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कैटेगरी- सीधे सीधे के अधीन लेखों का एक परिचय और रूप रेखा

इस कैटेगरी के अधीन लिखे जाने वाले लेख निम्न शर्तें पूरी करेंगे ऐसा प्रयास रहेगा 

1. कभी कभी कम वक्त में और कम शब्दों में कोई बात पहुंचानी हो तो उसे सीधे सीधे ज्यों को त्यों लिख दिया जाएगा माने उसमे ज्यादा समझाने का प्रयास कर पाने का समय नहीं होने के चलते सीधी बात या सवाल होगा, जबकी उस पर चिंतन मनन और समझ पाने की गहराई पाठक पर निर्भर होगी |

2. अमूमन ऐसा होता है कि कोई जरुरी बात या सवाल जो समाज के लिए जरुरी होता है लेकिन उसे साहित्यिक और गहरे तरीके से व्यक्त करने के लिए मेरे जैसे नए लेखकों के पास शब्द नहीं मिलते लेकिन क्योंकि वो सवाल बहुत जरुरी है तो उसे ज्यों का त्यों बिना किसी डिटेलिंग के ही साझा कर दिया जाता है, अजी डिटेलिंग और बैकग्राउंड इतना जरुरी होता है कि इनके बिना कुछ पाठक लेख को समझ ही नहीं पाते और लेख का लाभ उन्हें नहीं मिल पाता और लेखक के प्रयास की दक्षता घट जाती है, बहरहाल समय की कमी और मामले की प्रासंगिकता देखते हुए उसे साझा तो करना ही होता है| एक बात और होती है है कि अगर भूमिका ना हो तो पाठक पूरा लेख पढने के लिए उत्साहित ही नहीं हो पाते | बक्योंकि बात रखनी और आगे पहुंचानी जरुरी है क्योंकि "आपकी राय मायने रखती है "

3. इस वेबसाइट से जुड़े कुछ अभ्यर्थी जो लेखन में हाँथ आजमा रहे लेकिन संकोच का सामना करते हैं लिखने में उनके लिए यह तरीका उपयोगी है कि सपाट भाषा में अपने मन की बात बोल दी, सवाल पूछ लिया या जो देखा सुना या महसूस किया उस अनुभव को सपाट भाषा में व्यक्त कर दिया, कम से कम शुरुआत तो हुयी अन्यथा बढ़िया लेखन से शुरुआत के इंतज़ार में लेखन ही शुरू नहीं किया |

आशा करता हूँ की यह लेख सही परिप्रेक्ष्य देगा |

शुभकामनाएं  

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नन्ही चौपाल : एक प्रयास बाल निर्माण से राष्ट्र निर्माण का

अपने बेटे के एड्मिशन के लिए चुना पिथौरागढ़ की वादियों मे एक सुंदर स्कूल जी हाँ सुन्दर इसलिए ताकि स्कूल भेजने के लिए बच्चे को मनाना ना पड़े, अंदर प्रवेश करते ही सोने पर सुहागा वाली बात हो गयी, प्रधानाचार्य महोदया के कार्यालय के सामने ही बच्चों के लिए एक  आकर्षक और उपयोगी किताबों की सुंदर सी लाइब्रेरी देखी, और उसमे दिखी “नन्ही चौपाल” की एक पत्रिका, जी हाँ वही “नन्ही चौपाल” जिस पर ये लेख है |

फिर क्या था प्रवेश की औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद प्रिंसिपल मैम से “नन्ही चौपाल” पत्रिका की एक प्रति मांग ली घर पर पढने के लिए, मैम को पत्रिका में मेरी रूचि ने प्रभावित किया और उन्होंने साथ में एक और प्यारी और छोटी सी बुकलेट दे दी, नाम था जिसका “धूप का संदूक ” जिसके लेखक हैं बच्चों की आवाज को मंच देने वाले आदरणीय विप्लव भट्ट सर |

फिर क्या ! काम शुरू हुआ पत्रिकाओं को पढने और उनके विश्लेषण का और जो कुछ मिला उसका निचोड़ कह लीजिये या सार कह लीजिये आपके सामने है :

  • यह बाल पत्रिका इस मायने में बहुत खास निकली कि इसके संपादक आदरणीय विप्लव भट्ट सर स्वयं ही नन्ही चौपाल नामक संस्था के संचालक हैं और विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से अपनी पत्रिका में वर्णित कई बातों का प्रत्यक्ष अनुभव करवाते हैं बच्चों को |

इसकी बानगी से पहले भट्ट सर का विज़न देख लें :

“बच्चो की कल्पनाओ, जिज्ञासाओं और
सीखने की ललक को एक नया आकाश
देने वाले विप्लव भट्ट  एक बहुआयामी
कलाकार, शिक्षक और बाल-संवेदना के
संवाहक है और कठपुतली, जादू और
रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों
को विज्ञान, गणित व नैतिक शिक्षा से
जोड़ने का अद्भुत कार्य कर रहे है। ”


मेरा मानना है कि राष्ट्र की सेवा के कई तरीके हैं जिनमे

बच्चो की कल्पनाओ, जिज्ञासाओं और

सीखने की ललक को एक नया आकाश

देने के लिए प्रयत्न एक उच्च कोटि की राष्ट्र सेवा है।”


  • ये मेरी आदत रही है कहीं भी अगर कुछ ऐसा देखूं जो जनहित में है, जो जन कल्याण के लिए आगे बढाया जाना चाहिए तो उस कार्य को अपने सीमित शब्दों और सीमित समझ में प्रोत्साहित करने का प्रयास करना अपना धर्म समझता हूँ, इसी आदत के अनुरूप पत्रिका में दिए गए भट्ट सर के मोबाइल नंबर -9456762889 पर एक सन्देश लिख दिया:    
  • “नमस्कार सर, आशा करता हूँ कि आप सकुशल होंगे

आपकी लिखित कृतियों, धूप का संदूक और नन्ही चौपाल प्राप्त हुई।

बच्चों के विकास और भलाई के प्रति आपका समर्पण देख बहुत सुखद अहसास हुआ, आपके इन उन्मुखी और नवाचारी कार्यों के लिए साधुवाद 💐💐

आपके इन कार्यों में मैं अगर कोई सहयोग कर सकूं तो मुझे खुशी होगी।”  


क्या लगता है आपको क्या जवाब आया होगा उनकी तरफ से ?

जवाब नीचे है :

“ आपका हृदय से आभार बच्चों का बहुत ऋण है मेरे जीवन पर अतः बस उनसे ही सीखा हुआ प्रयास कर रहा हूँ

आपका प्रोत्साहन पूंजी है आशा करता हूँ जल्द ही आपसे मुलाक़ात होगी

हार्दिक आभार”

बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए निमित्त कुछ दिनों बाद ही उनका सन्देश प्राप्त होता है कि

“हमारे कार्यक्रमों में शिरकत करें, बच्चों का उत्साहवर्धन करें और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएँ।

हम मानते हैं कि आपके करकमलों से बच्चों का उत्साह और भी दोगुना होगा।”

ये महत्ता है बच्चों के उत्साहवर्धन की |


आईये कुछ प्रश्न और उत्तरों से समझते से “नन्ही चौपाल” के कार्यों और योगदान को, जिनको आगे बढाने और विस्तृत दायरे तक पहुंचाने और अन्य उत्साही लोगों को ऐसे ही नवाचारी प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने को यह लेख लिखा जा रहा है :

लेखक का दृष्टिकोण:

