चले?

हमें आगे निकलना होता है, क्योंकि जीवन एक निरंतर प्रक्रिया है। चाहे हमारे साथ कोई हो या न हो, हमें अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहना चाहिए।

इस कविता का संदेश क्या है?

इस कविता का संदेश है कि जीवन एक सफर है, जिसमें हमें अकेले या दूसरों के साथ, आगे बढ़ते रहना चाहिए। हमें अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए, चाहे रास्ते में कितनी भी बाधाएं आएं।


अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ  साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें  नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो  Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें

फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

शुभकामनाएं

Read More
पल - सौम्या गुप्ता

जिंदगी की सार्थकता की नींव पल होते हैं,

हम तलाशते रहते है उसको भविष्य में,

और करते है बस यही नादानी जिंदगी भर,

जैसे हम भागते रहते है अपनी परछाईं के पीछे,

और हो जाते है निराश।

- सौम्या गुप्ता

बाराबंकी उत्तर प्रदेश

इस लघु कविता  की रचयिता सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |


इस कविता के माध्यम से कवयित्री यह संदेश देना चाह रही है कि जीवन वर्तमान में होता है उस वर्तमान में हाँथ में लिए हुए कार्य को अच्छे से करें, खुलकर स्वयं को अभिव्यक्त करें, रचनात्मक कार्यों और गरिमापूर्ण आत्मनिर्भर जीवन को आज और अभी जिया जा सके इसके लिए प्रयासरत रहें|


अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ  साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें  नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो  Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें

फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

शुभकामनाएं

Read More
जिंदगी - सौम्या गुप्ता

मानो तो हर पल खुशरंग है जिंदगी

न मानो तो बिल्कुल बेरंग है जिंदगी

दिल है गर साफ तुम्हारा,

तो दिलदार है जिंदगी

कभी खुशनुमा ख्वाब है जिंदगी

कभी धूप, कभी छाँव है जिंदगी

मानो तो हमसफर है जिंदगी

न मानो तो टूटा दरख़्त है जिंदगी

कभी सब मिले मन का

तो जश्न है जिंदगी

कभी कुछ मिले बुरा,

तो उदास है जिंदगी

कभी कोयल की कूक सी

मिठास है जिंदगी

कभी नीम के पत्तो सी

कड़वी है जिंदगी

पर चाहे जैसी हो जिंदगी

इसके सभी पन्नो में है जिंदगी

क्योंकि हर पन्ने पर ईश्वर का दिया वरदान है जिंदगी

कितनों की है आश तुम्हारी जिंदगी

कितनों के नहीं है पास ये जिंदगी

- सौम्या गुप्ता

बाराबंकी उत्तर प्रदेश

सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |


इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :

यह एक कविता है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं और रंगों का वर्णन करती है। इसमें जीवन की खुशी, दुख, सपने, और वास्तविकता को दर्शाया गया है, जो हमें जीवन के हर पल को महत्व देने की प्रेरणा देती है।

इस कविता में 'जिंदगी' को कैसे परिभाषित किया गया है?

इस कविता में 'जिंदगी' को एक बहुआयामी अनुभव के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें खुशी, दुख, सपने, वास्तविकता, और हर तरह के रंग शामिल हैं। यह जीवन को एक निरंतर बदलाव के रूप में देखती है, जिसमें हर पल एक नया अनुभव होता है।

कविता में 'हमसफर' किसे कहा गया है?

कविता में 'हमसफर' उस व्यक्ति या वस्तु को कहा गया है जो जीवन के सफर में साथ देता है, चाहे वह खुशी हो या गम। यह एक ऐसे साथी का प्रतीक है जो हमेशा साथ रहता है।

कविता में 'दरख्त क्या दर्शाता है?

