यदि आपको समाज की दिक्कतें विचलित करती हैं और आपका भी मन करता है कि समाज के लिए कुछ करें, या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा गलत संगति से बचा रहे और दूसरों की तकलीफ समझे और अपने पैरों पर खड़ा हो, दिक्कतों में घबराए नहीं, तो यह लेख आपके लिए है।
स्वयं के लिए और समाज के भले के लिए एक अच्छा काम हो सकता है कि हम साहित्य अध्ययन की संस्कृति विकसित करें, साहित्य ही इंसान को चिंतनशील बनाता है ताकि वह अपने इतर अन्य लोगों के दृष्टिकोण को समझ उनसे तालमेल बिठा सके और उनसे प्रेम कर सकें।
साहित्य, लेखक के अनुभवों का निचोड़ होता है, साहित्य पढ़कर हम किसी ऐसे समझदार इंसान की संगति पा सकते हैं जो अब हमारे बीच नहीं।
साहित्य अध्ययन हमारी समझ को विस्तार देता है, हम दयालु, साहसी और जिम्मेदार बनते हैं, कोई भी निर्णय लेना आसान होता है, क्योंकि स्पष्टता मिलती है, पता चलता है कि चीजें काम कैसे करती हैं, धारणाएं टूटतीं हैं और हमारा सामना सच से होता है।
उस धारणा को तोड़ना होगा कि कहानी, कविता और उपन्यास वगैरह तो मन बहलाने और टाइमपास करने के लिए हैं, सच्चाई तो यह है कि इन्हें पढ़कर ही हम अपने सीमित दायरे से हटकर अन्य लोगों की परिस्थितियों को समझ पाते हैं और उनकी दिक्कतों के प्रति संवेदनशील हो पाते हैं, हो सकता है कि साहित्य अध्ययन में आप किसी ऐसे इंसान के बारे में पढ़ें जिसने संघर्षों में हार न मानी हो, इससे आपको भी हिम्मत मिलती है।
वरिष्ठ लेखक, श्री महेश चंद्र पुनेठा जी अपनी पुस्तक, " शिक्षा के सवाल" में रेखांकित करते हैं कि शिक्षा के सवाल जीवन के सवालों से भिन्न नहीं हैं| जीवन को सृजनशील बनाना हो या समाज को शांतिमय, वह कहते हैं कि इसके लिए हमें पहले शिक्षा के सवालों को हल करना पड़ेगा, क्योंकि जीवन-समाज और शिक्षा अन्योन्याश्रित हैं।
आइये अपनी दिनचर्या का आधा घंटा ही सही, साहित्य अध्ययन को दें, बच्चे आपकी ही नकल करेंगे, वह किसी गलत संगति में पड़ें इससे बेहतर है कि वह कहानियों और उपन्यास के ज्ञान सागर में गोते लगाएं।
पढ़ें भी और साझा भी करें, घर में एक छोटी सी लाइब्रेरी बनाए और जैसा कि आदरणीय महेश पुनेठा सर कहते हैं कि साहित्य अध्ययन में जीवन को पढ़ना होता है न कि प्रतियोगी परीक्षा की किताबों को।
नियमित होने के लिए, हर हफ्ते या पंद्रह दिन पर अपने ४-५ दोस्तों के साथ मिलकर प्रत्यक्ष या आनलाइन पुस्तक परिचर्चा आयोजित करें और अपनी पढ़ी हुई पुस्तकों पर चर्चा करें और इस मुहिम को अन्य लोगों के साथ साझा करें, बिना यह सोचे कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं क्योंकि यह एक जरूरी काम है।
अपनी मुहिम की फोटो मुझे ईमेल कर सकते/सकती हैं मैं उन्हें अपनी वेबसाइट पर आपके नाम के साथ अपलोड करूंगा ताकि और लोग भी इस मुहिम को आगे बढ़ा सकें।
One more page initiative by literary Land
ढेरों शुभकामनाएं
- लवकुश कुमार
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