विप्लव भट्ट जी 'नन्ही चौपाल' बाल संगठन के साथ ही बाल पत्रिका व चैनल
के माध्यम से बच्चों की आवाज़ को मंच देते है, वही स्व-निर्मित
शैक्षिक खिलौनों की प्रयोगशाला 
के जरिये बच्चों को किताबो से
परे 
सीखने का अवसर भी प्रदान करते हैं। आपका 'नन्ही चौपाल
'ऑन, व्हील्स' कार्यक्रम दूर-दराज़ के बच्चों तक रचनात्मक ज्ञान
पहुंचाने का, अभिनव प्रयास है।



"हर बच्चे के भीतर छिपा है एक वैज्ञानिक, एक कलाकार,
एक विचारक...। ज़रूरत है तो बस उसे एक चौपाल देने की,
जहां वह स्वयं को खुलकर अभिव्यक्त कर सके।"

- नन्हीं चौपाल


नन्ही चौपाल के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

नन्ही चौपाल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनकी रचनात्मकता, जिज्ञासा और सीखने की ललक को बढ़ावा देना है। इसके लिए वे विभिन्न गतिविधियों, जैसे कठपुतलीजादू और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को विज्ञानगणित और नैतिक शिक्षा से जोड़ते हैं। इसके अतिरिक्त, नन्ही चौपाल बच्चों को अपनी बात कहने और व्यक्त करने के लिए मंच भी प्रदान करता है।


विप्लव भट्ट बच्चों के लिए किस प्रकार के अभिनव प्रयास करते हैं?
विप्लव  भट्ट बच्चों के लिए कई अभिनव प्रयास करते हैं। वे बाल संगठन के साथ बाल पत्रिका और चैनल के माध्यम से बच्चों को अपनी आवाज देने का मंच प्रदान करते हैं। स्व-निर्मित शैक्षिक खिलौनों की प्रयोगशाला के माध्यम से बच्चों को किताबों से परे सीखने का अवसर प्रदान करते हैं। इसके अलावा, 'नन्ही चौपाल 'ऑन, व्हील्स' कार्यक्रम के माध्यम से दूर-दराज के बच्चों तक रचनात्मक ज्ञान पहुंचाने का प्रयास करते हैं।


विप्लव भट्ट बच्चों के जीवन में क्या महत्व रखते हैं?
विप्लव भट्ट बच्चों के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे बच्चों को उनकी रचनात्मकता को विकसित करनेसीखने के लिए प्रेरित करने और विज्ञानगणितऔर नैतिकता के मूल्यों को समझने में मदद करते हैं। वे बच्चों को अपनी बात रखने और खुद को व्यक्त करने के लिए एक मंच भी प्रदान करते हैं, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है।


आप 'नन्ही चौपाल' के कार्यक्रमों के बारे मे जानने के लिए, सीखने के लिए और अन्य संबन्धित संपर्क के लिए उनकी पत्रिका मे दिये गए निम्नलिखित मोबाइल नंबर और ईमेल  आई डी से संपर्क साध सकते हैं – मो- 9456762889

nanhichaupal@gmail.com

अगर आप भी अपने क्षेत्र मे ऐसा ही कुछ करना चाहते हैं तो आप इनके यू-ट्यूब चैनल के साथ इनकी पत्रिकाओं से काफी कुछ सीख सकते हैं |

सन्दर्भ के लिए इनके यू-ट्यूब चैनल का लिंक यहाँ दिया जा रहा है और इनकी पत्रिका नन्ही चौपाल के एक अंक से कुछ छवियाँ संलग्न हैं ताकि इस नेक काम को और उसके लिए अपनाये गए अभिनव तरीके को बेहतर तरीके से समझा जा सके |

https://youtu.be/YTyv4fdfcmU?si=VJ6n1vfA0-KUAOph

आइये अब बात करते हैं विस्तृत तरीके से उनसे उन सूक्ष्म सकारात्मक परिवर्तनों पर पर जो नन्ही चौपाल के क्रियाकलापों से बच्चों मे लाये जा रहे हैं और योगदान सुनिश्चित कर रहे हैं राष्ट्र निर्माण मे |

जहाँ तक मैंने देखा, पढ़ा, समझा और महसूस किया है (अपने बचपन को याद करते हुए)

बच्चों के लिए शारीरिक विकास के लिए स्वास्थ्यवर्धक भोजन, खेल-कूद, व्यायाम और अच्छी नींद जरुरी होती है वहीँ उनके मानसिक विकास या जीवन/दुनिया/स्वयं को लेकर सही नजरिये का विकास हो या उनकी मानसिक, विश्लेषणात्मक, तार्किक क्षमताओं के विकास की बात हो या फिर उनके भावनात्मक विकास या फिर उन्हें एक बेहतर इंसान बनाने के लिए जरुरी मानवीय गुणों के लिए उनकी समझ पर काम करना हो तो हमें कई स्तर और कई परिप्रेक्ष्य में काम करना होता है, जिस पर हम आगे के लेख में बात करेंगे |

यहाँ पर ऐसे ही कुछ गुणों की सूची दी जा रही है जिन्हें विकसित करने के प्रयास के रूप मे विस्तृत प्रक्रिया अगले लेख में साझा करायी जाएगी, सन्दर्भ के लिए आप इनके यू-ट्यूब चैनल पर विजिट कर सकते हैं, उदाहरण के लिए खेल भावना (Sport’s Spirit) से बच्चे में हार जीत में एक सामान रहने और अगली बार बेहतर करने तक धैर्य आ जाता है इसके लिए हम बच्चों को खेलने के लिए पर्याप्त समय, स्थान और अन्य संसाधन की व्यवस्था करके ये सुनिश्चित कर सकते हैं, दूसरा गुण है वैज्ञानिक स्वाभाव (Scientific Temperament) जिससे तात्पर्य है कि बच्चे द्वारा चीज़ों के कार्य करने के पीछे वैज्ञानिक और तार्किक कारण ढूँढना, कार्य-कारण सिद्धांत जिसे हम वैज्ञानिक प्रयोग, विज्ञान प्रदर्शनी  या विज्ञान केंद्र के  भ्रमण से सुनिश्चित कर सकते हैं, अन्य के लिए जानकारी अगले लेख में |

सूची –

क्रम सं

गुण/उद्देश्य

1

खेल भावना

(Sport’sSpirit)

2

वैज्ञानिक स्वभाव (scientific temperament)