कविता में 'दरख्त' दुःख और नुकसान का प्रतीक है। यह दिखाता है कि जीवन में कभी-कभी दुख भी आते हैं, जो हमें तोड़ सकते हैं।


अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ  साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें  नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो  Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें

फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

शुभकामनाएं

Read More
अस्तित्व - सौम्या गुप्ता 

अक्सर हम रिश्तों में उलझकर खो बैठते है खुद को और अपना अस्तित्व

खो जाते है " हम " खुद को किसी न किसी रिश्ते में छुपा कर,

मिट जाता है" मैं", रह जाता है सिर्फ रिश्ता

लेकिन

रहना चाहिए "हम" में भी एक "मैं"

अहम वाला नहीं "अस्तित्व" वाला

हर रिश्ते में देखना चाहिए खुद को भी

औरों से पहले, अपने अस्तित्व के लिए।

 

- सौम्या गुप्ता 

बाराबंकी उत्तर प्रदेश


सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |

इस कविता के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाह रही है उसे कुछ प्रश्नों के माध्यम से आसानी से समझ सकते है :

 

संदेश में किस बारे में बात की गई है?

संदेश में रिश्तों के महत्व, व्यक्तिगत अस्तित्व, और दूसरों से पहले खुद को देखने की आवश्यकता पर चर्चा की गई है। यह रिश्तों में खो जाने के खतरे और अपनी पहचान को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डालता है।

संदेश में 'मैं' और 'हम' का क्या अर्थ है?

'मैं' व्यक्तिगत पहचान और आत्म-सम्मान का प्रतीक है, जबकि 'हम' रिश्तों और समुदाय का प्रतीक है। संदेश 'मैं' को 'हम' के साथ संतुलित करने की बात करता है, ताकि रिश्तों में खोने के बजाय अपनी पहचान को बनाए रखा जा सके।

संदेश में 'अस्तित्व' का क्या महत्व है?

'अस्तित्व' का अर्थ है अपनी पहचान, मूल्यों और लक्ष्यों को बनाए रखना। संदेश में कहा गया है कि रिश्तों में शामिल होने के दौरान हमें अपने अस्तित्व को नहीं खोना चाहिए। दूसरों से पहले, हमें खुद को पहचानना और महत्व देना चाहिए।


अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ  साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें  नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो  Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें

फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

शुभकामनाएं

Read More
गुरुत्वाकर्षण से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

केप्लर के ग्रहीय गति के नियम-
1. केप्लर ने ग्रहों की गति का वर्णन करने वाले ..............नियम प्रतिपादित किए। ये नियम इस प्रकार हैं:
2. कक्षाओं का नियम- प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक ...........................कक्षा में परिक्रमा करता है, जिसमें सूर्य दीर्घवृत्त के किसी एक केंद्र पर स्थित होता है।
3. क्षेत्रफल का नियम- ग्रह की गति इस प्रकार परिवर्तित होती है कि सूर्य से ग्रह तक खींची गई त्रिज्या सदिश समान समय में समान .................को घेरती है।
4. सूर्य के चारों ओर ग्रह की समयावधि (परिक्रमा अवधि) का वर्ग अर्ध दीर्घ अक्ष के घन के समानुपाती होता है। परिणामस्वरूप, सूर्य के निकट स्थित ग्रहों की तुलना में दूर स्थित ग्रहों की परिक्रमण अवधि ...........................होगी।


न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम
5.न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार, ब्रह्मांड का प्रत्येक कण प्रत्येक अन्य कण को ​​एक ऐसे बल से आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के ....................................होता है।

6. बल की दिशा कणों को मिलाने वाली रेखा के ....................होती है। आनुपातिकता के स्थिरांक को सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक कहा जाता है जिसे G से दर्शाया जाता है,
अर्थात इसका मान पूरे ब्रह्मांड में समान रहता है, चाहे आप जिस भी ग्रह या तारे के लिए गणना कर रहे हों।
7. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक स्थिरांक G संख्यात्मक रूप से इकाई द्रव्यमान वाले दो कणों, जो एक-दूसरे से इकाई दूरी पर स्थित हैं, के बीच लगने वाले .......................के बराबर होता है।


