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सभी पाठकों को मेरा नमस्कार आज युवा दिवस है तो सोचा की मन के कुछ उद्गार व्यक्त किये जाएं।
आपको पता ही है कि युवा दिवस स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के उपलक्ष्य में मनाते हैं।
उन्होंने युवावस्था में ही अपने कार्यों, लेखों और भाषण से समता, अध्यात्म और उत्कृष्टता का संदेश बहुत दूर तक पहुंचाया।
अध्यात्म के क्षेत्र में उन्होने काफी कुछ लिखा जो स्पष्टता देने वाला था।
वह जीवन में बड़े उद्देश्यों को लेकर चले जिससे आमजन का हित जुड़ा था, कुशाग्र बुद्धि वाले इंसान थे और उन्होंने प्रयास किया की कुछ ऐसा करें की आम जन का जीवन बेहतर हो उनके जीवन में आजादी आए उत्कृष्टता आए आनंद आए।
मैं भी आज युवा दिवस के अवसर पर अपने युवा साथियों से अपेक्षा करता हूं कि वह एक स्वस्थ शरीर, स्वस्थ दिमाग के लिए प्रयासरत रहें, समर्पित रहे और अपने व्यक्तिगत जीवन में चीजों और सुखों को इकट्ठा करने के इतर अपना समय ऐसे कार्यों में भी दें जिससे आमजन का जीवन बेहतर होता है अगर आमजन किसी अंधेरे में है तो उन्हें ज्ञान के उजाले में लाएं, अगर आमजन को पौष्टिक खाना नहीं मिल पा रहा है तो प्रयास करें कि वह समता आए समाज में कि उन्हें भी पौष्टिक भोजन मिले, अगर किसी बच्चे से उसका बचपन छिन रहा है उसके माता-पिता मजबूर हैं उसे अपने काम में खींचने को तो प्रयास करें कि ऐसी समता आए की माता-पिता को अपने बच्चों को अपने काम में ना खींचना पड़े।
लोगों में इतनी समझ आए कि वह ऐसी कोई भी गतिविधि में भाग ना लें जिससे शरीर खराब होता हो और इन सबके बावजूद भी कोई बीमार पड़ जाए तो उसे समुचित स्वास्थ्य लाभ के लिए चिकित्सा उपलब्ध हो सके इसके लिए प्रयास करें ।
आने वाली पीढियां को स्वच्छ हवा और जल मिल सके इसके लिए प्रयास करें बोलें, लिखें चर्चा करें ।
खुद भी एक आजाद जीवन की कर दिखाएं मिशाल बने और प्रयास करें की आपसे जो कुछ काम हो सके अन्य लोगों के जीवन में भी आजादी आए, सुकून आए ।
आप युवा हैं ढेर सारी ताकत है जोश है इसका इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत विलासिता ग्रहण करने के पीछे न लगाकर कुछ हिस्सा जनउपयोगि काम में भी लगाएं,
आज जिन पेड़ों के हम फल खा रहे हैं वह किसी और ने लगाए थे तो हमें भी प्रयास करना चाहिए कि हम भी कुछ ऐसे काम करें कि आने वाली पीढ़ियों को कुछ उससे लाभ हो।
24 घंटे में ज्यादातर वक्त अगर हम विलासिता पूर्ण जीवन पाने के लिए ही बिताते हैं तो कुछ घंटे बिता कर देखिए आमजन की समस्याओं पर काम करके देखिए, आपको जो सुकून मिलेगा वह अप्रतिम होगा ऐसा सुकून होगा ऐसा आनंद होगा जो भूलेगा नहीं।
युवा हैं अकेले भी चल जाने की दम रखिए अगर मानवता के लिए लीक से हटने की जरूरत है तो लीक से हटिए।
सुविधा के बजाय सत्य को चुनिए ।
किसी अंधी दौड़ का हिस्सा मत बनिए, वही करिए जिससे समाज दुनिया में शांति बढ़े, समता बढ़े लोगों के बीच सौहार्द्र बढे, आपसी विश्वास बढ़े, सुरक्षा की भावना बढ़े ।
उनके बीच प्रेम बढ़े,
युवा हैं अकेले चलने से मत डरिए सुविधा नहीं सत्य को चुनिए।
देश समाज की दिक्कतों को पहचानिए, जागिए और तब तक मत रूकिए जब तक समाज में समता न आ जाए।
-लवकुश कुमार
लेखक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
लेखक के विजन के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
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पुस्तक समीक्षा | तुम्हारे लिए
✍️ लेखक: हिमांशु जोशी
📝 प्रकाशक: किताबघर प्रकाशन
• “तुम्हारे लिए” हिमांशु जोशी की एक अतुलनीय और अत्यंत संवेदनशील कृति है। यह उपन्यास मात्र एक प्रेमकथा नहीं है, न ही कोई साधारण पत्र—बल्कि यह उन अनकहे एहसासों का दस्तावेज़ है, जिन्हें नायक नायिका के रहते हुए कभी शब्द नहीं दे पाया। यह किताब नैनीताल की धरती पर पनपी विराग और अनुमेहा की तरुण, कोमल और अधूरी प्रेमगाथा है।
•उपन्यास की पृष्ठभूमि नैनीताल है और लेखक ने इस शहर को सिर्फ़ एक स्थान की तरह नहीं बल्कि एक जीवित अनुभूति की तरह रचा है। पहाड़, झील, रास्ते, मौसम—सब कुछ ऐसा वर्णित है कि पाठक स्वयं को उसी वातावरण में चलता हुआ महसूस करता है। यह वही नैनीताल है जो कभी शांत, आत्मीय और अपना था—और वही नैनीताल भी जो समय के साथ बदलता चला गया।
• विराग और अनुमेहा का रिश्ता किसी नाटकीय घटना से नहीं बल्कि ट्यूशन जैसी साधारण परिस्थिति से शुरू होता है। पढ़ाते-पढ़ाते उपजा यह आकर्षण धीरे-धीरे गहरे भावनात्मक जुड़ाव में बदलता है।
पाठक समझते हैं कि किसी रिश्ते की विश्वसनीयता और उम्र उस आधार पर निर्भर करती है जिस पर वह आधारित होता है।
• कहानी की एक बड़ी ताक़त इसके सह-पात्र हैं।
डॉ. दत्ता और श्रीमती दत्ता का नायक के प्रति अपनापन,
सुहास का नायिका के प्रति आकर्षण,