3

संवेदनशीलता

4

साक्षरता

5

विश्लेषण क्षमता

6

मदद की भावना

7

साझा करने की भावना

8

उत्कृष्टता की चाह

9

आत्मनिर्भर बन्ने की तमन्ना

10

खुद को व्यक्त करने की क्षमता और ललक

11

साहित्य में रुझान

12

जिज्ञासा

13

सीखते रहने की चाह

14

नवाचार

15

शिष्टाचार

16

अनुशासन

17

प्रबंधन और प्रशासन की क्षमता – मूलभूत

18

सामना करने का आत्मविश्वास और दृढ़ता

19

इमानदारी

20

सच्चाई

21

प्रतिबद्धता

22

पारस्परिक सम्मान

23

लोगों को अवसर देने और साथ लेकर चलने की भावना

24

लोगों का मनोबल बढ़ाने की चाह

25

वाक् कौशल

26

बहादुर, साहसी

27

प्रेमपूर्ण

28

वर्तमान का उपयोग

29

सतर्क रहना

30

अपने कर्तव्यों कि पहचान

31

व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान

32

गोपनीयता का सम्मान

33

विनम्रता

34

समय की मांग के अनुसार चीजों को छोड़ पाने की क्षमता

35

निष्पक्षता 

36

नए या कई काम देखकर घबराएँ न ऐसी कबिलियत

37

ज़िम्मेदारी उठाने की इच्छा

38

भीड़ से आगे खड़े होने का साहस

39

नए लोगों के सामने खुद को व्यक्त करने मे संकोच न करें ऐसा गुण

40

मजबूत शरीर कि चाह के लिए अनुशासन और व्यायाम

41

पर्यावरण को लेकर जागरूक

42

नेतृत्व क्षमता

43

समन्वय क्षमता

44

कला की समझ

45

रचनात्मकता

कई बातें होती हैं जिन्हे बच्चों मे विकसित करने के लिए अभ्यास और उचित माहौल देने की जरूरत होती है, जैसे MIHU (May I Help you) कार्मिक गगनदीप कौर जी इस बात पर ज़ोर देती हैं कि "अगर बच्चों को ज़िम्मेदार बनाना है -आपको बच्चे को शुरू से ही उसकी उम्र के हिसाब से छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देना शुरू करना चाहिए। उदाहरण के लिए, उन्हें अपने खिलौने खुद समेटना सिखाएं- खेलने के बाद उन्हें उनकी जगह पर रखने के लिए प्रेरित करें,"

इसी तरह कार्यशाला मे बच्चों को छोटी छोटी ज़िम्मेदारी देकर, उनके पूरी होने पर उन्हे पुरस्कार देकर उनमे ज़िम्मेदारी उठाने कि इच्छा पैदा कि जा सकती है |


ऐसे ही इतिहास मे परास्नातक और उदीयमान कवयित्री सौम्या जी इस बात पर ज़ोर देती हैं कि

"बच्चों मे जो गुण विकसित करने हों माता पिता भी पहले वो गुण खुद मे लाएँ, माने अगर वो चाहते हैं कि बच्चे झूठ न बोलें और अपने वादे पूरे करें तो उन्हे भी यही बात आदत मे लानी होगी और अगर वो चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ने मे मन लगाएँ तो उन्हे भी नियमित पढ़ना होगा बच्चों के सामने फिर चाहे उन्हे कोई परीक्षा देनी हो या न देनी हो"

 

माता-पिता बच्चों के साथ संवाद करने के लिए निम्नलिखित तरीकों का उपयोग कर सकते हैं:

ध्यान से सुनें: बच्चों को अपनी बातें कहने दें और उनकी बातों को ध्यान से सुनें। उनकी बातों को बीच में न काटें और उन्हें अपनी बात पूरी करने का मौका दें

खुले प्रश्न पूछें: ऐसे प्रश्न पूछें जो बच्चों को सोचने और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें। उदाहरण के लिए, "आज स्कूल में आपका दिन कैसा रहा?" या "आपको सबसे ज़्यादा मज़ा किस चीज़ में आया?"

अपनी भावनाओं को व्यक्त करें: बच्चों को बताएं कि आप कैसा महसूस करते हैं। इससे वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अधिक सहज महसूस करेंगे।

"इससे पहले कि बच्चों को महंगी चीजों मे खुशी ढूँढने कि आदत लगे उन्हे रचनात्मक कार्यों मे रुझान दिलवाकर आप उनके जीवन मे पैसे के अति महत्व को कम कर सकते हैं |"


इसी तर्ज पर स्कूल और कार्यशालाओं मे विभिन्न क्रियाकलापों से विभिन्न गुण बच्चों मे अभ्यास से विकसित किए जा सकते हैं और नन्ही चौपाल सरीखे मंच जहां बच्चे साप्ताहिक या किसी अन्य अंतराल पर इकट्ठे होकर सामूहिक रूप से एक दूसरे से प्रेरित होकर, एक दूसरे को देखते हुये अभ्यास से बहुत कुछ अच्छा सीख सकते हैं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सहयोग कि भावना आदि गुण ल सकते हैं जो उनके जीवन को चेतना के उच्चतर स्तर पर ले जा सकते हैं |

 

इस सम्बन्ध में अगला लेख अन्य गुणो को विकसित करने के प्रयास के रूप मे क्रियाकलापों की विस्तृत परिचर्चा के साथ जल्द मिलेगा |

 

धन्यवाद और शुभकामनाएं

-लेखक

 

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भारत और विश्व के महान व्यक्तित्व -2

बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |

अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |

स्वयं भी पढ़ें और बच्चों के साथ प्रेरणादायक प्रसंग साझा करें |

1

डॉ राजेंद्र प्रसाद - भारत के प्रथम राष्ट्रपति

2

गणेश शंकर विद्यार्थी - त्याग और बलिदान के आराधक

3

सेठ जमनलाल बजाज-एक और भामाशाह

4

कार्ल मार्क्स - दास कैपिटल के लेखक और प्रतिनिधित्व के हिमायती 

5

राष्ट्रमाता कस्तूरबा गांधी - भारतीय नारियों के लिए आदर्श 

6

महावीर स्वामी- अहिंसा और अपरिग्रह के प्रतीक (जैन सिद्धांत )

7

प्रफुल्ल चंद्र राय- विद्या और पदवी लोक कल्याण के उद्देश्य के लिए 

8

जगद्गुरु शंकराचार्य- अपनी माँ से कहते हैं सैकडो, लाखों माताओं की रक्षा, बालकों को अज्ञान और आडंबर के महापाप से बचाने के लिए यदि तुझे अपने बेटे का बलिदान करना पड़े, तो क्या तुझे प्रसन्नता नहीं होगी ?

9

स्वामी दयानंद सरस्वती - आर्य समाज की स्थापना 

10

महात्मा बुद्ध - बौद्ध धर्म की स्थापना - अप्पो दीपो भव

11

रानी लक्ष्मी बाई - आदर्श वीरांगना

12

बहन निवेदिता - भारतीय संस्कृति की अनन्य आराधिका

13

गुरुनानकदेव - व्यवहारिक अध्यात्मवाद, एक महान समाज सुधारक

14

स्वामी रामतीर्थ - व्यावहारिक वेदांत के प्रचारक, त्याग और तपस्या का विद्यार्थी जीवन, परोपकार की सक्रिय साधना

15

महायोगी अरविंद - नव जागरण के देवदूत

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इन जीवनियों को आप किफायती लागत में गायत्री परिवार की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं |

ऐसी ही किताबों के लिए लिंक

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चुम्बकत्व से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों में खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1. चुंबकीय द्विध्रुव का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण M = m × 2I द्वारा दिया जाता है, जहाँ m .........................है और 2I दक्षिण से उत्तर की ओर निर्देशित द्विध्रुव लंबाई है।
2. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ- ये काल्पनिक रेखाएँ हैं जो चुंबक के अंदर और उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का चित्रात्मक
प्रतिनिधित्व
करती हैं। उनके गुण नीचे दिए गए हैं:

(i) ये रेखाएँ निरंतर ....................लूप बनाती हैं।

(ii) क्षेत्र रेखा की स्पर्शरेखा उस बिंदु पर क्षेत्र की ............................बताती है।

(iii) रेखाओं का घनत्व जितना अधिक होगा, चुंबकीय क्षेत्र उतना ही ......................होगा।
(iv) ये रेखाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेद ..................करती हैं।


