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हर समय, हर काल में कोई न कोई दिक्कत या संघर्ष रहता है, लेकिन अगर वो कोई बहुत बड़ी दुर्घटना न हो तो समय का मलहम उसे भुला देता है और कालांतर मे रह जाती हैं केवल सुखद स्मृतियाँ |
गरिमा सुरक्षित रही तो भूतकाल परेशान नहीं करता, अंत भला तो सब भला |
1.विस्थापन धारा वह धारा है जो उस क्षेत्र में कार्य करती है जिसमें ........................... क्षेत्र समय के साथ बदल
रहे हैं।
2. परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र ............................................... क्षेत्र का स्रोत है।
3. एक विद्युत चुम्बकीय तरंग एक त्वरित या दोलनशील आवेश द्वारा विकीर्ण की गई तरंग होती है
जिसमें परिवर्तनशील चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र का स्रोत होता है और परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत
होता है। इस प्रकार दो क्षेत्र एक दूसरे के स्रोत बन जाते हैं और तरंग दोनों क्षेत्रों के .................................. दिशा में प्रसारित होती है।
4. विद्युत चुम्बकीय तरंगें प्रकृति में अनुप्रस्थ होती हैं, अर्थात विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक दूसरे के ...................................होते हैं और
तरंग प्रसार की दिशा के ........................... होते हैं
5. विद्युत चुम्बकीय तरंगों में ऊर्जा, औसतन विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के बीच .......................रूप से विभाजित होती है।
6. रेखीय संवेग, p= U/c, जहाँ U = विद्युत चुम्बकीय तरंगों द्वारा प्रेषित कुल ऊर्जा और c = ...................................।
7. विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम: आवृत्ति या तरंगदैर्घ्य के आरोही या अवरोही क्रम में विद्युत चुम्बकीय तरंगों के व्यवस्थित
अनुक्रमिक वितरण को विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। इसकी सीमा γ-किरणों से लेकर ............................तरंगों तक होती है।
8. विद्युत चुम्बकीय तरंगों के उपयोग के बारे में प्राथमिक तथ्य
रेडियो तरंगें
(i) रेडियो और टीवी संचार में। (ii) खगोलीय क्षेत्र में।
माइक्रोवेव
(i) राडार संचार में। (ii) आणविक और परमाणु संरचना के विश्लेषण में। (iii) खाना पकाने के उद्देश्य से।
अवरक्त तरंगें
(i) आणविक संरचना जानने में। (ii) टीवीवीसीआर आदि के रिमोट कंट्रोल में।
पराबैंगनी किरणें
(i) बर्गलर अलार्म में प्रयुक्त। (ii) खनिजों में कीटाणुओं को मारने के लिए।
एक्स-रे
(i) चिकित्सा निदान में क्योंकि वे हड्डियों से नहीं बल्कि मांसपेशियों से होकर गुजरती हैं। (ii) धातु उत्पादों में दोष, दरारें आदि का पता लगाने में,
γ-किरणें।
(i) खाद्य संरक्षण के रूप में। (ii) रेडियोथेरेपी में।
उत्तर :
1.विद्युत क्षेत्र 2.चुम्बकीय क्षेत्र 3. लंबवत 4.लंबवत, लंबवत 5. समान 6. विद्युत चुम्बकीय तरंग का वेग 7. रेडियो
1. प्रत्यावर्ती धारा (AC) यह वह धारा है जो परिमाण और .......................................... दोनों में बारी-बारी से और आवधिक रूप से बदलती
रहती है। I = I0 sin ωt या I = I0 cosωt जहाँ, I0 = धारा का ........................ मान या अधिकतम मान है |
2. AC का प्रभावी मान या rms मान इसे एक पूर्ण चक्र में AC उस मान के रूप में परिभाषित किया जाता है जो किसी दिए
गए प्रतिरोधक में उतनी ही ऊष्मा उत्पन्न करेगा जितनी कि एक पूर्ण चक्र के दौरान समान प्रतिरोधक में और समान समय
में ............................................ धारा द्वारा उत्पन्न होती है।
3. धारा के शिखर मान का 70.7% AC का ...................................... मान होता है।
4. AC का औसत या माध्य मान AC के उस मान के रूप में परिभाषित किया जाता है जो अर्ध-चक्र में एक परिपथ में उतनी
ही मात्रा में आवेश भेजेगा जितनी कि समान समय में ............................. धारा द्वारा भेजा जाता है।
5. AC के शिखर मान का.....................................................% AC का औसत या माध्य मान देता है।
6. प्रत्यावर्ती विद्युत वाहक बल या वोल्टेज वह विद्युत वाहक बल है जो परिमाण के साथ-साथ .............................. में भी वैकल्पिक और आवधिक रूप से
बदलता रहता है।
7. प्रेरणिक प्रतिक्रिया- धारा के प्रवाह के लिए ...................................................की विरोधी प्रकृति को प्रेरणिक प्रतिक्रिया कहा जाता है।
8. धारिता प्रतिघात (Xc) प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह के प्रति ................................................. की विरोधी प्रकृति को धारिता प्रतिघात कहते हैं।
9. शक्ति- एक एसी परिपथ में, विद्युत वाहक बल और धारा दोनों समय के संबंध में लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए परिपथ में,
हमें पूर्ण चक्र (T) में ....................................... शक्ति की गणना करनी होती है।
10. शुद्ध प्रेरणिक और शुद्ध धारिता परिपथ में औसत शक्ति खपत ............................... के बराबर होती है क्योंकि ……………………….