और नायक की निम्न पारिवारिक-आर्थिक स्थिति—ये सभी तत्व कहानी को एक सामाजिक यथार्थ प्रदान करते हैं।
नायक का यह द्वंद्व कि पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ और प्रेम/चाहत, दोनों के बीच संतुलन शायद उससे बन ही नहीं पाया या कहिए कि परिस्थितियां ही अनुकूल न थीं—कहानी को और गहरा एवं पेंचीदा बना देता है।
• उपन्यास में कई ऐसे क्षण हैं जहाँ सुख और दुख की रेखा धुंधली हो जाती है। लेखक के शब्दों में—
“कुछ स्मृतियां ऐसी होती हैं जो एक साथ ही दुख की अनुभूति भी देती हैं, सुख की भी। वास्तव में एक बिंदु पर आकर दुख-सुख का भेद ही समाप्त हो जाता है। पीड़ा में भी एक तरह के सुख की अनुभूति होती है—असीम संतुष्टि की।”
यह पंक्तियाँ पूरी किताब की आत्मा को समेट लेती हैं।
• जब नायिका जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में काम कर रही होती है और वहाँ नायक उससे मिलता है, तब गरीबी पर हुआ संवाद झकझोर देता है—
“रोगियों की संख्या यहाँ बहुत दिखती है… कौन-सी बीमारी अधिक है?”
“एक ही बीमारी है—सबसे संक्रामक।”
“कौन-सी?”
“गरीबी… बताइए, इससे भयंकर और कौन-सा रोग है इस संसार में।”
यह संवाद उपन्यास को केवल प्रेमकथा नहीं रहने देता, बल्कि उसे सामाजिक चेतना से जोड़ देता है।
• उपन्यास का अंत आते-आते कहानी एक भावनात्मक और कुछ हद तक फिल्मी मोड़ लेती है। नायिका का चले जाना, और नायक का स्मृतियों के सहारे जीते रह जाना—पाठक को भीतर तक खाली कर देता है। अंतिम पृष्ठ कहानी को समाप्त नहीं करता, बल्कि पाठक के भीतर एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव छोड़ जाता है।
लेकिन यहीं इशारा मिलता है परिस्थितियों की बुनावट का, जीवन की वास्तविकता की बात करें तो हमें अंततः शांति को चुनना होता है और अपने लिए आजादी, आत्मनिर्भरता और उत्कृष्टता को जीवन के केंद्र में रखना होता है ताकि इस शरीर की असीम संभावनाओं को पाया जा सके समय का सदुपयोग किया जा सके।
• कुल मिलाकर, "तुम्हारे लिए" एक शांत, पीड़ादायक, सुंदर और मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं से परिचय कराने वाला उपन्यास है। यह किताब एक सवाल जगाती है कि क्या हम वास्तव में जानते हैं कि जीवन में सबसे जरूरी क्या है ? क्योंकि इस सवाल का जवाब जाने बिना हम अपने जीवन की प्राथमिकताएं निर्धारित नहीं कर पाते और कब क्या पकड़ना और कब क्या छोड़ना यह निश्चित नहीं कर पाते।
यह उपन्यास आपका परिचय करा सकता है अधूरे रह गए एहसासों की गूँज का—जो पढ़ने के बाद भी देर तक मन में बनी रहती है और बना सकता है, आपको लोगों के मनोभावों और प्राथमिकताओं, स्थितियों को बेहतर समझने के काबिल।
कोई सवाल हो तो लिख भेजिए, फेसबुक लिंक या ईमेल से।
शुभकामनाएं
विशाल चन्द
https://www.facebook.com/vishal.chandji
विशाल चन्द जी समाजशास्त्र के शोधार्थी, पाठक और संवेदनशील शिक्षार्थी हैं। नवीन ज्ञान अर्जन और सतत सीखना आपके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। पुस्तकों का पठन और संग्रहण आपको विशेष प्रिय है।
आपके भीतर एक घुमक्कड़ चेतना भी सक्रिय है, जो आपको नए लोगों, स्थानों और अनुभवों से जोड़ती रहती है। बागवानी आपके लिए प्रकृति से संवाद का माध्यम है।
आप समाज को अपने स्वतंत्र दृष्टिकोण से देखने और विभिन्न समूहों के साथ मिलकर सामाजिक दायित्वों के निर्वहन को निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
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विशाल चन्द जी समाजशास्त्र के शोधार्थी, पाठक और संवेदनशील शिक्षार्थी हैं। आप समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर हैं तथा इसी विषय में यू.जी.सी. नेट–जे.आर.एफ, यू-सेट और ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएँ भी उत्तीर्ण की हैं। वर्तमान में आप समाजशास्त्र के वरिष्ठ शोध अध्येता हैं। अकादमिक क्षेत्र के साथ-साथ आप एक प्रशिक्षित फार्मासिस्ट भी हैं।
नवीन ज्ञान अर्जन और सतत सीखना आपके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। पुस्तकों का पठन और संग्रहण आपको विशेष प्रिय है।
आपके भीतर एक घुमक्कड़ चेतना भी सक्रिय है, जो आपको नए लोगों, स्थानों और अनुभवों से जोड़ती रहती है। बागवानी आपके लिए प्रकृति से संवाद का माध्यम है।
आप समाज को अपने स्वतंत्र दृष्टिकोण से देखने और विभिन्न समूहों के साथ मिलकर सामाजिक दायित्वों के निर्वहन को निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
मुझे विश्वास है कि आपका चहुंमुखी अनुभव आपकी रचनाओं में परिलक्षित होकर पाठकों को लाभान्वित करेगा और उन्हें एक समावेशी दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा।
- लवकुश कुमार