3. द्विध्रुव के ध्रुवों के बीच चुंबकीय क्षेत्र की दिशा चुंबकीय आघूर्ण (दक्षिण से उत्तर) के ....................दिशा में होती है, जबकि धारा लूप के अंदर यह चुंबकीय आघूर्ण की ...................में होती है।
4. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में एक छड़ चुंबक पर बल आघूर्ण …………………………….. होता है।
5. चुंबकीय क्षेत्र में एक चुंबकीय द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा U = – MB cos θ = – M . B द्वारा दी जाती है, जहाँ θ, ...................................है।
6. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में द्विध्रुव को θ1 से θ2 तक घुमाने में किया गया कार्य W = x (cos θ1 – cos θ2) द्वारा दिया जाता है यहाँ x ..................है |
7. धारा लूप एक ...................................................की तरह व्यवहार करता है जिसका द्विध्रुव आघूर्ण M=IA द्वारा दिया जाता है।
8. चुंबकीय आघूर्ण का SI मात्रक ........................है।
9.एक परिक्रमणशील इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण ........................... द्वारा दिया जाता है। जहाँ v, r त्रिज्या के एक वृत्ताकार
पथ पर इलेक्ट्रॉन की गति है। L कोणीय संवेग है|
10.छड़ चुंबक एक समतुल्य ....................के रूप में कार्य करता है।
11.चुंबकत्व और गॉस का नियम-  किसी भी बंद सतह से गुजरने वाला शुद्ध चुंबकीय फ्लक्स (ФB) हमेशा ..................होता है।
12.चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण की SI इकाई A-m^2 या J/T है। यह एक .......................राशि है और इसकी दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव
की ओर होती है।

उत्तर : 

1. ध्रुव शक्ति 2.बंद, दिशा, अधिक प्रबल , नहीं 3. विपरीत, दिशा 4.MB Sin θ 5. M और B के बीच का कोण 6. MB 7.चुंबकीय द्विध्रुव 8.am^2 9.L = mvr 10.परिनालिका 11.शून्य 12.सदिश

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जीवन एक नदी है- सौम्या गुप्ता

जीवन एक नदी है,

इसको तुम बहने दो,

मत पकड़ो इसको मुट्ठी में,

स्वच्छंद हवा सा बहने दो।

 

नदियों की सुन्दर कल-कल हो,

ऊंचे से गिरता निर्झर हो,

रास्तें हो चाहे कंकटाकीर्ण,

जो कहता है ये कहने दो।

 

ये सोचो मत कल क्या होगा,

जो कल था वो था अच्छा,

या जो आएगा वो अच्छा होगा,

तुम आज से करके दोस्ती,

प्यारी राहों को चलने दो।

 

माना मंजिलें अभी मिली नहीं है,

हो हर पल सुकून ये जरूरी नहीं है,

पर कुछ क्षण तो खुद को ठहरने दो।

 

ये जीवन नदी है बहने दो,

जो कहता है ये कहने दो,

आज को बेहतर करो 

और खुद को खुलकर जीने दो।

 

घूमो- टहलो दुनिया देखो,

जीवन को तुम बहने दो,

 

दौड़ो- भागो मजबूत बनो,

पढ़ो लिखो और समझदार बनो,

व्यक्त करो दैवीयता को, 

और जीवन को बहने दो।

 

-सौम्या गुप्ता

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश 

सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |

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युवाओं द्वारा आत्महत्या ! एक पड़ताल, एक नजरिया

अभी हाल ही में अपने देश के एक विश्वविद्यालय से दुखी करने वाली खबर आई कि इंजीनियरिंग के पहले वर्ष के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली और तथाकथित रूप से उसने अपने स्यूसाइड नोट में इसका कारण अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई के चलते आने वाली दिक्कतों को बताया!

युवा और पढ़ाई, ऐसी ही कुछ खबरें राजस्थान के कोटा से भी आयीं थी कुछ वक़्त पहले कि वहाँ अध्ययनरत कुछ बच्चे पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और सामाजिक दबाव के चलते अवसाद का शिकार हुये और उनमे से कुछ ने आत्महत्या जैसे दुखद कदम उठा लिए |

इन दुखद खबरों के बीच कुछ सवाल हैं, जिन पर मेरी नजर में विचार करना जरूरी हो जाता है हर उस जिम्मेदार इंसान के लिए जो या तो अभिभावक है, या इस देश के भविष्य की चिंता करने वाला नागरिक या खुद कोई युवा, कोई विद्यार्थी |

  • जीवन की असीम संभावनाओं के बावजूद युवा आत्महत्या जैसे कदम क्यों उठा ले रहे?

उन्हे अपने माता पिता और प्रियजनों की इतनी चिंता तो होती है कि स्यूसाइड नोट छोड़ जाते हैं लेकिन खुद के जीवन से इतना निराश क्यों हो जाते हैं ?

कहीं ऐसा तो नहीं कि दुनिया को इतनी ज्यादा अहमियत दे देते हैं कि उसका सामना नहीं कर पाते ! और स्वयं कि असीम संभावना को भूल जीवन को खत्म कर लेते हैं |

एक चुना हुआ काम अगर नहीं हो पा रहा है तो उसके लिए थोड़ा और समय लिया जा सकता है या फिर उसे छोड़कर दूसरा मुफीद काम चुना जा सकता है जो अपनी क्षमताओं में हो, जिसमे मन लगता हो और इतना मन लगता हो कि कम कमाई मे भी उस काम को करने को तैयार हो जाए मन, कोई ऐसा काम जिससे हम समाज के दुखी , जरूरतमंद के लिए कुछ अच्छा काम कर सकते हैं, लेकिन जीवन खत्म कर सारी संभावनाओं को मार देना कहीं से भी बुद्धिमत्तापूर्ण नहीं |

  • लोगों के ताने हमें क्यों परेशान करते हैं ?

कहीं ऐसा तो नहीं कि हमने अपनी आज़ादी को चाहने वाली चेतना के बजाय लोगों द्वारा हमे दिये गए सर्टिफिकेट को ज्यादा मान दे दिया है ! हमारे उपनिषद और आध्यात्मिक साहित्य हमसे कहते हैं कि जीवन का मुख्य उद्देश्य है डर, लालच और मोह से मुक्ति है  लेकिन ये क्या हमने मुक्ति कि तरफ बढ्ने के बजाय खुद को और ज्यादा बांध लिया लोगों कि हमसे अपेक्षाओं से और लोगों को अधिकार दे दिया कि वो हमारा आंकलन करें सतही चीजों पर !


किसी भी इंसान का आंकलन केवल एक बात पर हो कि उसके जीवन मे सच्चाई का क्या स्थान है, रही बात परीक्षा मे परिणाम कि तो उसमे ये हमारा व्यक्तिगत निर्णय होना चाहिए कि हम अपनी जीविका ( जो आत्मनिर्भरता और उत्कृष्टता का साधन है ) के लिए कौन सा काम चुनना चाहते हैं, इसमे ये नहीं होना चाहिए कि दुनिया वाले ज्यादा मान किस काम को देते हैं, दुनिया को ज्यादा मान देने से बचो,

दुनिया से सम्मान मांगने के बजाय देखो कि आपका काम क्या आपको उत्कृष्टता कि तरफ बढ़ा पा रहा है, क्या उसमे सच्चाई है ?, क्या उसमे किसी का शोषण तो नहीं ?