गुरुत्वाकर्षण बल के महत्वपूर्ण लक्षण
8.दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल एक केंद्रीय बल होता है, अर्थात यह दो परस्पर क्रिया करने वाले पिंडों के केंद्रों को मिलाने वाली रेखा के ................कार्य करता है।
9.दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल मध्यवर्ती माध्यम की प्रकृति से स्वतंत्र होता है।
10. दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल अन्य पिंडों की उपस्थिति पर .........................करता है।
11. बल का परिमाण अत्यंत ...................होता है।


गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण
12. गुरुत्वाकर्षण बल (पृथ्वी द्वारा लगाया गया बल) के कारण किसी पिंड में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण कहते हैं। इसे आमतौर पर g से दर्शाया जाता है। यह हमेशा पृथ्वी के ...............की ओर होता है।
13. यदि पृथ्वी की सतह पर m द्रव्यमान का कोई पिंड पड़ा है, तो पिंड पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F=mg होता है।
जहाँ g सतह पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है। g = GM/R^2, जहाँ M और R क्रमशः संबंधित खगोलीय पिंड (ग्रह, तारा या
उपग्रह) (उदाहरण के लिए पृथ्वी या चंद्रमा) का द्रव्यमान और त्रिज्या हैं। चूँकि चंद्रमा के लिए M और R छोटे हैं, इसलिए g का मान पृथ्वी के मान से कम होगा, इसलिए चंद्रमा पर किसी पिंड का भार पृथ्वी पर उसके भार से .....................होगा।

भार W=mg है: जहाँ m द्रव्यमान है जो चंद्रमा और पृथ्वी या किसी अन्य ग्रह/उपग्रह पर समान होता है।
 

गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण में परिवर्तन
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण का मान ऊँचाई, गहराई, पृथ्वी के आकार और पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन के साथ बदलता रहता है।
14. ऊँचाई का प्रभाव। जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर जाते हैं, गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण का मान धीरे-धीरे ......................होता जाता है।
15. जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह के नीचे जाते हैं, g का मान ..........................जाता है।
16. भूमध्य रेखा पर पृथ्वी की त्रिज्या ध्रुवों की त्रिज्या से 21 किमी अधिक है, इसलिए उपरोक्त सूत्र से g का मान भूमध्य रेखा की तुलना में ध्रुवों पर .................है।
17. घूर्णन के कारण g का मान घटता है, इसलिए यह भूमध्य रेखा पर सबसे कम और ध्रुवों पर सबसे अधिक होता है क्योंकि घूर्णन अक्ष ध्रुवों से होकर गुजरता है, इसलिए घूर्णन ध्रुवों पर प्रभाव नहीं डालता है।

 

गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र
किसी पिंड के चारों ओर का वह स्थान जिसके भीतर उसका गुरुत्वाकर्षण बल अन्य पिंडों द्वारा अनुभव किया जाता है, गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र कहलाता है।
18. गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता (E) -क्षेत्र में किसी बिंदु पर किसी पिंड के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता को उस बिंदु पर रखे गए इकाई द्रव्यमान के पिंड द्वारा अनुभव किए गए ..............के रूप में परिभाषित किया जाता है, बशर्ते इकाई द्रव्यमान की उपस्थिति मूल गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को विचलित न करे। या E = बल/द्रव्यमान। दूरी r पर द्रव्यमान M द्वारा क्षेत्र E = GM/r^2 है।


19. गुरुत्वाकर्षण विभव- किसी पिंड के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में किसी बिंदु पर गुरुत्वाकर्षण विभव को इकाई द्रव्यमान के पिंड को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है। U = W / द्रव्यमान जहाँ W किया गया कार्य है |
दूरी r पर द्रव्यमान M द्वारा विभव E = .......................है।


20. गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा = गुरुत्वाकर्षण विभव x पिंड का द्रव्यमान। यह एक .................राशि है और इसे जूल में मापा जाता है।
21. पलायन वेग- किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक .............वेग जिससे वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर चला जाए, पलायन वेग कहलाता है।
22. उपग्रह- उपग्रह वह पिंड होता है जो अपेक्षाकृत बहुत बड़े पिंड (ग्रह) के चारों ओर एक कक्षा में निरंतर परिक्रमा करता रहता है। यह कक्षा वृत्ताकार या दीर्घवृत्ताकार हो सकती है। किसी ग्रह की कक्षा में परिक्रमा करने वाली..................को कृत्रिम उपग्रह कहते हैं। 