विनोद कुमार शुक्ल जी का यह उपन्यास 'खिलेगा तो देखेंगे' अपने-आप में अद्भुत उपन्यास है। इसकी एक-एक पंक्ति कविता की तरह लगती है। और सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह उपन्यास पूरी तरह से कथानक पर निर्भर नहीं होते हुए भी एक कथा दृश्य बना देता है अर्थात् कोई ऐसा काथा-सूत्र नहीं है जो उपन्यास के केन्द्र में हो, बावजूद इसके ग्रामीण और सामूहिक जीवन का चित्रण बड़े ही रोचक ढंग से किया गया है। इस उपन्यास में गाँव भी है, गरीबी भी है, पीड़ा भी है और प्रसन्नता भी है। यह उपन्यास पाठकों के बीच उपन्यासों की दुनिया में एक नया अनुभव प्रदान करता है। नये पाठकों को थोड़ा कम अच्छा लगे ऐसा हो सकता है लेकिन इसकी एक-एक पंक्ति हमें गंभीर चिंतन की ओर प्रेरित करती है।
- सुरसेन
युवा साहित्यकार सुरसेन सिंह बहादुर जी, इस बात में विश्वास रखते हैं कि " भोजन, कपड़ा, मकान पैसा सब जरुरी है, सब देना, तुम मुझे कुछ देना चाहो, तो किताबें सबसे पहले देना "
आप एक शिक्षक हैं और देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षित हैं, आपने काव्य संग्रह -" विरोध चुप्पियों का " की रचना की है।
"यह संग्रह केवल शब्दों का संचयन नहीं है बल्कि यह उन विसंगतियों के विरुद्ध एक वैचारिक युद्ध है जिन्हें हमारा समाज अक्सर 'मौन' रहकर स्वीकार कर लेता है" - साहित्यकार संतोष पटेल जी
सुरसेन सिंह बहादुर जी का फेसबुक प्रोफाइल लिंक
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एक शाम ऐसी भी जब पिथौरागढ़ में स्थित अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में पहाड़ी वोकल्स के युवाओं द्वारा आयोजित बुक मीट में शिरकत करने का मौका मिला| कई जिज्ञासु और सुधी पाठकों ने अपने द्वारा पढ़ी गई बेहतरीन पुस्तकों पर चर्चा की|

उन पुस्तकों के महत्व के बारे में बताया उन पुस्तकों को पढ़ कर हम किन सवालों के जवाब पा सकते हैं और किन मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं को समझ सकते हैं इस पर बात की गई| कई लोगों ने बताया की कैसे एक किताब ने उनके सोचने के नजरिये को बदल दिया, कैसे वह अपने पॉइंट ऑफ व्यू से हटकर दूसरों के नजरिए से भी दुनिया समाज और लोगों को देख पाने में सक्षम हुए हैं, कैसे उनके पूर्वाग्रह खंडित हुए और सबसे बड़ी बात उन्होंने बात की उस सुकून की जो किताबों को पढ़कर मिलती है हालांकि हमेशा ऐसा नहीं होता कुछ किताबें हमे सवालों से घेर लेती हैं और हमे मानव जीवन के संघर्षों और मार्मिक पहलुओं की तरफ ध्यान खींच ले आती हैं तब सुकून नहीं एक उत्कंठा पैदा होती है, इस पर अलग से बात करेंगे |
कुछ लोगों के लिए किताब पढ़ना एक दूसरी दुनिया में जाने जैसा है जैसे कुछ अच्छी मूवीज हमें तुरंत की तकलीफों से दूर कर देती हैं और हम शांतचित्त होकर समझ पाते हैं और एक उम्मीद और उत्साह के साथ दोबारा अपने काम में लग पाते हैं, वैसे ही कुछ बेहतरीन किताबें भी आपको आपकी समस्याओं को दूर से देखने का मौका देती हैं और फिर आपको उन समस्याओं की पीछे के कारण भी समझ आते हैं और वह अपेक्षाकृत छोटी भी लगती हैं साथ ही यदि आप बेहतर किताबों की संगति में हैं तो आपको हल्का महसूस कराएंगी और आपको आजादी के लिए प्रेरित करेंगी, आपको उदार बना सकती हैं बाकि आप किस तरह की किताबों की संगति में हैं यह निर्भर करता है
किसी पाठक ने बताया कि शुकून मिलता है, कोई कहती हैं कि जीवन और दुनिया को बेहतर समझ सकते हैं, किसी का विश्वास है कि इससे हमारे पूर्वाग्रह टूटते हैं, किसी को आत्मविश्वास मिल रहा तो किसी को स्पष्टता, कोई कहता है कि कोई बदलाव लाना है तो बेहतर तरीके और अनुभव का खजाना है किताबों में, तो कोई कहता है कि किताबें बात करती हैं और किसी के लिए किताबें लोगों को और उनकी अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को समझने में मदद करती हैं, कोई लोगों की भावनाओं को समझाने को तो कोई खुद में संवेदनाओं जगाने को किताबों का सहारा लेता है।
अन्य सुधी पाठकों ने बताया की किताबें मानो हमेशा साथ देने वाले दोस्त हो जब कोई आपसे बात करने को ना हो तो किताबें बात करती हैं किताबें आपके काम को और बेहतर करने के लिए स्पष्टता देती हैं|

एक से एक बेहतरीन किताबों की चर्चा हुई और उनमे से कुछ के नामों का यहां पर उल्लेख कर रहा हूं और जल्द ही इनमें से कुछ किताबों पर आपको उनही पाठकों में से कुछ के लेख मिलेंगे जिससे आप और बेहतर समझ पाएंगे संबंधित किताब के बारे में|
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मंटो की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ |
Crime and Punishment
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डार से बिछुड़ी - कृष्णा सोबती
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Becoming by Michelle Obama |
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अग्नि की उड़ान – डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम |
Invincible Thinking by Ryūhō Ōkawa
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पचपन खम्भे लाल दीवारें- Usha प्रियंवदा
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The art of being alone by |
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तुम्हारे लिए - हिमांशु जोशी |
THE ART OF BEING ALONE: Solitude is My Home Loneliness was My Cage by Renuka Gavrani |
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गबन – मुंशी प्रेमचंद |
Gone Girl Novel by Gillian Flynn
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चश्मिश – मानवी |
Courage to be disliked - Fumitake Koga and Ichiro Kishimi
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सूरज का सातवाँ घोडा- धर्मवीर भारती |
यार पापा – दिव्यप्रकाश दुबे |
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अक्टूबर जंक्शन - दिव्यप्रकाश दुबे |
इब्नेबतूती - दिव्य प्रकाश दुबे
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इस तरह इस बात को बेहतर तरीके समझ पाना आसान होगा कि किसी पुस्तक की थीम क्या है, आपको इससे क्या मिल सकता है, और इस पुस्तक का साहित्य के क्षेत्र में क्या योगदान और महत्व है यह भी आप जान पाएंगे|
एक बार धन्यवाद आदर्श जी और उनकी टीम का जिन्होंने इस परिचर्चा को आयोजित किया और इसे रुचिकर बनाया|

इसी परिचर्चा में मुलाकात हुई श्री करण तिवारी जी से जो देवल थल में एक लाइब्रेरी चलाते हैं जिसमें वहां के कई ग्राम सभाओं के बच्चे पढ़ते हैं और काफी कुछ सीखते हैं|
एक बात और की पहाड़ी वोकल्स में युवा अपना समय और प्रयास बहुत ही जरूरी कार्यों में दे रहे हैं इसके लिए मैं उन्हे साधुवाद और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रति भी आभार कि उन्होंने ऐसे प्रयासों के लिए संसाधन उपलब्ध कारये यह एक प्रेरणादायक कार्य है इस तरह की परिचर्चा देश के और भी शहरों/ जगहों में होनी चाहिए ताकि हमारे युवा साहित्य से जुड़ सकें और देश दुनिया में स्थायित्व और बेहतर शांति ला सकें|
कुछ लिंक
https://lovekushchetna.in/article.php?id=801
https://www.facebook.com/profile.php?id=61563266181704
https://www.facebook.com/profile.php?id=61555496220488
किताबें पढ़ना जारी रखिए, समझते रहिए और संवाद भी जारी रखिए |
शुभकामनाएं
लवकुश कुमार
लेखक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
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Gunjan is a life sciences undergraduate student from Pithoragarh, who believes that learning goes far beyond exams and degrees. She completed her schooling at Don Bosco Senior Secondary School, Pithoragarh, where her years as a student shaped not only academic discipline but also a growing curiosity about life itself. Early on, she became aware that "education does more than build careers—it quietly shapes how we think, feel, and understand the world around us."
Her journey through competitive exam preparation, especially NEET, became a turning point in her growth. The years of preparation exposed her to pressure, comparison, emotional fatigue, and phases of detachment—experiences that many students go through but rarely speak about.
Writing began during this phase as a way to process those emotions honestly. Over time, it grew into a "responsibility".
Gunjan believes that as young people who will soon become adults, it is important to reflect deeply and grow consciously—so that when younger minds seek guidance, they are met with empathy, clarity, and realism rather than confusion or unrealistic ideals.
Through her writing, she invites readers to slow down and sit with themselves. She views life as a series of seasons, each carrying its own lessons, and believes that nothing goes in vain—not struggle, not grief, not pauses.
She writes from lived experience: as a woman, as a young learner, as a "listener and observer", as both a student and a teacher in becoming, and above all, as a conscious human being.
Her work explores quieter, often unspoken emotions and encourages acknowledging them rather than suppressing them, reminding readers that "understanding what we feel is not weakness, but the beginning of living with awareness and purpose".
With best wishes and an attempt to impart clarity about things met so far.
Note- feedback, queries and comments may be submitted through contact form.