इस बड़ी सी दुनिया मे हर तरह के लोग हैं, बाहरी दिखावा देख प्रभावित होने वाले (मोटी बुद्धि के लोग) और आपके काम की उत्कृष्टता और आपके जीवन मे सच्चाई की स्थान देखने वाले गहरी दृष्टि के लोग भी, इसीलिए काम ऐसा चुनिये जिसमे डूबने का दिल करे, जिसे आप कम पैसे या बिना पैसे मिले भी कर सको फिर फर्क ही नहीं पड़ता कि दुनिया वाले तारीफ कर रहे या नहीं, अगर आपका काम वाकई दुनिया के कुछ लोगों के भी काम का है तो आप न भूखे रहोगे और नहीं गुमनाम, काम मे मज़ा आपको आ ही रही, बाकी रही बात अन्य जरूरतों कि तो वो भी पूरी ही जानी है, पहली जरूरत तो उत्कृष्टता और आज़ादी ही है, रोटी कि व्यवस्था हो जाती है अगर आप वो काम कर रहे जो दुनिया के मतलब  का है, बाकी उस काम को आप कितना महत्व दिलवा पाते हो ये भी आपकी काबिलियत है |


"पेशे से बैंककर्मी अंशिङ्का शर्मा जी कहती हैं कि जीवन आपका है इसके इन-चार्ज आप खुद हो, इसे एक उपयोगी काम मे लगाकर खुद को उत्कृष्टता और आत्मनिर्भरता की मंजिल तक ले जाने का जिम्मा आपका है, लोगों के अनावश्यक सवालों के जवाब देने कि जरूरत नहीं, जरूरत है होश मे काम चुनकर उसमे सही मेहनत करने की |"

-----------------अंशिङ्का शर्मा जी की  शैक्षिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग की है और वह पेशे से बैंककर्मी हैं |


 

  • क्या अँग्रेजी वाकई बहुत बड़ी दिक्कत है ?

नहीं, बस जरूरत है इसे समय देकर सीखने की, मेहनत करने की |

अमूमन ऐसा देखा गया है कि बारहवीं तक हिन्दी या अन्य माध्यम के जो बच्चे बारहवीं के बाद अँग्रेजी माध्यम वाले कोर्स मे दाखिला लेते ही अँग्रेजी से आतंकित हो जाते हैं उनकी अँग्रेजी और उस विषय दोनों की समझ उस स्तर कि नहीं होती कि वह विषय वो अँग्रेजी मे समझ सकें इसका एक उपाय ये हो सकता है कि अगर ऐसे बच्चे बारहवीं के बाद अँग्रेजी माध्यम मे पढ़ाई को इच्छुक हैं तो पहले ही अपनी अँग्रेजी पर पकड़ को शॉर्ट स्टोरीज की किताब से और उस विषय की महत्वपूर्ण परिभाषाओं और शब्दों का अँग्रेजी रूपान्तरण साथ मे ही मजबूत करें ताकि बारहवीं  के बाद अचानक बोझ न बने और इसके बाद भी अगर कक्षा मे दिक्कत आए तो अपने शिक्षक को अपनी दिक्कत से अवगत कराएं और उनसे मदद मांगे और शिक्षक भी संवेदनशीलता के साथ इस देश के कर्णधार हमारे युवाओं की दिक्कत को समझते हुये उचित व्यवस्था और उपाय करें, लेकिन किसी भी हालत अँग्रेजी या कोई भी विषय न आने पर खुद को हीन न माने, मै फिर इस बात को दोहराता हूँ कि आपकी महत्ता आपकी विषय विशेषज्ञता से नहीं आपके जीवन मे सच्चाई और आपकी आत्मनिर्भरता से होनी है इसीलिए किसी को अधिकार न दें आपको नीचा या इंफीरियर महसूस करने का जब तक आपके जीवन मे सच्चाई और आत्मनिर्भरता है आप ठसक से सीना तानकर चलिये, अपने पैरों पर खड़े हो सकें इसके लिए कोई काम सीखें, कोई ज्ञान हंसिल करें, परंपरागत या गैर परंपरागत इस नेक काम के लिए किसी कि मदद लेनी पड़े तो संकोच न करें, माता-पिता भी बच्चों को ज्ञानवान और काबिल बनाने के लिए पूरे प्रयत्न करें लेकिन दबाव न बनाए बच्चे पर कोई ऐसा कोर्स करने पर जिसमे उसे रुचि न हो, जो कुछ अभिभावक जानते हैं वो बच्चे को जरूर बताएं, फायदे नुकसान, तथ्यों के साथ और इस तरह मदद करें उसकी सही डिसीजन लेने मे और रखेँ गुंजाइश इस बात की कि उनका बच्चा अपनी असहजता पर खुलकर बोल सके,

ऐसा माहौल बिलकुल न बनाएँ कि उसे अपना डिस कम्फर्ट व्यक्त करने मे संकोच हो, बच्चे को बोल दें कि अपना डिस कम्फर्ट या असहजता व्यक्त करना उसका अधिकार है |

“हमें लोगों की नजर में नहीं स्वयं कि नज़र मे ऊंचा उठने की जरूरत है सच्चाई और एक सीमा के बाद के आत्मनिर्भरता लाकर “

“लोग तो अपनी जरूरत और मूड के हिसाब से मान देते हैं ऐसे मान को मान नहीं भी दोगे तो चलेगा लेकिन जीवन मे ईमानदारी रखना, न स्वयं से और न ही दूसरों से कोई झूठ, सच बोलिए चीजों को बेहतर व्यक्त करना सीखिये अभ्यास और विश्लेषण से |”

  • क्या हम जानते भी हैं खुद को ?

हम सबके भीतर दिव्यता है अपने काम मे उत्कृष्टता लाकर उसे मैनीफेस्ट कीजिये, “जो आनंद काम को बेहतर तरीके से करने, और तकलीफ मे या वाकई के जरूरतमंद जीव की मदद मे है वो बड़े बड़े मनोरंजन मे नहीं |”

 

“जो एडवैंचर सच्चाई के लिए काम करने मे हैं वो बड़े बड़े एडवैंचर गेम्स मे नहीं |”

 

  • क्या हम बच्चों को शुरूआत से ऐसा माहौल और समझ दे पा रहे हैं जिससे कि अफसोस करने की स्थितियां कम से कम बने

जीवन मे अफसोस कि सिचुएशन से बचा जा सकता है पहला तो चीजों को गहराई मे समझ कर और खुद के लिए कुछ भी चुनने से पहले दूसरों की नकल करने के बजाय पहले खुद को फिर खुद कि असली जरूरतों को जानकार और निर्णय के आधार मे सच्चाई को रखकर नकि कोई डर या लालच को रखकर |


जब जरूरत हो कोई इंसान चुनने कि तब उस इंसान से जीवन कि गहराई पर बात कर लें, अगर उस इंसान मे जीवन को गहराई से समझने का रुझान होगा तो वो आपके साथ रिश्ते मे भी गहराई ल पाएगा/पाएगी |


- लवकुश कुमार, भौतिकी मे परास्नातक हैं और सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन अपना दायित्व समझते हैं और दृढ़ विश्वास रखते हैं कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं :-  

 

युवा आत्महत्या क्यों करते है? इस पर सौम्या जी के विचार और आबजरवेसन इस विषय पर और गहराई देने वाले हैं :

उनके शब्दों मे :

  • मुझे इसका एक कारण, जो बहुत बड़ा कारण लगता है वो है, 'पैरेंटिंग' । क्योंकि बच्चों के दिमाग में क्या जा रहा है और इस समाज को वो किस नजरिए से देखते है वो बहुत हद तक परवरिश पर निर्भर करता है।

 