23. भूस्थिर उपग्रह - पृथ्वी के समान परिक्रमण काल ​​वाले उपग्रह को भूस्थिर उपग्रह कहते हैं। ऐसे उपग्रह भूमध्यरेखीय तल में ...................की ओर घूमते हैं। भूस्थिर उपग्रह की कक्षा को पार्किंग कक्षा कहते हैं। इन उपग्रहों का उपयोग संचार उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
एक भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर एक वृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता है।

उत्तर : 

1.तीन 2.दीर्घवृत्ताकार 3.क्षेत्रफल 4.अधिक 5.व्युत्क्रमानुपाती 6.अनुदिश 7.आकर्षण बल 8.अनुदिश 10.निर्भर नहीं 11.छोटा 12.केंद्र 13.कम 14.कम 15.घटता 16.अधिक 18.बल 19.- GM/r 20. अदिश 21.न्यूनतम 22. मानव निर्मित वस्तु 23.पश्चिम से पूर्व 

Read More
नवाचार, गरिमा और जजमेंटल होना

एक इंसान कुछ अपनी समझ में बेहतर करने के लिए कुछ ऐसा कर रहा है जोकि अपने आप में नया है, लीक से हटकर है, व्यक्तिगत नुकसान होने की भी संभावना है लेकिन दूसरों को कोई भी नुकसान नहीं होना है, फिर भी समाज के कुछ लोग बिना उस इंसान की गरिमा ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता की परवाह किए बस उसे टोंकना शुरू कर देते हैं यहां तक उसे मूर्ख कहना शुरू कर देते हैं ! होना तो ये चाहिए था कि लोग उसकी योजना को समझते और अगर वह व्यक्तिगत या सामाजिक रुप से लाभकारी हो तो उसमें हर संभव सहयोग करते लेकिन होता है उल्टा, जो खुद दो काम करने में चिड़चिड़ा हो जाता है वो दूसरे के नए काम और तरीके का मज़ाक उड़ानें का साहस जुटा लेता है।

 

इस माहौल को बदलना होगा और नवाचार के लिए माहौल बनाना होगा।

 

  1. अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ  साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें  नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो  Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें

    फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

शुभकामनाएं 

Read More
पारस्परिक सम्मान - बिना किसी शर्त के

अमूमन ऐसा देखा गया है कि किसी इंसान से कोई ग़लती या चूक हो गई या फिर कोई आंकड़ा बताने में कोई मानवीय गलती हो गई, इस पर ही कुछ लोग उस इंसान को नीचा दिखाने में लगे जाते हैं या अपमानजनक तरीके से बात करना शुरू कर देते हैं, जैसे कि बस इंतजार कर रहे हों कि अमुक इंसान से कोई ग़लती हो और इसे नीचा दिखाएं।

इससे कोई लाभ नहीं, न तो इस तरह कोई सामने वाले से कुछ अन्य चीजें जिसमें वो बेहतर है सीख सकता है और नहीं ऐसे इंसान से देशहित में या समाज हित में कोई कार्य ले सकता है।

पारस्परिक सम्मान बिना शर्त होना चाहिए, तब ही हम मिलकर कुछ बेहतर कर सकते हैं और एक दूसरे को निखारने में परस्पर सहयोग कर सकते हैं।

अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें

 

फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

 

शुभकामनाएं 

Read More
जागरूकता, स्पष्टता और उत्साह के संचार के लिए "हारिए न हिम्मत" पुस्तक का वितरण