संपादक की कलम से माता पिता को संबोधित
“ हर फूल सुंदर होता है यदि उसे ध्यान से देखा जाए “
“हर बीज मे पौधा और फिर पेड़ बनने की संभावना होती
है जरूरत है तो उसे सही परवरिश और माहौल उपलब्ध कराने की ”
बच्चे देश का भविष्य है, यही आगे चलकर शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी, वकील,
साहित्यकार, पत्रकार, कलाकार, नेता, अधिकारी, वैज्ञानिक इत्यादि बनेंगे।
ये बच्चे आगे चलकर एक संवेदनशील इंसान बन सकें ताकि ये दूसरों की दिक्कतों को समझ सकें, सच
का साथ दे लोगों के साथ न्याय कर सकें, उसके लिए जरूरी है कि वो पहले एक विस्तृत सोच का
इंसान बने जो काबिल हो, जीविका आर्जित कर सकें अपने क्षेत्र में तथा अन्य लोगों और पेशों को
समझ सकें, उनके महत्व को जान सकें, अपने लिए अलग-2 क्षेत्रों के विकल्प ढूँढ सकें।
इसी उद्देश्य से इस पुस्तिका में साहित्यिक लेखों के साथ विज्ञान के तथ्य है जो बच्चों की सोच को
विस्तार देंगे और उनकी जिज्ञासा को बढ़ाकर उन्हें कार्य-कारण सिद्धांत से वैज्ञानिक चेतना की
तरफ अग्रसर करेंगे।
ऐसी शख्शियतों के नाम भी दिये गए हैं जिन्होने अपने काम के बल पर नाम कमाया और अपना
जीवन सफल बनाया ताकि बच्चे अपने सीमित दायरे से बाहर निकल इन महान लोगों के बारे मे
जान सकें और जीवन मे एक्सीलेन्स हासिल करने के लिए प्रेरित हो सके, ये भी हो सकता है कि
फिर बच्चे अन्य ऐसे महान लोगों के बारे मे जानने की जिज्ञासा व्यक्त करें |
“किसी काम को करते वक़्त, मिलने वाला आनंद ही वास्तव मे उस काम को करने का पुरस्कार है|”
पुस्तक से कुछ अंश :


शुभकामनाएं
-लवकुश कुमार
लेखक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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“एक इंसान कैसा नागरिक बनेगा ये निर्भर करता है उसे मिलने वाले महौल से, ये माहौल घर का भी होता है और उसके स्कूल/कॉलेज का भी |”
(मुख्य अतिथि माननीय विधायक श्री मयूख मेहर जी और निदेशक श्री गिरीश पाठक जी के कर कमलों से दीप प्रज्वलन)
स्कूल या विद्यालय हम विद्या अर्जन के लिए जाते हैं, जहां विद्या अर्जन केवल सैद्धांतिक पक्ष नहीं, यह व्यवहारिक पक्ष भी लिए हुये है, जिसमे स्वयं और दुनिया को समझने, चीज़ें कैसे काम कर रहीं और जीव की वृत्तियाँ क्या हैं इनको समझने के साथ एक तार्किक और उदार सोंच विकसित करना भी शामिल है ताकि हम विभिन्न विषयों मे निपुण होकर रोजगार के काबिल बन सकें |

(विशिष्ट अतिथि श्री आशीष कुमार, commandant 55 Bn SSB Pithoragarh )
एक सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने के लिए और स्थायित्व बनाए रखने के लिए हमे जरूरत होती है, जिम्मेदार, साहसी, उदार और लोगों मे सामंजस्य बैठाकर चलने वाले लोगों (कार्यबल) की, इसके लिए विद्यालय मे विभिन्न गतिविधियों द्वारा बच्चों को जीवन के लिए तैयार किया जा सकता है, सत्यनिष्ठा और संवेदना भी विद्यालय के दिनो से ही विकसित की जाए तो काम आसान हो जाए| न्याय, गरिमा, स्वतन्त्रता और सच्चाई की राह पर चलते रहने के साहस के लिए जरूरी स्पष्टता भी इसी वक़्त से प्रदान की जाए तो बेहतर रहता है |

बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, दुनिया के यह बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ हों, मानसिक रूप से मजबूत, होनहार/काबिल, संवेदनशील, प्रगतिवादी और जुझारू हों, साथ ही वो अपने जीवन की उच्चतम संभावनाओं को पा सकें, अपने अंदर छिपी असीम शक्ति और क्षमता को समझ सकें इसके लिए इन्हें उचित पोषण के साथ सही माहौल, अभ्यास, संगति और ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है|


बच्चे अपनी शुरुआती जीवन का अच्छा खासा समय स्कूल में देते हैं, वह भी बच्चों के साथ, जिसका एक अलग ही महत्व है, क्योंकि हमारे आस पास जब लोग कुछ सीख रहे हों तो, हमारे द्वारा भी सीखने की इच्छा बढ़ जाए, ऐसी काफी संभावनाएं रहती हैं, कुछ विशेष गतिविधियों के द्वारा हम उनमें ऐसे गुण डाल सकते हैं जो उन्हें भविष्य के अवसरों और संघर्षों के लिए तैयार कर सकते हैं और सबसे खास कि उनमें ऐसी आदतें विकसित कर सकते हैं जिससे उनका एक-एक दिन सार्थक हो पाएगा और बेहतर मानवीय संबंधों के साथ उचित प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वो आनंदमय और उत्कृष्ट जीवन जी पाएंगे|

साथ ही कुछ और गुण जो विद्यालय मे विकसित किए जा सकते हैं, विभिन्न क्रियाकलापों द्वारा यथा :
साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, धर्म निरपेक्ष दृष्टिको, साहसिक कार्य तथा खेल भावना और निःस्वार्थ सेवा का आदर्श, साहचर्य और अनुशासन का विकास, सहिष्णुता, सहभागिता,स्वावलम्बन व स्वदेश-प्रेम, स्वच्छता,पर्यावरण संरक्षण, समानता का भाव, अध्यापकों, सहकर्मियों एवं कनिष्ठों का सम्मान, लैंगिक संवेदीकरण के मूल्य, कमजोर वर्गों के प्रति संग का भाव एवं सहानुभूति (करुणा) इत्यादि,
हाल ही सोर घाटी पिथौरागढ़ के आइकन इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिक उत्सव में काफी कुछ ऐसा देखने के लिए मिला कि ऊपर वर्णित उद्देश्यों की पूर्ति के रास्ते पर चलता एक संस्थान मिल गया हो:

जैसा की Icon International School Pithoragarh के निदेशक श्री गिरीश पाठक जी अपने संदेश मे कहते हैं कि
“ हमारा मुख्य उद्देश्य सभी बच्चों के लिए सीखने, बढ़ने और विकसित होने के लिए एक गतिशील वातावरण बनाना है। हम मुख्य रूप से शिक्षण के साथ विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हमारी विशेषता बेहतर भविष्य के लिए वैश्विक और प्रेरणादायक नागरिक बनाना है। हम बच्चों के सर्वांगीण विकास और आत्म-प्रेरणा, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास पर ध्यान केंद्रित करते हैं। बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना हमारे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। हम आपके प्रियजनों के लिए एक सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण बनाते हैं और उन्हें उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार करते हैं।
हमारे अनुसार प्रत्येक बच्चा एक बीज के समान है जिसमें उचित मार्गदर्शन और स्नेह से पोषित होने पर बढ़ने की क्षमता होती है। आज हम पिथौरागढ़ शहर के एक प्रतिष्ठित और तेजी से विकसित होते शैक्षणिक संस्थान के रूप में स्थापित हैं। वर्ष दर वर्ष हमारे सभी कर्मचारियों और छात्रों के प्रयासों ने विद्यालय को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर किया है। हमारे पास एक गतिशील और मेहनती संकाय है जो छात्रों के लाभ के लिए शिक्षा में समर्पित है। हमारा वादा है कि हम आपके बच्चों को न केवल सफल इंसान बनाएंगे बल्कि अच्छे इंसान भी बनाएंगे। अंत में, हम उन सभी अभिभावकों को धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने हमारे संस्थान और इसके आदर्शों पर विश्वास जताया है। हम आपको आश्वस्त करते हैं कि आपके प्यारे बच्चे सुरक्षित हाथों में हैं। हमारा संपूर्ण स्टाफ विद्यालय के मूल्यों को समझता है और बच्चों को प्रोत्साहित करने में सहयोग करता है, और हमें विश्वास है कि बच्चे आपको और हमें गौरवान्वित करेंगे। एक बार फिर, आइकॉन परिवार में आपका स्वागत है। ”

बात को और बेहतर तरह से समझने को कुछ गतिविधियों का जिक्र जरूरी है, दर्शकों में से एक, आरती जी बताती हैं कि कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश करते ही मेहमानों का स्वागत करने का दायित्व भी बच्चों का ही था, इस बात ने आरती जी को प्रभावित किया और वो चमकती आंखों के साथ प्रसन्नता के भाव के साथ कहती हैं कि इस तरह ये बच्चे अभी से निःसंकोच होकर लोगों का अभिवादन करना सीख पायेंगे और एक उल्लास, उम्मीद, महत्वपूर्ण महसूस कराने वाली और अपनेपन की भावना का संचार करने वाली मुस्कान के साथ मानवीय रिश्तों को वो आधार देना सीख पायेंगे जिस पर टिके रिश्ते में इंसान एक से एक बड़े कार्य कर जाता है और नए रिकार्ड बना डालता है।
वह आगे कहती हैं कि कार्यक्रम के मंच संचालन का कार्य भी बच्चों ( छात्र-छात्राओं ) ने ही किया जो मन बांध लेने वाला था, इस तरह सक्रिय भागीदारी से बच्चों में स्पष्टता, आत्मविश्वास, समझ, समन्वय क्षमता, स्थितियों से निपटने, धैर्य, टिके रहने कि क्षमता विकसित होगी, साथ ही वो विभिन्न गतिविधियों के महत्व को समझ पाएंगे और विभिन्न संस्थाओं के महत्व और योगदान को समझ पाएंगे|
एक और गेस्ट (अभिभावक) और पिथौरागढ़ एयरपोर्ट पर अधिकारी श्री सुनील वर्मा जी कहते हैं कि विभिन्न गतिविधियां बच्चों कि समझ को व्यापक करेंगी और साथ ही वह बताते हैं की वार्षिक उत्सव के प्रांगण मे एक विज्ञान के प्रोजेक्ट और किताबों का स्टॉल भी लगा था जहां से बच्चों के लिए साइन्स की किट के साथ साहित्य अध्ययन और पुस्तक पढ़ने कि आदत डालने के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक पुस्तकों को किफ़ायती कीमत पर खरीदा जा सकता था | साथ हे कर्राटे सरीखी गतिविधियों का प्रशिक्षण बच्चों को आत्म रक्षा के लिए तैयार करेगा और ISRO सरीखी अग्रणी संस्थाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों को और जागरूक तथा उत्साहित और प्रेरित करेंगे |
कला और विज्ञान का यह संगम वाकई प्रशंशनीय है |

अभिभावकों मे ही एक श्री संदीप यादव जी जोकि पेशे से पिथौरागढ़ एअरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारी हैं, बताते हैं कि बच्चों द्वारा मंच संचालन उनकी झिझक को खत्म कर उन्हे आत्मविश्वास देगा, जो उन्हे जीवन मे आगे चलकर, चाहे वो व्यावसायिक जीवन हो या व्यक्तिगत जीवन, अपनी बात निर्भीक होकर रखने में साथ ही लोगों से संवाद द्वारा जुड़ने में मदद करेगा | स्टेज पर कार्यक्रम मे प्रतिभाग करना अपने आपमे ही एक झिझक को कम करने वाली और व्यक्तित्व को निखारने वाली गतिविधि है |
विद्यालय प्रबंधन द्वारा समाज के गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित कर बच्चों को संबोधित किया गया और उन्हे विभिन्न गतिविधियों द्वारा उनकी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौका दिया गया, यह विद्यालय के वार्षिक उत्सव को सफल बनाता है और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक बेहतर प्रयास को दिखाता है |