11. एक एसी परिपथ में जब औसत शक्ति खपत .................................... होती है, तो धारा को वाटरहित धारा या निष्क्रिय
धारा कहा जाता है।
12. शक्ति गुणांक ……………….. है (प्रतीक )
13. प्रतिबाधा ……….. है (प्रतीक )
14. AC के एक पूर्ण चक्र में, AC का माध्य मान.................................. होगा।
1. दिशा, शिखर 2. दिष्ट 3. rms 4. दिष्ट 5. 63.7% 6. दिशा 7. प्रेरक (coil) 8. संधारित्र 9. औसत 10. शून्य, कालांतर शून्य 11. शून्य
12. Cos ø 13. Z 14. शून्य
A के मौखिक अनुरोध पर आप A के मार्फत (on behalf of A ) B से कोई वादा करते हैं तो कल को A के पीछे हट जाने पर आपकी बात खराब हो सकती है, आपकी छवि खराब हो सकती है B की नजरों में अतः इस जोखिम से बचने के लिए अगर संभव हो तो A और B की आपस में ही बात करा दो।
स्वर्गीय प्रदीप ताऊ जी ( पापा उन्हें पप्पू दादा कहते थे ) पापा की बुआ जी के बड़े बेटे थे |
पापा को वो बहुत स्नेह करते थे इसलिए हर होली उनका हमारे घर आना तय था, क्योंकि वो कभी पीलीभीत तो कभी बरेली पोस्टेड रहे तो त्यौहार में ही लखीमपुर आ पाते थे ( वह एक ग्रामीण बैंक में प्रबंधक थे ) त्यौहार और परिवार का क्या सम्बन्ध होता है यह वो बखूबी जानते थे इसलिए त्यौहार के लिए वो लखीमपुर आते ही थे |
यहाँ उनके बारे में लिखने का कारण उनसे मिलने वाला प्रोत्साहन, स्नेह और रिकग्निशन है :
पापा, उम्र में बड़े और पढ़े लिखे लोगों को ख़ास “अहमियत” देते थे, ये हमें ताऊजी के आने पर भी दिखता था इसिलए मेरी नज़र में भी ताऊ जी की एक अलग ही छवि थी, मेरा बालमन भी उनकी तरह ही पढ़ लिखकर मान-सम्मान पाना चाहता था|
आप लोग इस बात को जरुर महसूस किये होंगे की जब कोई आपसे बड़ा जिसे आप भी बड़ा और खुद से बेहतर मानते हो वो आपकी तारीफ कर दे या आपके काम की तारीफ कर दे तो बहुत अच्छा महसूस होता है और आपका स्वयं पर विश्वास बढ़ जाता है और आप सोंचते हैं कि हाँ "मै सही तरीके से काम कर रहा हूँ और ऐसे ही काम करता रहा तो एक दिन जरूर बेहतर करूँगा " ऐसा ही कुछ उस वक़्त भी हुआ ;
मै उस वक़्त ग्यारहवीं में था और अपने साथियों में ज्यादातर की तरह मै भी आईआईटी से इंजीनियरिंग करने के सपने संजो रहा था, उस वक़्त जब मै ताऊ जी से मिला तो उन्होने उस वक़्त की IITs के बारे मे मुझसे बात की और मेरा उत्साह बढ़ाया कि मै एक साल तैयारी कर बेहतर के लिए प्रयास करूँ, उनका मेरी क्षमताओं मे विश्वास प्रकट करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी, इससे मेरा पढ़ाई मे और ज्यादा मन लग गया क्योंकि अब लग रहा था कि सेलेक्शन पक्का है | हालांकि बाद मे तैयारी के दौरान मैं अपनी समझ के उस गैप को न भर सका जो ग्यारहवीं-बारहवीं के अध्ययन के दौरान रह गया था क्योंकि मेरे लिए उस गैप को एक साल मे भर पाना आसान न था, लेकिन बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा मे मैंने अखिल भारतीय रैंक 46 हांसिल की और वहाँ से मैंने भौतिकी मे बीएससी ( आनर्स ) किया और आगे चलकर आईआईटी मे पढ़ने का सपना भी पूरा किया, जॉइंट एड्मिशन टेस्ट फॉर एमएससी (JAM) मे अखिल भारतीय रैंक 75 हांसिल करके आईआईटी दिल्ली मे प्रवेश लेकर, उस वक़्त भी ताऊ जी का प्रोत्साहन मिला और पिता जी के देहांत के बाद उनकी तरफ से हर संभव मदद कि पेशकश भी, इससे मुझे अपनेपन और अकेला न होने का एहसास मिला |