  • दूसरा प्रमुख कारण है हमारे संस्कार या Value System, आज अगर देखा जाए तो एकल परिवार है, इसीलिए जो नैतिक मूल्यों को और समझ को परिपक्व करने वाली हमारे सच्चे आदर्शों की कहानियाँ उन तक पहले आसानी से  पहुँच सकती थी उनके लिए हमे अलग से प्रयास करना होगा। आज के समय मे जब माता-पिता दोनों ही प्रत्यक्ष रूप मे राष्ट्रनिर्माण मे योगदान दे रहें है, इस परिस्थिति मे एक और परीक्षा है माता पिता के सामने  कि अपनी व्यावसायिक जीवन के साथ सामंजस्य बिठाते हुये अपने बड़े होते बच्चों के भावनात्मक बदलाव को समुचित तरीके से देख पाएँ और उन्हे सही समझ देकर हर चुनौती के लिए तैयार कर पाएँ, इसके लिए जरूरी है कि वो अपने घरों मे जरूरी साहित्य रखें, माने जीवन और दुनिया की समझ पर आधारित जीवनियाँ, कहानियाँ, निबंध, उपन्यास और कविताओं के साथ आध्यात्मिक निबंध और लेख, जिन्हे  माता पिता पहले खुद पढ़ें और फिर  बच्चों को प्रोत्साहित करें और नियमित इस पर चर्चा करें अगर ऐसा न किया जा सका तो  इस  मोबाइल जैसी शक्ति जो विनाशक भी हो सकती है, उनके हाथ में तो रहेगी लेकिन उसका इस्तेमाल कैसे करना है उसमे क्या देखना है और किस चीज़ से बचना है इसकी समझ उनमे न होगी और फिर उनके भटकने की और अनुचित प्रभावों और प्रचारों मे फँसने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी |

 

तीसरा प्रमुख कारण है बढ़ता भौतिकवाद -> ऐसा देखने को मिला है कि कुछ लोगों द्वारा आज संतोष और शांति जैसे मूल्यों को बहुत नकारात्मकता के साथ लिया जाता है, और ऐसे लोगों को संख्या संक्रामक रोग की तरह तेजी से बढ़ रही है। अगर हम अपनी सच्ची जरूरतों की बात करे तो वो है रोटी, कपड़ा, मकान, ज्ञान ( इंटरनेट/ किताबें )। इन जरूरतों के लिए हमें करोड़ो - लाखों के पैकेज की जरूरत नहीं होती। हाँ लेकिन अगर आप इतने महत्वाकांक्षी हैं कि स्वयं की आज़ादी और जीवन मे सच्चाई से ज्यादा बाहरी सम्मान को ही सब कुछ समझते हैं तो ये अवसाद का एक कारण बन जाता है। अन्यथा भारतीय चेतना हमेशा से ही इतना चाहती है कि आत्मनिर्भता, सचाई और ईमानदारी बनी रहे जीवन मे और हम अच्छे से जीवन यापन कर सके।

“हमें बाजारवाद, वाणिज्यवाद में फंसाया जाता है और दुर्भाग्य ये है कि हम फंसते है।“

  • चौथा कारण अपनी जड़ों से अलग होना - धर्म व अध्यात्म हमारी जड़ें है। अगर हम एक बार सच्चे धर्म व अध्यात्म को समझ ले तो जिंदगी सिर्फ आसान नहीं होगी बल्कि आप लोगों को और उससे पहले स्वयं को जान सकेंगे और इस समाज के लिए कुछ कर सकेंगे जो लोगों के जीवन मे आत्मनिर्भरता और समृद्धता ला सके उन्हे संवेदनशील बना सकें
  •  
  • ऐसा होने का कारण क्या हो सकते हैं ? आइये प्रयास करते हैं जानने का :

आज के संदर्भ में कहीं इसका सबसे बड़ा कारण हमारे हाथ में छोटी सी device मोबाइल का होना और फिर इस पर अत्यधिक निर्भरता तो नहीं ? इसी मोबाइल की वजह से आज न हमारे पास अपने साथ के लोगों के साथ बैठ चर्चा का समय है और न ही चीजों को सूक्ष्मता मे देख पाने का धैर्य, बस लगें हैं सतही मनोरंजन मे और उस ज्ञान को पाने मे जो चार लोगों के बीच शेखी बघारने मे तो काम आ सकता है लेकिन असल जीवन और कार्यक्षेत्र मे किसी काम का नहीं | नतीजा ये कि जब उच्च साहित्य से संपर्क नहीं रहा तो हमारी संवेदनशीलता भी कम हो गयी और हम दूसरों की तकलीफ के प्रति कम संवेदनशील हो गए इसीलिए उन्हे हल करने के प्रयास भी कम हो गए और दूसरों कि तकलीफ कम करके जो आनंद मिलता है उससे भी हम अछूते रह गए, पास क्या रह गया उथला मनोरंजन !

  • आज न जाने कितनी बीमारियाँ हद से ज्यादा स्क्रीन टाइम से हो रही और हम है  कि Reels scrolling मे लगें, ये तक नहीं पता कि हम ढूंढ क्या रहे हैं उनमे, कारण ? जीवन मे उत्कृष्टता कि चाह न रहना इसीलिए काम मे जी न लगना और खुद को शांत करने के लिए सतही मनोरंजन और नशा की शरण लेना
  • इस समस्या का एक हल ये हो सकता है कि युवाओं के महान लोगों कि जीवनियां पढ़वाई जाएँ जिसके दो फायदे होंगे पहला ये कि वो इन महान लोगो की तकलीफ़ों से परिचित होंगे और ये जान पाएंगे कि इनकी तकलीफ़ें कितनी कम या छोटी हैं उन तकलीफ़ों और कठिनाइयों से जो महान लोगों ने झेली |

दूसरा ये कि वो ये जान पाएंगे कि जीवन का असली और टिकाऊ आनंद है अपने काम की उत्कृष्टता और जरूरतमंद लोगों के लिए काम करना है, लोगों का जीवन आसान और सुविधाजनक हो सके इसके लिए काम करने मे, लोगों के जीवन मे गरिमा, बंधुता और आत्मनिर्भरता के लिए काम करने मे है |

 

  • एक बात और जो समझनी बहुत जरूरी है वो है कि आजकल के जीवन में बाजारवाद और वाणिज्यवाद के कई नुकसान हैं:

बाजारवाद और वाणिज्यवाद आजकल के जीवन में कई तरह के नुकसान लाते हैं। ये हमें भौतिक सुखों के पीछे भागने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे हम अपनी असली ज़रूरतों और मूल्यों से दूर हो जाते हैं। अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा और असमानता बढ़ती है, जिससे सामाजिक तनाव और असंतोष पैदा होता है। इसके अलावा, ये हमारी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालते हैं, क्योंकि हम लगातार दूसरों से तुलना करते रहते हैं और तनाव में जीते हैं।


 

  • मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के कुछ अन्य नकारात्मक प्रभाव:

मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग कई नकारात्मक प्रभाव डालता है। यह हमारी नींद को बाधित करता है, जिससे थकान और एकाग्रता की कमी होती है। सोशल मीडिया और अन्य ऐप्स पर लगातार लगे रहने से हमारा ध्यान भटकता है और हम वास्तविक दुनिया से कट जाते हैं। शारीरिक निष्क्रियता और आंखों की समस्याएँ भी बढ़ती हैं। इसके अलावा, मोबाइल फोन की लत हमें सामाजिक रूप से अलग कर सकती है और हमारी अन्य लोगों के साथ तालमेल बैठा पाने कि क्षमता को प्रभावित कर सकती है जिससे तनाव आ सकता है जो हमारे सोंचने समझने की क्षमता ओर नकारात्मक प्रभाव डालता है और हम घातक कदम उठाने कि तरफ बढ़ सकते हैं |