जागरूकता, स्पष्टता और उत्साह के संचार के लिए "हारिए ना हिम्मत" पुस्तिका के वितरण का कार्य मैं अपने पंतनगर में तैनाती से कर रहा हूँ और यहाँ  पिथौरागढ़ में भी अपने संपर्क में आने वाले लोगों/कर्मियों/अधिकारियों,कलाकारों और छात्रों को इसका वितरण किया हूँ ताकि वो इसे पढ़कर जीवन के मामलों में स्पष्टता हांसिल कर सकें और इस तरह खुद को  परेशान, निरोत्साहित, अधीर करने और उधेड़ बुन में डालने वालों से विचारों से मुक्त हो सकें, अपने सामाजिक रिश्तों को सही परिप्रेक्ष्य में देखकर उन्हें उचित तरीके से बेहतर रूप में निभा सकें, अपने काम और तैयारी के बीच उचित प्राथमिकता लाकर उसमे संतुलन बैठा सकें और तो और अपने आस पास, मिलने वालों को बेहतर तरीके से जीवन से जुड़े मुद्दों पर राय दे सकें |

अगर आप भी स्वयं के लिए या अपने स्वजनों को भेंट स्वरुप इस पुस्तक को देना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक से इसे  गायत्री परिवार की वेबसाइट पर इस पुस्तक को खरीद सकते हैं -

https://awgpstore.com/product?id=SC17

आपके निर्णय निर्माण के लिए इस किताब से मेरी कुछ सीख साझा कर रहा हूँ ताकि आप इसके महत्व को आसानी से समझ सकें :

  1. दूसरों की निंदा करने में जितना समय हम देते हैं उतना ही अगर हम खुद की कमियां देख उन्हें ठीक करने में लगायें तो महानता की और बढ़ चलें |
  2. अध्यात्मिक चिंतन के बिना मनुष्य में विनीत भाव नहीं आता और ना उसमे अपने को सुधारने की क्षमता रह जाती है |
  3. राजनीतिक शक्ति आपके अधिकारों की रक्षा कर सकती है, पर जिस स्थान से हमारे सुख-दुःख की उत्पत्ति होती है उसका नियंत्रण राजनीतिक शक्ति नहीं कर सकती | यह कार्य अध्यात्मिक उन्नति से ही संपन्न हो सकता है |
  4. जब कोई मनुष्य अपने आपको अद्वितीय व्यक्ति समझने लगता है और अपने आपको चरित्र में सबसे श्रेष्ठ मानने लगता है, तब उसका अध्यात्मिक पतन होता है |
  5. जो व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति स्थिर रखना चाहते हैं, उनको दूसरों द्वारा आलोचनाओं से चिढना नहीं चाहिए |
  6. दूसरों का विश्वास तुम्हे अधिकाधिक असहाय और दुखी बनाएगा| मार्गदर्शन के लिए अपनी ही और देखो, दूसरों की और नहीं|
  7. तुम्हारी सत्यता तुम्हे दृढ बनाएगी और तुम्हारी दृढ़ता तुम्हे लक्ष्य तक लेकर जायेगी |
  8. महान व्यक्ति सदैव अकेले चले हैं और इस अकेलेपन के कारण ही वो दूर तक चले हैं| अकेले व्यक्तियों ने अपने सहारे ही संसार के महानतम कार्य संपन्न किये हैं | उन्हें एकमात्र अपनी ही प्रेरणा प्राप्त हुयी है | वे अपने ही आंतरिक सुख से सदैव प्रफुल्लित रहे हैं 
  9. जिस दिन तुम्हे अपने हाथ-पैर और दिल पर भरोसा हो जावेगा, उसी दिन तुम्हारी अंतरात्मा कहेगी की बाधाओं को कुचलकर तू अकेला चल अकेला |
  10. लोभों के झोकें, मोहों के झोंके, नामवरी के झोंके, यश के झोंके, दबाव के झोंके ऐसे हैं कि आदमी को लम्बी राह पर चलने के लिए मजबूर कर देते हैं और कहाँ से कहाँ घसीट ले जाते हैं, बचो इनसे | 

    अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ  साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें  नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो  Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें

    फीडबैक या प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, इस फार्म को भर सकते हैं

शुभकामनाएं 

Read More