उन्होने मुझे कई बार अपने पास मिलने के लिए दिल्ली से लौटते वक़्त बरेली बुलाया लेकिन मै व्यस्तता कहिए या फिर अव्यवस्था के चलते उनसे मिल न सका, अगर मिल पाता तो उनके सानिध्य मे काफी कुछ सीख पाता क्योंकि वो अपनी व्यस्तता के बावजूद भी, जो भी उन्हे अप्रोच करता उन्हे समय देते और हर संभव मदद कर जरूरी और तर्कसंगत तथा व्यावहारिक सुझाव/सलाह देते थे |
सरकारी सेवा मे आने के बाद जब मैंने उन्हे बताया कि मुझे कोलकाता क्षेत्र मिला है तो उन्होने एक बात कही थी जो मुझे आज भी याद है और मै उसका अनुसरण करने का पूरा प्रयास भी करता हूँ, वो बात थी कि, “ कहीं भी जाओ वहाँ का जो उपेक्षित तबका है उसे अगर मौका दे सको उनकी अगर तकलीफ को संबोधित कर सको तो कभी अकेले न रहोगे ”
मै अपने सिक्किम टेन्योर के दौरान सोंचा करता था कि जल्द ताऊ जी से मिलने जाऊंगा लेकिन उसी बीच कोविड की लहर ने ताऊ जी को हमसे छीन लिया, कल ताऊ जी की पुण्य तिथि थी, ताऊ जी का शरीर तो नहीं है हमारे बीच लेकिन वो अपनी बातों और एक खुशमिजाज़, उदार और मददगार व्यक्ति की मिसाल के तौर पर हमेशा हमारे बीच रहेगें, काश उनका सानिध्य पाकर मै कुछ और भी सीख पाता |
उनकी छोटी बहन, अंजना बुआ उन्हे याद करती हुयी कहती हैं कि वो उनका ऐसे ख्याल रखते थे जैसे एक जिम्मेदार पिता अपने बच्चों का ख्याल रखता है और छोटे भाई के प्रति जो उनका प्रेम था उसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उनके छोटे भाई सुनील चाचा, अपने बड़े भाई के असमय देहांत पर एक ही बात कहते हैं कि उनकी तो दुनिया ही उजड़ गयी |
कहते हैं न कि कहने से ज्यादा करने का प्रभाव पड़ता है वो मैंने ताऊ जी के घर भी देखा, अपने व्यवहार और जीवन से जो उन्होने छाप छोड़ी वो आज भी आदरणीय ताई जी, दीदी और भैया लोगों के आत्मीय व्यवहार मे दिखती है, ये देख अभी भी लगता है कि ताऊ जी हमारे बीच ही है|
स्वर्गीय ताऊ जी के बारे मे यहाँ लिखने का उद्देश्य उनकी बातों को और उस मिसाल को जिंदा रखना है जो मानवीय सदगुणो मे एक हीरे की तरह हैं जिसने भी ऐसे गुणो को खुद के व्यक्तित्व मे पिरोया वो हमेशा भीड़ से अलग चमका |
उन्ही के प्रयासों के संदर्भ मे एक शेर याद आता है :
माना कि इस जमीं को न गुलज़ार कर सके
कुछ खार कम तो कर गए गुजरे जिधर से हम " खार = काँटा "
विनम्र श्रद्धांजलि
बच्चों को अगर सही समय पर सही आदर्श मिल जाएँ
या कहें तो उनके सामने ऐसे कई नाम हों जिन्होंने अपने काम के दम, और अपने काम की उत्कृष्टता और सार्थकता के चलते नाम कमाया हो या उत्कृष्ट जीवन जिया हो तो हम उन्हे सतही जीवन जीने से बचा सकते हैं |
उपरोक्त के दृष्टिगत कुछ नाम नीचे साझा किए जा रहे हैं :
| क्रम संख्या | नाम | क्षेत्र | कार्य | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|
| 1 | डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम | वैज्ञानिक और भारत के राष्ट्रपति |
भारत के मिसाइल मैन, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, बच्चों के लिए उत्कृष्ट और प्रेरणादायक साहित्य सृजित किया |, धन अर्जन के बजाय लोक सेवा और समाज सेवा को प्राथमिकता दे एक बेहतरीन उदाहरण बने | कार्य स्थल को मंदिर समझते थे |