 

  • अपने जीवन में आध्यात्मिकता को उचित महत्व न देना भी ज़्यादातर मानवीय समस्याओं की जड़ है :

आध्यात्मिकता हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह हमें आंतरिक शांति, संतोष और उद्देश्य की भावना प्रदान करती है। यह हमें तनाव और चिंता से दूर रहने में मदद करता है, जिससे हमारी मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। आध्यात्मिकता हमें नैतिक मूल्यों और सही-गलत की समझ देती है, जिससे हम बेहतर इंसान बनते हैं। यह हमें दूसरों के प्रति सहानुभूति और दयालुता विकसित करने में भी मदद करता है, जिससे सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।

  • हम और क्या - क्या कर सकते हैं एक सफल और सार्थक जीवन के लिए ? आइये विचार करते हैं :

आप एक बार अपना सच्चा विश्लेषण कीजिए कि आपके हाथों में मोबाइल है ? या आप मोबाइल के हाथों में है ?आप 24 घंटे के लिए अपना मोवाइल Switch off करके रख दीजिए और उस समय अपने मस्तिष्क पर प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।

दयानंद सरस्वती ने कहा था 'वेदों की और लौटो', आप सीधे वेद नहीं पढ़ पा रहे तो कम से कम अन्य सरलीकृत आध्यात्मिक साहित्य से (गायत्री परिवार वैबसाइट लिंक) अध्यात्म को जान लीजिए। इंटरनेट पर ब्रम्हाकुमारी, गायत्री परिवार जैसे  बहुत से संस्थानों के प्रोग्राम आते है, आप उनसे सीख सकते है।

आप महात्वाकांक्षी बनिए। लेकिन टार्गेट मे इस दुनिया की किसी चीज के बजाय सबसे पहले उत्कृष्टता, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता को रखिए, इतना कर लेने के बाद आपको एहसास हो जाएगा कि दुनिया मे ऐसा बहुत कुछ या कहिए ज़्यादातर चीज़ें ऐसी हैं जिनको टैस्ट करने या हांसिल करने की बिलकुल भी जरूरत नहीं हैं |

“इंसान की ज़्यादातर परेशानियों का कारण ही उन चीजों को चाहना है जिसकी उसे बिलकुल भी जरूरत नहीं है”

 न ही जरूरत से ज्यादा पाने की आशा रखिए। महत्व देना है तो चेतना को दीजिए, शरीर को नहीं। जरूरी नहीं है कि बाजारवाद के नाम पर आपको जो परोसा जाए वो सब आप कंज्यूम ही कर लें |

  • अपनी दृष्टि को विस्तार दीजिए। दुनिया को सिर्फ अपने चश्मे से मत देखिए। अच्छा साहित्य पढ़िये , महान् व्यक्तित्वों के बारे में पढ़िए । अपने से कमतर जीवन जीने वाले लोगों के विषय में सोचिए। उनके लिए कुछ कीजिए। मदद हमेशा धन से नहीं होती। कभी-2 प्यारे-मीठे बोल धन से ज्यादा कारगर होते हैं। पहले खुद से, फिर अपनों से और फिर समाज से आप कुछ अच्छा करने का वादा कीजिए। और इस सच्चे उद्देश्य के लिए लग जाइए।
  •  
  • मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि इस दुनिया का सबसे बड़ा सुख किसी की मदद करके ही मिल सकता है और इससे आप किसी भी अवसाद से पार पा सकते हैं।“
  • प्यारे और मीठे बोल हमें दूसरों के साथ बेहतर संबंध बनाने और सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद करता है।
  • दूसरों की मदद करने से हमें खुशी मिलती है और हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।
  • मेरा मानना है कि हम दूसरों की मदद करके अवसाद से पार पा सकते हैं। दूसरों की मदद करने से हमें सकारात्मक भावनाएं मिलती हैं और हम अपने जीवन में एक उद्देश्य प्राप्त करते हैं, जिससे अवसाद कम होता है।

 

सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ सामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन की आदत भी रखती हैं |




 

इस आशा के साथ कि यह लेख पाठकों को स्पष्टता देगा|

बातों को तर्क और व्यावहारिकता की कसौटी पर परखें और संतुष्ट होने पर ही लागू करें |

शुभकामनाओं के साथ |

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कठिन परिस्थितियों में चीजों की परीक्षा

जैसे कई कड़ियों वाली एक सीकड़ की मजबूती या कमजोरी का एहसास उस वक़्त होता है जब उससे एक वजनदार चीज़ लटकाई जाती है, यहाँ पर एक बात ध्यान देने वाली है कि कोई chain उतनी ही मजबूत मानी जाती है जितनी कि उसकी सबसे कमजोर कड़ी |

इस संसार और तंत्र की व्यवस्था मे जो खामियाँ हैं ये उन लोगों को पहले दिखती हैं जो इनसे दो चार होते होते हैं, या जिनका कठिन समय चल रहा होता है| वहीं जिनका समय सुखद चल रहा होता है उन्हे लगता है कि सब कुछ सही चल रहा है, सब चंगा सी |

उद्दहरण के लिए दहेज व्यवस्था से ऐसे लोगों को बिलकुल भी परहेज नही दिखता जिनके पास खूब पैसा है, इस प्रथा कि मार तो वो झेलता है जिसके पास रोटी कपड़े की ही कमाई बड़ी मुश्किल से हो पाती है, ऐसा इंसान एक तनाव मे रहता है और फिर हम शिकायत करते हैं कि लोग प्रेम से क्यों नहीं बात करते !

पहले तो इंसान ऊपरी मानक यथा, शक्ल, पहनावा और दिखावा देखकर रिश्ता बनाता है, दुख कि घड़ी मे जब साथ नहीं मिलता तो कहता कि लोग बड़े मतलबी हैं लेकिन कम ही हैं वो लोग जो अपनी पसंद के आधार को टटोलते हैं|

एक दूसरे को खुश रखने और रिश्ते को बनाए रखने के लिए लोग खूब एक दूसरे कि हाँ मे हाँ मे मिलाते हैं और गलत बातों का भी समर्थन कर देते हैं और इस आदत को वो समझदारी और आज के समय कि जरूरत बोलते हैं लेकिन जब उन्हे लंबे वक़्त तक कोई झूठ के अंधेरे मे रखे तब उन्हे इस सिस्टम की खामी नज़र आती है और वो कहते हैं की लोग बड़े झूठे हैं ! 

किसी भी समस्या कि सबसे बड़ी मार हमेशा कमजोर तबके के लोगों को ही पड़ती है, जलवायु परिवर्तन के चलते गर्मी का प्रकोप सबसे ज्यादा धूप मे काम करने वाले लोगों को पड़ता है न कि उन्हे जिनके घर भी वातानुकूलित हैं, घर के बाहर कार, कार्यालय और रेस्तरां भी |

 

उद्दहरण बहुत से हैं खुद का अवलोकन करने की जरूरत हैं, खुद पर नज़र रखने की जरूरत है कि हम कहाँ पर झूठ बोल रहे हैं ?