विद्यालय प्रबंधन से निम्नलिखित ईमेल पर संपर्क किया जा सकता है : iconschoolpithoragarh123@gmail.com
बच्चे संवेदनशील, साहसी, करूण और काबिल बने इसी अपेक्षा के साथ
ढेरों शुभकामनायें
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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स्कूल या विद्यालय हम विद्या अर्जन के लिए जाते हैं, जहां विद्या अर्जन केवल सैद्धांतिक पक्ष नहीं, यह व्यावहारिक पक्ष भी लिए हुये है, जिसमे स्वयं और दुनिया को समझने, चीज़ें कैसे काम कर रहीं और जीव की वृत्तियाँ क्या हैं इनको समझने के साथ एक तार्किक और उदार सोंच विकसित करना भी शामिल है ताकि हम विभिन्न विषयों मे निपुण होकर रोजगार के काबिल बन सकें |
एक सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने के लिए और स्थायित्व बनाए रखने के लिए हमे जरूरत होती है, जिम्मेदार, साहसी, उदार और लोगों मे सामंजस्य बैठाकर चलने वाले लोगों (कार्यबल) की, इसके लिए विद्यालय मे विभिन्न गतिविधियों द्वारा बच्चों को जीवन के लिए तैयार किया जा सकता है, सत्यनिष्ठा और संवेदना भी विद्यालय के दिनो से ही विकसित की जाए तो काम आसान हो जाए| न्याय, गरिमा, स्वतन्त्रता और सच्चाई की राह पर चलते रहने के साहस के लिए जरूरी स्पष्टता भी इसी वक़्त से प्रदान की जाए तो बेहतर रहता है |
बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, दुनिया के यह बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ हों, मानसिक रूप से मजबूत, होनहार/काबिल, संवेदनशील, प्रगतिवादी और जुझारू हों, साथ ही वो अपने जीवन की उच्चतम संभावनाओं को पा सकें, अपने अंदर छिपी असीम शक्ति और क्षमता को समझ सकें इसके लिए इन्हें उचित पोषण के साथ सही माहौल, अभ्यास, संगति और ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है|
बच्चे अपनी शुरुआती जीवन का अच्छा खासा समय स्कूल में देते हैं, वह भी बच्चों के साथ, जिसका एक अलग ही महत्व है, क्योंकि हमारे आस पास जब लोग कुछ सीख रहे हों तो, हमारे द्वारा भी सीखने की इच्छा बढ़ जाए, ऐसी काफी संभावनाएं रहती हैं, कुछ विशेष गतिविधियों के द्वारा हम उनमें ऐसे गुण डाल सकते हैं जो उन्हें भविष्य के अवसरों और संघर्षों के लिए तैयार कर सकते हैं और सबसे खास कि उनमें ऐसी आदतें विकसित कर सकते हैं जिससे उनका एक-एक दिन सार्थक हो पाएगा और बेहतर मानवीय संबंधों के साथ उचित प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वो आनंदमय और उत्कृष्ट जीवन जी पाएंगे|
साथ ही कुछ और गुण जो विद्यालय मे विकसित किए जा सकते हैं, विभिन्न क्रियाकलापों द्वारा यथा राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर इत्यादि :
राष्ट्रीय कैडेट कोर के उद्देश्य
क. युवकों/युवतियों को सुयोग्य नागरिक बनाने के लिये उनमें चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन - नेतृत्व, धर्म निरपेक्ष दृष्टिकोण साहसिक कार्य तथा खेल भावना और निःस्वार्थ सेवा आदर्शों की विकसित करना।
ख- संगठित प्रशिक्षित और प्रेरित युवकों/युवतियों की एक ऐसी जनशक्ति का निर्माण करना जो सशस्त्र सेना सहित जीवन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान कर सके और राष्ट्रीय सेवा के लिये सदैव तत्पर रहे।
इस उद्देश्य का देश के विकास में क्या योगदान है?
यह उद्देश्य देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह युवाओं को मजबूत चरित्र, अनुशासन, और नेतृत्व गुणों से लैस करता है, जो देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए आवश्यक हैं। इसके साथ ही, यह सशस्त्र सेना में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके राष्ट्र की सुरक्षा में भी योगदान देता है।
आइए कुछ सवालों के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
राष्ट्रीय कैडेट कोर का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर का प्राथमिक उद्देश्य युवाओं को सुयोग्य नागरिक बनाना, उनमें चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा की भावना का विकास करना है। इसके अतिरिक्त, कोर सशस्त्र सेना सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम एक जनशक्ति का निर्माण करने का भी प्रयास करता है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को किन गुणों का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को चरित्र, साहस, मैत्री भाव, अनुशासन, नेतृत्व, धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण, साहसिक कार्य, खेल भावना और निस्वार्थ सेवा जैसे गुणों का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को राष्ट्रीय सेवा के लिए कैसे तैयार करता है?
राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं को प्रशिक्षित करके और उन्हें प्रेरित करके राष्ट्रीय सेवा के लिए तैयार करता है। यह उन्हें सशस्त्र सेना सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करने में सक्षम बनाता है, जिससे वे राष्ट्रीय सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें।
अनुशासन को पाठ में किस प्रकार परिभाषित किया गया है?