बचपन से विनम्र पृष्ठभूमि के बावजूद अपनी मेहनत और लगन के दम पर नामचीन वैज्ञानिक और भारत के राष्ट्रपति बने तथा इनकी सेवाओं के लिए इन्हें भारत रत्न दिया गया| 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त भी प्राप्त हुयी | |
| 2 | एडमंड हिलेरी | पर्वतारोही (Mounatineer) | First person alongwith Tenzing norgey to climb Mount Everest, the highest mountain peak in the world | बर्फ से ढकी हुये पहाड़ पर पैदल यात्रा, जहां कोई रास्ते भी नहीं हैं |
| 3 | एलटन जॉन | musician | Started learning piano at the age of just 4 years | इतनी छोटी उम्र मे तो बच्चे बस खेल मे लगे रहते हैं, खेल भी जरूरी है साथ ही किसी क्षेत्र मे उत्कृष्टता के लिए अभ्यास बहुत जरूरी है | |
अवनीश भाई बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में बी.एस.सी. के दौरान मेरे साथी रहे
और आजकल भारत सरकार के एक विभाग में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं |
अवनीश भाई की जिन बातों/ व्यवहार के लिए मै कृतज्ञ हूँ और जो बातें उन्हें मेरी नज़रों में
खास बनाती उन्हें इस उद्देश्य के साथ यहाँ साझा कर रहा हूँ ताकि उनके जैसे ही और लोग बने और तमाम लोगों को उनके जैसे मित्र मिल सकें;
जब कोई आपसे मुस्कुराकर मिलता है तो इससे सन्देश जाता है की उसे आपसे मिलकर ख़ुशी हुयी
नतीजतन आपकी सेल्फ एस्टीम बढ़ जाती है और आप खुद को महत्व का समझते हैं, अच्छा और बेहतर महसूस करते हैं और साथ ही ये भावना आपमें एक जिम्मेदारी का भाव लाती है जिससे आप अपने काम में और बेहतर करते हैं, अपने व्यवहार को और बेहतर बनाते ताकि आप ऐसे ही लोगों के लिए समाज के लिए महत्व के बने रहें |
इसीलिए अगर आपके आस-पास मुस्कुराकर मिलने वाले लोग हैं तो आपके लिए अपने काम में मन लगाना आसान हो जाता है |
2. किसी दिक्कत के वक़्त पूरी बात इत्मीनान से सुनना और बारीकी से विश्लेषण करके हल सुझाना -
अगर आप किसी दिक्कत में हैं और अवनीश भाई के पास पहुँच जाएँ और उन्हें अपनी दिक्कत बताएं तो पहले तो आपको पूरी बात सुनी जाएगी ताकि आप हल्का महसूस कर सकें और उसके बाद आपकी दिक्कत की जड़ का विश्लेषण होगा अपने अनुभव और समझ के आधार पर और जरुरी उपाय और मदद तुरंत या जल्द से जल्द की जाएगी |
3. सामजिक और पेशेगत मुद्दों पर बातचीत करने वाला साथी-
जहाँ अमूमन लोग अपनी यादों में खोये रहते हैं वहां कम हैं ऐसे लोग जो अपनी दिनचर्या, अपने काम, उसकी गुणवत्ता और उसमे इनोवेशन ( नवाचार ) पर तथा सामाजिक स्थितियों की बेहतरी के लिए बात करते हों, अवनीश भाई ने हमेशा इन मुद्दों पर बात करके और जरुरी कदम उठाकर समय को सही जगह लगाने की प्रेरणा दी |
4. मदद के लिए हमेशा हाज़िर -
अवनीश भाई के कितने ही खुद के काम पेंडिंग पड़े हों, कल किसी परीक्षा में बैठना हो लेकिन अगर आपने फ़ोन कर दिया या उनके पास पहुँच गये अपनी किसी दिक्कत या जरुरत के साथ तो फिर पहले आपकी बात सुनी जाएगी और अंतरिम हल देकर फिर बताया जायेगा की कल तो एक परीक्षा है उसके लिए पढ़ रहा हूँ, बाकि की कार्यवाही बाद के लिए .......