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भारत और विश्व के महान व्यक्तित्व -1

बच्चों को इन महान विभूतियों के बारें में पढ़ायें और उन्हें गुणवान तथा उच्च आदर्शों वाला इंसान बनाये, फिर वो ना छोटी बातों पर परेशान होंगे और ना ही छोटी बातों में फंसेंगे, फिर उनके उद्देश्य भी बड़े होएँगे और उनके काम में उत्कृष्टता दिखेगी और साथ ही वो दूसरों की दिक्कत के प्रति संवेदनशील भी होंगे और परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाकर सही और त्वरित निर्णय ले पाएंगे |

अच्छा हो कि इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकें एक डिस्प्ले रैक में लगा दें बच्चों के अध्ययन कक्ष में |


1. होमी भाभा - नाभिकीय प्रोग्राम 
2. सी. वी. रमन ( रमन इ‌फेक्ट )- नोबेल पुरस्कार 
3. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (मिसाइल मैन)
4. विक्रम साराभाई (अंतरिक्ष वैज्ञानिक)
5. Sardar V. Patel. (freedom fighter)
6. Subhas C. Bose (freedom fighter)
7. Jawahar lal Nehru (freedom fighter)
8. P.C. Ray 
9. श्री विश्वे श्वरैया बृहत भारत के विश्वकर्मा 
10. सेठ जमनालाल बजाज
11. महात्मा गाँधी  (वर्तमान जगत के युग पुरुष )
12.संत विनोबा भावे 
13. ईश्वर चन्द्र विद्यासागर सुधार तथा परोपकार के देवता
14. संत सुकरात (सेवा और सहिष्णुता के आदी) 

15. अब्राहम लिंकन - मानव समानाधिकार के सूत्रधार  

इन जीवनियों को आप किफायती लागत में गायत्री परिवार की वेबसाइट से भी प्राप्त कर सकते हैं |

अब्राहम लिंकन और अन्य के लिए लिंक

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विद्युत विभव से जुड़े हुए कुछ तथ्यों को खाली जगह भरकर याद करने का अभ्यास -1

निम्नलिखित अधूरे वाक्यों की खाली जगह को भरकर इन्हें पूरा करिए और अपनी समझ को अभ्यास से मजबूत करिए :

1. विद्युत क्षेत्र में किसी भी बिंदु पर विद्युत विभव, प्रति इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश को ...................................... से उस बिंदु तक बिना
त्वरण के विद्युत बल के विरुद्ध लाने में किए गए कार्य के बराबर होता है।


2. विद्युत विभव एक अवस्था-निर्भर फलन है अर्थात इसका मान इस बात पर निर्भर करता है कि उस बिन्दु कि ..............क्या है जिस पर हमे विद्युत विभव ज्ञात करना है |


3. विद्युत बल ...............................बल होते हैं। (संरक्षी/असंरक्षी)


4. विद्युत क्षेत्र में दो बिंदुओं के बीच विद्युत विभवांतर (अर्थात विद्युत क्षेत्र में दो बिंदुओं के विद्युत विभवों का अंतर)को एक ...........................धनात्मक परीक्षण आवेश को बिना किसी त्वरण के विद्युत बल के विरुद्ध एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है|


5. चूँकि किसी दिए गए आवेश विन्यास के कारण विद्युत क्षेत्र द्वारा परीक्षण आवेश पर किया गया कार्य पथ से स्वतंत्र
होता है, इसलिए विभवांतर भी किसी भी पथ के लिए ...........................होता है।


6. किसी बिंदु पर धनात्मक आवेश के कारण विभव धनात्मक होता है जबकि ऋणात्मक आवेश के कारण यह....................... होता है।


7. जब किसी धनात्मक आवेश को विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है, तो यह एक बल का अनुभव करता है जो इसे उच्च विभव
वाले बिंदुओं से निम्न विभव वाले बिंदुओं की ओर ले जाता है। दूसरी ओर, एक ऋणात्मक आवेश एक बल का अनुभव
करता है जो इसे ...............विभव से .....................विभव की ओर ले जाता है।


8. विद्युत द्विध्रुव के कारण लंबवत द्विभाजक पर वैद्युत विभव ............................होता है। 


9. वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर ..........................वैद्युत विभव होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है।
10. (i) रेखीय आवेश के कारण समविभव पृष्ठ का आकार ............... होता है। (ii) जबकि बिंदु आवेश के कारण यह ....................होता है।


समविभव पृष्ठ के गुण
11. (a) समविभव पृष्ठ एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करते क्योंकि यह प्रतिच्छेद बिंदु पर विद्युत क्षेत्र E की दो दिशाएँ देता
है जो ............................नहीं है।

(b) समविभव पृष्ठ प्रबल विद्युत क्षेत्र के क्षेत्र में ...............................दूरी पर होते हैं

(c) विद्युत क्षेत्र सदैव समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर ................................होता है तथा उच्च विभव वाले एक समविभव पृष्ठ से निम्न विभव
वाले समविभव पृष्ठ की ओर निर्देशित होता है।

(d) परीक्षण आवेश को समविभव पृष्ठ के एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य ......................होता है।
(e) विद्युत क्षेत्र की दिशा ................विभव से ...................विभव की ओर होती है, अर्थात विभव घटने की दिशा में।


12. विद्युत क्षेत्र उस दिशा में होता है जिस दिशा में विभव सबसे अधिक तेजी से ...................है।

कुछ अन्य तथ्य : 


13. विद्युत क्षेत्र का परिमाण, बिंदु पर समविभव पृष्ठ के अभिलंब प्रति इकाई विस्थापन में विभव के परिमाण में परिवर्तन द्वारा दिया जाता है।


14. स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा स्थिरवैद्युत बल के विरुद्ध किया गया कार्य, स्थितिज ऊर्जा के रूप में संग्रहित हो जाता है। इसे स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। 

15. विद्युत क्षेत्र में एक इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश को एक बंद पथ (closed लूप) पर गति कराने में किया गया कार्य शून्य होता है।
इस प्रकार, स्थिरवैद्युत बल संरक्षी प्रकृति के होते हैं।


16.एकसमान विद्युत क्षेत्र E में एक द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा निम्न प्रकार से दी जाती है: स्थितिज ऊर्जा = -p ECosØ


17. वह प्रक्रिया जिसमें किसी क्षेत्र को किसी विद्युत क्षेत्र से मुक्त (E= 0) बनाना शामिल होता है, इलेक्ट्रोस्टैटिक परिरक्षण  (electrostatic shielding)के रूप में जानी जाती है।

उत्तर : 

1.अनंत     2. स्थिति   3. संरक्षी 4. इकाई 5. समान   6. ऋणात्मक 7. निम्न, उच्च 8. शून्य 9. समान 10.बेलनाकार, गोलाकार    11a.संभव 11b निकट 11c  अभिलंबवत 11d शून्य 11e उच्च, निम्न 12. घटता  

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क्या अध्यात्म में पैसे कमाने की मनाही है?

ऐसा नहीं है, अध्यात्म न तो पैसा कमाने से रोकता है और न ही एक समृद्ध जीवन जीने से।

बल्कि अध्यात्म में तो इंसान एक समृद्ध और संतुलित जीवन के लिए पूरे प्रयत्न करता है।

अध्यात्म तो बस खुद पर नजर रखने को कहता है, होश में आने को कहता है।

अध्यात्म कहता है कि जितना जरूरी पैसा कमाना है उतना ही कमाएं और पैसे कमाने के लिए ऐसे रास्ते अपनाएं जिनसे विश्व व्यवस्था मे लोगों की आज़ादी बनी रहे, किसी का शोषण न हो और किसी के साथ छल न हो, लोग सच्चाई के प्रकाश मे रहें और उन्हे झूठ के अंधेरे मे न रखा जाए उन्हे उथली खुशी न बेंची जाए |

व्यक्ति की गरिमा और बंधुत्व बना रहे और साथ देश और व्यक्ति की स्वतन्त्रता भी |

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