पाठ में अनुशासन को दो तरह से परिभाषित किया गया है: पहला, अपनी अंतरात्मा द्वारा बताए गए ईश्वर के आदेशों का पालन करना, और दूसरा, उचित अधिकार द्वारा दिए गए मानवीय आदेशों का पालन करना। यह स्पष्ट करता है कि अनुशासन आत्म-त्याग की नींव है, जो एक बेहतर उद्देश्य के लिए आवश्यक है।
राष्ट्रीय सेवा योजमा
उद्देश्य - सामाजिक सेवा द्वारा व्यक्तित्व विकास
राष्ट्रीय सेवा योजना छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व में सहिष्णुता, सहभागिता, सेवाभाव, स्वावलम्बन वस्वदेश-प्रेम जैसे गुणों को समाहित करने का प्रयास करती है।
राष्ट्रीय सेवा योजना का सिद्धान्त वाक्य "मैं नहीं परन्तु आप" (NOT ME BUT YOU)
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सामुदायिक सेवा और सामाजिक कार्यों में शामिल करना है। यह युवाओं को समाज के प्रति संवेदनशील बनाता है और उनमें जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है। NSS स्वयंसेवकों को विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर काम करने का अवसर मिलता है, जैसे कि स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण। इसका उद्देश्य छात्रों को समाज के सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
आइए कुछ सवालों के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
देश की एकता एवं अखण्डता आपके कर्त्तव्यों के सफल संचालन में निहित है।
एकता और अखंडता एक राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वे समाज में सामंजस्य स्थापित करते हैं, जिससे सभी नागरिकों को समान अवसर मिलते हैं। एकता विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों के लोगों को एक साथ लाती है, जबकि अखंडता राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा और संप्रभुता को सुनिश्चित करती है। यह देश की प्रगति और विकास के लिए आवश्यक है।
कर्त्तव्यों का सफल संचालन, व्यक्ति द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी, समर्पण और कुशलता से पूरा करने को दर्शाता है। इसमें समय पर काम करना, निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना और दूसरों के साथ सहयोग करना शामिल है। सफल संचालन से व्यक्ति और समाज दोनों को लाभ होता है, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं और राष्ट्र का विकास होता है।
एक स्कूल/कॉलेज परिसर के बुनियादी मूल्य क्या होने चाहिए
1. समस्त विद्यार्थियों को समान रुप से उच्च शिक्षा प्रदान करना।
2. विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों को विकसित करना ।
3. परिसर को उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में विकसित करना।
4. विद्यार्थियों को उनके विषयों में सर्वोत्तम ज्ञान से परिपूर्ण करना।
5. सुनहरे भविष्य की प्राप्ति के लिये विद्यार्थियों की प्रतिभा का पता लगाना एवं विकसित करना।
6. विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिये उनकी पाठ्येत्तर प्रतिभाओं को उजागर करना।
एक उच्च शिक्षा के संस्थान से अपेक्षित उद्देश्य
आइए एक सवाल के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
इस पाठ में उल्लिखित 'अनुकरणीय संस्थान' की क्या भूमिका है?
इस पाठ में उल्लिखित 'अनुकरणीय संस्थान' पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को रोजगार देने के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जो स्थायी विकास के लिए प्रतिबद्ध होगा।
मानवीय मूल्यों के विकास में एक विद्यालय/परिसर का महत्व -
1. विद्यार्थियों में समानता का भाव विकसित करना ।
2. अध्यापकों, सहकर्मियों एवं कनिष्ठों का सम्मान करना।
3. लैंगिक संवेदीकरण के मूल्यों को आत्मसात करना।
4. पेर्यावरण निर्वात एवं स्वच्छता के प्रति जागरुकता विकसित करना।
5. समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संग का भाव एवं सहानुभूति (करुणा) होना।–
आइए एक सवाल के माध्यम से बेहतर समझते हैं :
मानवीय मूल्यों का विकास क्यों महत्वपूर्ण है?
मानवीय मूल्यों का विकास छात्रों को समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए आवश्यक गुणों को विकसित करने में मदद करता है। यह समानता, सम्मान, लैंगिक संवेदीकरण, और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देता है, जिससे छात्र दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनते हैं।
संकलन - पब्लिक डोमैन मे उपलब्ध जानकारी, अकादमिक समझ और शैक्षिक परिसरों के भ्रमण से जुड़ा अनुभव
- लवकुश कुमार
संकलनकर्ता और लेखक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी मे स्नातक और आई आई टी दिल्ली से भौतिकी मे परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
लेखक के विजन के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल करें।
अमुक गाना जितेंद्र और हेमा मालिनी जी की फिल्म किनारा से लिया गया है।
इस गाने की शुरुआत में बोल हैं
"नाम गुम जाएगा चेहरा ये बदल जाएगा
मेरी आवाज़ ही पहचान है, गर याद रहे।"
जो अर्थ मैंने निकाला उसके अनुसार आवाज वह संदेश है जो कवि दे रहा है, वह कहना चाह रहा है कि उसके जाने के बाद यही बात कोई और कहेगा, क्योंकि यह जीवन का सच है, फिर जो बोलेगा उसका नाम रखा जाएगा लेकिन यह बातें जो सच्चाई है जीवन की, दुनिया की, वह वही रहेगी।
दूसरा अर्थ यह निकलता है कि इंसान चला जाता है, उसका नाम भी चला जाता है लेकिन उसने जो अच्छे काम किए होते हैं समाज के भले के लिए वह आगे बढ़ते रहते हैं।
इसलिए इंसान को नाम के पीछे दौड़ने के बजाय समाज के लिए उपयोगी कामों को करने का प्रयास करना चाहिए।
- लवकुश कुमार
लवकुश कुमार भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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