5. खुशमिजाज़ स्वभाव और मजाकिया लहजे में बड़ी बड़ी बात कह जाने की कला में माहिर -
नाराजगी तो अवनीश भाई के स्वभाव में कभी दिखी नहीं क्योंकि नाराज़गी भी वो ऐसे शब्दों में कहते हैं कि आपके पास मुस्कुराकर अपनी गलती मान लेने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होता, उनकी बातों के सामने गुस्सा होने का सवाल ही नहीं उठता और हाँ आपने अगर टोंकने वाला काम किया है तो मीठी झिडकी देने में भी महारथ हांसिल है उन्हें , सब प्रैक्टिस और संगति की बात है , फणीश्वर नाथ रेनू की मैला आँचल पढने का विचार उन्होंने ही दिया |
6. मानव मन के पारखी-
मानव मन के पारखी ऐसे कि किस इन्सान को किस दिक्कत में क्या जरुरत होगी या उसे किस तरह की बातें हल्का महसूस कराएंगी और शांतचित्त होकर दिक्कत के मूल और तीव्रता पर सम्यक विचार करने लायक बना सकें |
अवनीश भाई ने लोगों से जुड़ते वक़्त ये कभी न सोंचा कि कौन उनके क्षेत्र, जाति, भाषा का है या अन्य का निष्पक्ष इंसान का उदाहरण, इसिलिए वो भारत के किसी भी हिस्से में रहे हों, उनके आस पास के लोग उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके, सीमित संसाधनों और व्यक्तिगत संघर्षों के बावजूद लोगों की मदद कैसे की जाती है, उनसे सीखा जा सकता है |
"एक अच्छा दोस्त आपके अन्दर की बेहतर करने की संभावनाओ को बाहर लाता है और आपमें सतही चिंताओं से हटाकर अपनी उर्जा ठोस काम और ठोस मुद्दों पर लगाने की हिम्मत भरता है स्पष्टता देकर"
-लवकुश कुमार
इमेज स्रोत - https://bentenbooks.com/
डॉ॰ विजय अग्रवाल द्वारा लिखित यह प्यारी सी पुस्तक, एक आई.ए.एस. अधिकारी ( व्यक्तिगत सचिव के स्तर के ) के व्यवसायिक और व्यक्तिगत जीवन के साथ उसके मनोभावों के आस पास घूमती है, प्रकाशक बेनतेन बुक्स के शब्दों मे - " यह एक ऐसा उपन्यास है जो इस ग्लोबलाइजे़शन के दौर में किसी भी व्यक्ति को रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी से हटकर अपनी निजता को खोजने पर मजबूर करता है। कहानी एक आई.ए.एस. अधिकारी के जीवन के चारों ओर घूमती है और हम सभी के जीवन के अंतर द्वंद्वो तथा समस्याओं पर प्रकाश डालती है। कुलमिलाकर यह हास्य-व्यंग से भरपूर, एक रोचक उपन्यास है जिसे पाठक एक बार शुरू करने पर समाप्त करके ही रखेगा।
मैंने क्या बेहतरी महसूस की खुद में इस पुस्तक को पढ़कर:
" और भी बहुत कुछ जो यहाँ लिखने लग जाऊँ तो फिर एक पुस्तिका तैयार हो जाये "
मुझे उम्मीद है कि आपको भी इस पुस्तक को पढ़कर मानसिक स्फूर्ति का अहसास होगा और चीज़ों को बेहतर तरीके से समझ पाने का गर्व तथा आत्मसंतोष भी |
अगर आपको चीज़ों की कार्यपद्धति को समझना, मानव मन और व्यवहार को जानना-समझना रोचक और जरुरी लगता है तो आप भी निराश न होंगे |
As the depletion region opposes flow of current due to majority charge carriers so reverse bias also being resistive to current flow inceases the width of depletion region. Option A is correct.

As plane of polarization (electric field vector) is always PERPENDICULAR to DIRECTION of propagtion of wave so it proves that light is a transverse wave.
