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मानव हो, न मानविकी से दूर रहो (कविता) - लवकुश कुमार

मानव होन मानविकी से दूर रहो

पढ़ो तुम विज्ञान, लेकिन समझना समाज को भी

ताकि कर सको आविष्कार,

समाज के स्थायित्व के लिए |

है जरूरी गणित,

आदान-प्रदान और विज्ञान तथा आकाश मे यात्राओं के लिए,

लेकिन पढ़ो तुम साहित्य भी,

ताकि हर यात्रा को एक उचित उद्देश्य दे सको

मानव हो, न मानविकी से दूर रहो |

पढ़ो तुम सांख्यिकी और जुटाओ आकड़ें,

इंसान की व्यवस्थाओं और दिक्कतों को समझकर

हल करने के लिए,

लेकिन भूल न जाना साहित्य और इतिहास की ओर रुख करना

जो तुम्हें, वाकिफ कराएगी इंसान की आकांक्षाओं, व्यवहार और असली जरूरतों से

मानव हो, न मानविकी से दूर रहो|

तुम भौतिकी भी पढना, रसायन शास्त्र और जन्तु विज्ञान भी,

लेकिन साथ मे समझना कला और सुंदरता को भी,

ताकि जान सको इंसान के जीवन मे सहूलियत और सुरक्षा के साथ

सृजनात्मकता, अभिव्यक्ति, उत्साह और रचनात्मकता के महत्व को भी,

इंजीनियर बनो, डॉक्टर बनो और साथ मे बनना एक संवेदनशील इंसान भी,

ताकि अपने काम के केंद्र मे रख सको, काम से मिलने वाला आनंद,

ना कि कभी ना ख़त्म होने वाली नंबर वन बनने की भूख,

इसके लिए जरूरी है की आप उनकी भी कहानियाँ पढ़ो

जिनसे कभी मिले नहीं, जिनके बीच कभी रहे नहीं,

ताकि जान सको उनकी भी तकलीफ़ें और समझ सको

उनकी व्यवहार के पीछे की परिस्थिति, आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं को भी,

और तब कहीं जान पाओगे कि जीवन के उद्देश्य मे केवल आराम,

मन मुताबिक इंसान और चीज़ों का पाना ही नहीं होता,

इसमे हो सकता है समाज मे असमानता को कम करना,

और लोगों को गरिमामय जीवन देकर, 

अच्छा स्वास्थ्य और आवास देकर

उनके चेहरे पर मुस्कान और जीवन मे उत्कृष्टता लाना भी |

बन जाना तुम वकील, पढ़कर कानून की किताबें,

लेकिन न भूलना इतिहास और मनोविज्ञान की आधारभूत समझ हासिल करना

ताकि समझ सको कि हम यहाँ तक कैसे पहुंचे और भावनाओं मे बहकर या दबाव और लालच मे आकर किये गए अनुचित के समर्थन,

ने हमे कहाँ लाकर खड़ा कर दिया है !

ताकि बचा सको खुद को किसी अनुचित इंसान को समर्थन देने से,

क्योंकि जिसे इंसान मज़बूरी कहता है, वह एक चुना हुआ विकल्प होता है,

जिसमे इंसान अपने क्षुद्र स्वार्थों और सुविधा के चलते समाज मे अन्याय होने के रास्ते को अनजाने में समर्थन दे देता है,

और भूल जाता है कि इस तरह यदि संघर्ष और मानवीय मूल्यों के ऊपर हर कोई सुविधा को तरजीह देने लगे तो एक दिन भारी असुविधाओं और दिक्कतें उसे भी घेर सकती हैं,

इस बात को और अच्छे से समझना है तो मानविकी से ना दूर रहो|

बन जाना तुम एक प्रशासनिक अधिकारी

पर साथ मे बनना समाज के अध्येता भी, 

हो सकता है कि तुम्हें अधिकारी बनने

मे वक़्त लग जाए, 

लेकिन एक बात तय होगी कि तुम

लोगों को उनकी परिस्थितियों के प्रकाश मे देख पाने मे सक्षम होगी

और ले पाओगी ऐसे निर्णय जो लोगों में प्रेम,

उम्मीद और विश्वास जगा सकें

ना कि नफरत और निराशा के भाव,

मानव हो, न मानविकी से दूर रहो |

बन सको तो शिक्षक बनना,

बस एक बात याद रखना

अपने विषय तक सीमित न रहना,

समझना मानविकी के विषयों को भी

माने साहित्य, इतिहास, दर्शनशास्त्र, भाषाविज्ञान, धर्म, और कला,

ताकि वक़्त जरूरत अपने विद्यार्थियों के समग्र और समावेशी विकास

और आलोचनात्मक रूप से सोचने मे योगदान दे सको,

ताकि सुनिश्चित हो सके,

समाज मे मनुष्य की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का अध्ययन

मानव हो, न मानविकी से दूर रहो|

बन जाना तुम उद्यमी और व्यापारी,

लेकिन वक़्त रखना, आध्यात्मिक अध्ययन के लिए भी,

ताकि समझ सको कि पैसे का उद्देश्य,

केवल काम और संपत्ति का विस्तार ही नहीं,

इसे अध्ययन और समसरता के प्रसार मे भी लगाया जा सकता है,

और समझ लेना इस बात को भी कि भोगने से शांति नहीं मिलती

शांति मिलती है, चाहत के मिटने से,

व्यापार करना सामान का, ना कि विश्वास, असुरक्षा और दिखावे का

मानव हो, न मानविकी से दूर रहो |

तुम जरूर समझना कि आकाश नीला क्यों होता है,

और कैसे होता है चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण,

लेकिन मत चूकना तुम यह समझने  से कि इंसान कैसे सोचता है,

कैसे व्यवहार करता है, और कैसे करता है अपनी अभिव्यक्ति,

क्योंकि ये जाने बिना तुम अपने विज्ञान का एक सीमित उपयोग

ही कर पाओगे, इंसान की मदद करने में

मानव हो, न मानविकी से दूर रहो |

लोगों ने अपनी जीवन को निचोड़ा है साहित्य कोश को समृद्ध करने को,

ताकि न चूकें हम विभिन्न संस्कृतियों को समझने,

आलोचनात्मक रूप से सोचने और मानवीय अनुभवों

यथा सुख-दुःख, प्रेम-घृणा की गहरी समझ विकसित करने में,

इसीलिए आओ जरा संग करो उनका भी,

जो अब नहीं हैं हमारे बीच, लेकिन उनकी लेखनी है मौजूद,

लगता है अच्छा किसी का साथ और बातें तो किताबों की खिड़की में भी झाँकों,

इसमें भी है एक साथी जिससे आप कह सकती हैं कि,

आपसे मिलकर, आपको पढ़कर अच्छा लगा,

और इस तरह तय करना एक रास्ता,

एक संवेदनशील, करुण और साहसी इंसान बनने का,

मानव हो, न मानविकी से दूर रहना |

लवकुश कुमार


कवि भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं, 

जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।


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