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चौथी पुस्तक परिचर्चा (29-03-2026) का विवरण यथा पुस्तकें एवं शामिल पुस्तक साथियों के नाम और इनपुट्स

बीते रविवार (29-03-2026) हम सबके सामूहिक प्रयास और आदरणीय महेश चन्द्र पुनेठा सर के प्रोत्साहन से चौथी साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा का ऑनलाइन आयोजन सफल रहा, जिसमें निम्नलिखित पुस्तकों/रचनाओं/विषयों पर सार्थक चर्चा हुयी:

  • ·"कुछ यूँ रचती है हमें किताब"- आर. डी. सैनी 
  • ·जितनी मिट्टी उतना सोना – अशोक पांडे
  • ·तुम पहले क्यों नहीं आए – कैलाश सत्यार्थी
  • ·DSB के गलियारों से – स्मिता कर्नाटक (समय साक्ष्य प्रकाशन)
  • ·खुशहाल जीवन के मंत्र – डॉ विजय अग्रवाल
  • ·Pink मतलब स्त्री नहीं होता (कविता संग्रह)- युवा कवि विकास रमेशानंदी
  • ·चीजों के प्रति सचेत रहकर सुनने का प्रयास
  • ·सर्दियों मे स्तनपान (कविता) - विकास रमेशानंदी
  • ·नापसंद विषय (कविता) - विकास रमेशानंदी
  • ·कलाकार अकिंचन होता है (कविता) - विकास रमेशानंदी
  • लिखने की प्रेरणा

  1. ·एक रंग बिरंगी प्यारी से किताब कैसे एक बच्चे को इतना रमा लेती है कि वह रात का खाना तक नहीं खाता
  2. · कहानी की किताब से पैदा हुयी पढ़ने की रुचि कैसे अकादमिक किताबों के अध्ययन से परीक्षा परिणाम के बेहतर होने से बड़ा होकर राज्य की शिक्षा का मुख्य अधिकारी बनने तक के सफर पर प्रकाश
  3. ·एक किताब लेखक की जिंदगी भर का निचोड़ हो सकती है
  4. ·हर रात एक किताब का कम से कम एक पेज पढ़ने पर ज़ोर, इस तरह साल मे कम से कम 365 पेज
  5. ·यह कहानी रामजी के माध्यम से सामाजिक, शैक्षणिक और व्यक्तिगत संघर्षों को चित्रित करती है, और बताती है कि कैसे एक पुस्तक किसी के जीवन का मार्गदर्शन कर सकती है।
  6. ·कुछ बदलाव सालों का संघर्ष मांगते हैं, जैसे कैलाश सत्यार्थी द्वारा श्रम संहिता मे बदलाव के लिए संघर्ष
  7. ·अपने घर या कार्यालय मे कार्यरत कम पूंजी वाले व्यक्तियों के बच्चों के लिए किताबों और पढ़ने लिखने कि व्यवस्था करना
  8. ·बर्थडे पार्टी मे या कन्या पूजन मे रिटर्न गिफ्ट मे बच्चों को रोचक पुस्तकें देना
  9. ·गिफ्ट मे मिली पुस्तकों से पाठ्यक्रम से इत्तर पढ़ने की नेक शुरुआत
  10. ·लैंगिक भेदभाव पर बात
  11. ·पढ़ने की संस्कृति को बढ़ाने के लिए पुस्तकें भेंट करने के प्रचलन को प्रोत्साहन, शुरुआत मे लघु कथाओं की पुस्तक भेंट करना ताकि एक पेज पढ़ने के बाद अगला पन्ना पलटने का मन करे
  12. ·बिना लाभ हानि की परवाह किए अच्छी पुस्तकें भेंट स्वरूप देना
  13. ·बचपन मे किसी दूसरे को पुरस्कार मे मिली विज्ञान की पुस्तक द्वारा पाठक का विज्ञान के क्षेत्र मे रुचि पैदा होना और फिर परमाणु ऊर्जा विभाग तक का सफर
  14. ·माने पुस्तक जिसको भेंट दी गयी उसके इत्तर भी किसी के काम आ सकती है |
  15. ·कोई भी व्यक्ति जो पढ्ना जानता हो, उसे यदि वक़्त मिल जाए तो वह जरूर भेंट मे मिली हुयी पुस्तक को पढ़ना शुरू करेगा
  16. ·एक पुस्तक साथी ने तो खुद दोस्तों को किताबें भेज दीं ताकि वह उन्हे वापस उसके जन्मदिन पर भेंट स्वरूप भेज सकें

उक्त कार्यक्रम मे निम्नलिखित पुस्तकसाथी मौजूद रहे:

अंशिका, सौम्या, सिद्धि, प्रिया, विशाल चंद,अंकित मिश्रा, लक्ष्मण,कमल, अंशुल, कल्याण, अरविंद, सचिन, गायत्री,अंकित,हिमांशु, राजन,अंजना, कृष्णकांत,उर्मिला, oak ride एवं लवकुश|

पुस्तक परिचर्चा मे शामिल सभी पुस्तक साथियों (bookmates) ने पुस्तक परिचर्चा मे शामिल होकर/अभिव्यक्ति/सराहना/भागीदारी के माध्यम से इस पहल को पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने में, मानवीय मूल्यों के पोषण में, अपनी बात को बेहिचक रखने में महत्वपूर्ण माना एवं एक दूसरे के प्रति आभार व्यक्त किया ताकि इस जरूरी कार्य की नियमितता बनी रहे एवं समाज मे एक सकारात्मक बदलाव में अपना विनम्र योगदान सुनिश्चित किया जा सके |

धन्यवाद