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किताबें जो आपके सवालों का जवाब दे सकती हैं, आपकी समझ को विस्तार देकर आपके निर्णयों को आसान कर सकती हैं: भाग-4 (प्रिया )

प्रस्तुत है किताबों की सूची आपके संज्ञान के लिए :

1.सदा सफल हनुमान-- यह एक अद्भुत पुस्तक है इस पुस्तक में हनुमान जी के चरित्र के प्रबंधन और समन्वय से कार्य करने के तरीके/गुणों पर प्रकाश डाला गया है |

लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल

2.पढ़ो तो ऐसे पढ़ो -- इस पुस्तक में कैसे पढ़ना चाहिए ताकि याद रखना, समझना और समझाना आसान हो सके, इस बारे में बहुत विस्तार से बताया है

लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल

3.स्टूडेंट और मन की शक्ति-- इस पुस्तक में विद्यार्थियों के विद्यार्थी जीवन की समस्याओं के बारे में बताया गया है और मन की शक्ति पर प्रकाश डाल एक सही दिशा देकर, विद्यार्थियों को दक्षता और आत्मविश्वास के लिए जरूरी गुर सिखाये गए हैं | 

लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल

4.तृषित --- इस पुस्तक में डॉक्टर विजय अग्रवाल सर की जीवन कथा के बारे में बताया गया है उनके जीवन में उन्होंने कितने संघर्ष किए हैं उनका विस्तार से वर्णन किया गया है यह बहुत ज्यादा प्रभावित करने वाली और हिम्मत देने वाली पुस्तक है, जिससे  स्टूडेंट अपने मन में सर की बातों को उतार सकें और अपने जीवन को एक सार्थक दिशा दे सकें |

लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल

5.आजादी की रात-- यह पुस्तक हमारे भारत के बारे में, हमारे इतिहास से जुड़ी घटनाओं से संबंधित हैं इस पुस्तक में हमारे संविधान की विस्तार से विवेचना की गई है|

लेखक-- डोमिनीक लापिएर लैरी किॅलिन्स

6.स्टूडेंट और प्रेम की समझ-- यह पुस्तक प्रेम के बारे में बताती है कि प्रेम क्या होता है, यह स्टूडेंट्स को ध्यान मे रखकर लिखी गयी है ताकि वह अपने जीवन में इस बाबत सही निर्णय ले सकें और घटनाओं, अनुभवों को सही परिप्रेक्ष्य मे देख सकें, यह स्टूडेंट्स के लिए बहुत अच्छी और जरूरी पुस्तक है जिससे वह अपनी असली जरूरतों और प्राथमिकताओं को समझ कर उचित एवं सही रास्ता चुन सकें तथा  खुद की ऊर्जा और समय को जरूरी चीजों पर लगाकर अपने जीवन को अर्थ दे सकें |

लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल

7.स्टूडेंट और टाइम मैनेजमेंट--- इस पुस्तक में टाइम मैनेजमेंट के बारे में बताया गया है, हम अपने जीवन मे कैसे टाइम को मैनेज करें, काम और पढ़ाई के साथ ताकि दक्षता आए और हम शांति से काम कर सकें |

लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल

- प्रिया 

बरेली, उत्तर प्रदेश 


प्रिया जी स्नातक की विद्यार्थी हैं और सिविल सेवाओं की परीक्षा के लिए खुद को तैयार कर रही हैं|

आप कविताओं द्वारा स्वयं के विचारों और भावनाओं को व्यक्त करती हैं | समाज मे आपकी गहरी रुचि है और लोगों की मदद करने मे आपको एक अनोखी अनुभूति महसूस होती है, जो आपको और बेहतर करने को प्रेरित करती है|

इस बाबत कवि भवानी प्रसाद मिश्र जी की कुछ पंक्तियाँ याद आती हैं :

कुछ लिख के सो,

कुछ पढ़ के सो,

तू जिस जगह जागा सवेरे,

उस जगह से बढ़ के सो"

नए कवियों को निर्देशित करती वरिष्ठ कवि महेश चन्द्र पुनेठा जी की कविता, "पहली कोशिश" भी प्रासंगिक है:

मैं न लिख पाऊँ एक अच्छी कविता

दुनिया एक इंच इधर से उधर नहीं होगी

गर मैं न जी पाऊँ कविता

दुनिया में अंधेरा कुछ और बढ़ जाएगा

इसलिए मेरी पहली कोशिश है

कि मरने न पाए मेरे भीतर की कविता।


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