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बच्चे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं, ये अमूमन माहौल से निर्धारित होता है या दूसरा की उन्हे एक्सपोजर कैसा मिला
कुछ शब्द जो कैरियर बन सकते हैं, महत्व और योगदान दर्शाते हैं एक समाज के स्थायित्व के लिए
उनके बारे मे कुछ बातें यहाँ दी जा रही हैं :कुछ और पेशे आगे के लेख मे साझा किए जाएंगे |
| क्रम संख्या | पेशा | योगदान और महत्व | कुछ उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | साहित्यकार | लोगों को जीवन, दुनिया,चीजों, जगहों, समाज और खुद को लेकर समझ बेहतर हो इसके लिए किताबें, लेख, कवितायें, उपन्यास, निबंध, जीवनी, आत्मकथा रिपोर्ताज आदि लिखते हैं | | मुंशी प्रेमचंद, शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय, मनु भण्डारी, नागार्जुन, मुक्तिबोध आदि |
| 2 | शिक्षक | एक बेहतर, सजग, संवेदनशील, जागरूक, बहादुर, कौशलयुक्त और समझदार नागरिक बनाने के उद्देश्य से बच्चों को शिक्षित करते हैं | | आपके स्कूल के शिक्षक/शिक्षिकाएँ जिनसे पढ़कर आपको अच्छा लगता है | |
| 3 | डॉक्टर | लोग स्वस्थ रहकर अपना जीवन खुशी से जी सकें और खूब काम कर सकें, लोगों की मदद कर सकें इसके लिए बीमार पड़ने पर उनका इलाज़ करते हैं | | आपके शहर, आपके प्रदेश, देश के वो डॉक्टर जिन्होंने आपको स्वस्थ करने मे भूमिका निभाई | |
| 4 | इंजीनियर |
हमारे जीवन को आसान बनाने के लिए मशीन, सड़कों, रेल, पुलों, इमारतों, सॉफ्टवेअर,बिजली उपकरणो, कारखानो का निर्माण आदि |
एम॰ विश्वेसरैया, ई॰ श्रीधरन आदि |
कुछ लोग ऐसे मिलते हैं जिनकी अनुचित मांगें आप ये सोचकर पूरी करते रहते हो कि इनसे बात बिगड़ न जाए, व्यवहार में जो मीठापन है वो चला न जाए और अक्सर ऐसा होता है कि ऐसा इंसान आपका दोहन करता रहता है।
तो आखिर क्या करें?
आपकी श्रद्धा सत्य के प्रति होनी चाहिए न कि किसी इंसान के प्रति, जब तक वो सत्य के साथ, आप साथ देते रहो।
जैसे ही कोई अनुचित मांग करें उससे तुरंत कहो कि उसकी मांग अनुचित है पूरी नहीं हो सकती।
फिर ऐसे इंसान से बिगड़नी हो तो बिगड़ जाए, जहां कल बिगड़नी हो आज बिगड़ जाए, कम से कम आपका नुकसान होने से बच जाएगा, ऐसे इंसान से बनाकर रखने से भी कोई लाभ न होगा।
जो जरूरी है आपके पास से जाएगा नहीं इसीलिए संभालने की जरूरत नहीं है और जो जरूरी नहीं है उसे संभालकर करोगे क्या!
किसी के पास इतना काम है कि शुकून से खाना खाने तक का वक्त नहीं है
और किसी के पास इतना भी काम नहीं कि खाने भर का कमा सके
किसी से ओवरटाइम काम लिया जा रहा
और वो घर पर वक्त नहीं दे पा रहा
और किसी के पास काम ही नहीं
तो घर पर ही पड़ा हुआ है।
पेशे में पुराने लोगों के पास इतना काम है कि क्लाइंट वेटिंग में हैं
और नए लोगों के पास इतना भी काम नहीं कि
उस पेशे को जारी रख सकें
कुछ लालची चैन से खाने तक का वक्त भले न पाएं लेकिन मार्केट में मोनोपली चाहते हैं और किसी अन्य प्लेयर को टिकने ही नहीं देना चाहते।
इतनी असमानता क्या फ्रस्ट्रेशन, निराशा और ईर्ष्या को जन्म नहीं देती ?
क्या हम संतुलित दिनचर्या के महत्व को समझ रहे हैं?
कहीं हम अपना लाभ बढ़ाने के लिए अपने कर्मचारियों से संतुलित दिनचर्या की संभावनाएं तो नहीं छीन रहे उनसे नियमित ओवरटाइम कराकर ?
Generally being practical means being adoptive to convinient ways rather choosing an ideal way of achieiving something without thinking the very impact it will leave on society and practices in long run while the actual meaning should be correcting your perspective such that you consider human psychology/mindset and preferences, precedences and situations while planning to achieve something involving human interventions.
This series of this website will have articles in line with the definitions above to bestow you with clarity on the terms and functioning of society.
लवकुश कुमार, भौतिकी में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली से परास्नातक हैं और वर्तमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
इनका विश्वास है कि अच्छा साहित्य समाज में मानवता के घटक, संवेदनशीलता, विचारशीलता, बंधुत्व और चेतना के उन्नयन में योगदान करता है ; इसी बाबत साहित्यिक लेख, विचार और समीक्षाएं भी साझा की गयी हैं |
लेखक का विश्वास है की सूचना के इस युग में समावेशी प्रकृति के और समाज में मानवता, उत्कृष्टता और बंधुत्व को प्रोत्साहित करने वाले विचारों पर ज्यादा से ज्यादा जोर देना जरुरी है|
इनका रुझान बचपन से ही हिंदी साहित्य की तरफ रहा, विज्ञान की पढाई के साथ, कहानियां, उपन्यास, निबंध, जीवनी, यात्रा वृत्तान्त और लेख पढ़ते रहे, गायत्री परिवार के पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की अध्यात्म पर पुस्तकें ग्यारहवीं में पढनी शुरू की, साथ ही बचपन से ही कक्षा में पढाए जाने वाले साहित्य ने इनका साहित्य को लेकर लगाव और जिज्ञासा बढाई परिणाम ये हुआ की बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय से भौतिकी में स्नातक करते वक़्त कक्षाओं के बाद का काफी समय साहित्य अध्ययन में दिया, वहां की साइबर लाइब्रेरी में ऑनलाइन ही प्रेमचंद्र द्वारा रचित बहुत सी कहानिया पढ़ी और सामाजिक ताने बाने को लेकर अपनी समझ पुष्ट की |
वहीं के केन्द्रीय पुस्तकालय से फणीश्वर नाथ रेनू और मनु भंडारी जी को पढ़ा, दुष्यंत कुमार जी को पढ़ा और साहित्य से ये लगाव आईआईटी दिल्ली से एम.एस.सी करने से लेकर भारत सरकार की सेवा में शामिल होने से लेकर आज तक जारी है |
जो कुछ सीखा, जिससे जीवन को बेहतर किया वही सब और लोगों के साथ साझा करने के प्रयोजन से इस वेबसाइट का निर्माण किया गया है |
अगर कुछ लोगों की भी जीवन को लेकर जिज्ञासा इस वेबसाइट से शातं हो या उनके जीवन में शांति और उत्कृष्टता आये तो इस वेबसाइट का निर्माण करना सफल माना जायेगा |
इस वेबसाइट पर लेखक द्वारा व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं और लेखों पर प्रतिक्रियाएं, फीडबैक फॉर्म के जरिये दी जा सकती हैं|
No change in angular momentum(J).

Draw a diagram and solve.

Contribution of the mass falling on AoR will be zero.

Moment of inertia about that axis of rotation (AOR) will be zero.
